लखनऊ. समाजवादी पार्टी और उत्तर प्रदेश सरकार में चल रही खींचतान के बीच मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुधवार को अचानक से 23 जिलों के डीएम बदल दिए जिनमें कई जिले मुलायम सिंह की पार्टी के गढ़ माने जाते हैं. इस ट्रांसफर को राजनीतिक हलकों में अखिलेश द्वारा अपना रुतबा और दबदबा दिखाने की कोशिश माना जा रहा है.

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ट्रांसफर किए गए डीएम में मैनपुरी, एटा, संभल, बिजनौर जैसे जिलों के कलेक्टर भी शामिल हैं जो राजनीतिक तौर पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव का गढ़ है.
 
चाचा शिवपाल यादव के साथ चल रही तनातनी के बीच अखिलेश का यह फैसला एक तरह का संदेश माना जा रहा है कि सरकार कौन चला रहा है ये बिल्कुल साफ हो जाए.
 
बता दें कि इससे पहले यूपी में जब भी बड़े पैमाने पर अफसरों के तबादले होते थे तो अखिलेश इस पर मुलायम सिंह, शिवपाल, रामगोपाल और आजम खान तक से सलाह लेते थे. ऐसा पहली बार हुआ है कि मुलायम, शिवपाल और रामगोपाल तीनों दिल्ली मे थे और लखनऊ में 23 जिलों के डीएम एक झटके में बदल दिए गए.
 
क्या है मामला ?
 
बुधवार को दिल्ली में मुलायम सिंह के साथ हुई बैठक में शिवपाल के साथ-साथ अखिलेश को भी बुलाया गया था लेकिन अखिलेश ने आने से मना कर दिया था.
 
उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव ने जब अखिलेश यादव को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा के शिवपाल सिंह को यह पद दिया उसके कुछ ही घंटों के बाद अखिलेश ने अपने चाचा मंत्री शिवपाल यादव से पीडब्लूडी समेत 7 मंत्रालय वापस ले लिए थे. 
 
माना जा रहा है कि खुद को हटाकर शिवपाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाने से खफा अखिलेश ने ये कदम उठाकर पार्टी और ब्यूरोक्रेसी को साफ संदेश देने की कोशिश की है कि सरकार के अंदर अब ट्रांसफर-पोस्टिंग का पावर सेंटर वो अपने पास समेट रहे हैं.