नई दिल्ली. कश्मीर में शांति बहाली की कोशिशें विफल होने के बाद आज​ फिर से दिल्ली में इस मसले पर सर्वदलीय बैठक शुरू हो गई है. 
 
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माना जा रहा है कि कश्मीर में अलगाववादियों ने जिस तरह का सलूक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के नेताओं के साथ किया है उससे सरकार काफी नाराज है और वह कड़े कदम उठा सकती है. 
 
मिली जानकारी के मुताबिक सरकारी सुविधाएं भोग रहे अलगाववादी नेताओं से विदेश दौरे, मेडिकल सुविधा, होटल में ठहरने व सुरक्षा सेवाएं वापस ली जा सकती हैं.
 
इससे पहले मंगलवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह के घर पर बैठकों का दौर चला था. राजनाथ को गृह सचिव और आईबी चीफ ने पहले कश्मीर के हालात पर ब्रीफ किया था. उसके बाद बीजेपी नेताओं की बैठक हुई थी.
 
बता दें कि 4 सितंबर को राजनाथ सिंह के नेतृत्व में 26 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल कश्मीर गया था. वहां से लौटने के बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कश्मीर पर नई रणनीति को लेकर चर्चा की. साथ ही गृह मंत्री ने पीएम मोदी को प्रतिनिधिमंडल की रिपोर्ट भी सौंपी.
 
हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद घाटी में हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था. अभी तक घाटी से कर्फ्यू नहीं हटाया गया है. बीते दो महीनों में अब तक पुलिस और सेना की कार्रवाई में 72 लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग घायल हुए हैं. इससे देखते हुए सरकार द्वारा शांति बहाली का रास्ता तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है. 
 
इसके अलावा जम्मू और कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भी अलगाववादियों पर जमकर बरसीं. उन्होंने कहा कि वे अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए विदेश भेजते हैं और यहां के युवाओं के हाथों में किताब की जगह पत्थर थमाते हैं. हुर्रियत नेताओं को नसीहत देते हुए महबूबा मुफ्ती ने कहा कि जब तहरीक तहजीब से आगे निकल जाए तो तहरीक नहीं रहती. 

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