नई दिल्ली. आलोचनाओं से परे कोई नहीं हो सकता. प्रदेश का मुख्यमंत्री भी नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता को आज यही नसीहत दे डाली. 
 
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सुप्रीम कोर्ट ने मानहानि के मामलों को राजनीतिक बदले के लिए हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने की आवश्यकता जताई है. कोर्ट ने कहा कि सरकार की आलोचना करने पर मानहानि के मुकदमों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. 
साथ ही तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता को नसीहत भी दी, कहा- आप पब्लिक फिगर हैं और आपको आलोचनाएं सहनी चाहिए. आपको इन मामलों में आमने-सामने की लड़ाई लड़नी चाहिए न कि सरकारी तंत्र का इस्तेमाल करना चाहिए.
 
कोर्ट ने तमिलनाडु की पार्टी DMDK के प्रमुख और फिल्म अभिनेता विजयकांत और उनकी पत्नी प्रेमलता के खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट पर भी रोक लगाते हुए ये बातें कही. तमिलनाडु सरकार ने कोर्ट में बताया है कि DMDK के खिलाफ 48 केस हैं जिसमें से 28 पार्टी प्रमुख विजयकांत के खिलाफ ही हैं. DMK के खिलाफ 85 केस और सुब्रमण्यम स्वामी के खिलाफ पांच केस दर्ज हैं. कांग्रेस के खिलाफ सात केस, और मीडिया के खिलाफ 55 केस दर्ज हैं.

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