नई दिल्ली. बसपा प्रमुख मायावती पर उनके पूर्व सहयोगी स्वामी प्रसाद मौर्य ने पार्टी का टिकट नीलाम करने का आरोप लगाते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. इसके कुछ ही घंटे बाद लोक जनशक्ति पार्टी अध्यक्ष राम विलास पासवान ने भी मायावती पर आरोप लगाया कि वह हर चुनाव के पहले टिकट बंटवारे को एक व्यवसाय बना देती हैं. 
 
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पासवान का कहना है कि चुनाव करीब आने पर टिकट के दाम बढ़ जाते हैं. मायावती को कभी भी दलित ज्यादा पसंद नहीं रहे केवल पैसा पसंद रहा. पासवान ने कहा, “मायावती ने दलितों के हित के लिए कभी काम नहीं किया है. उन्होंने टिकट बंटवारे को हमेशा व्यवसाय बनाया है.” 
 
बता दें कि स्वामी प्रसाद मौर्य ने पार्टी छोड़ने के पहले कहा, “उनका दम घुट रहा था.” उन्होंने कहा कि मायावती पार्टी का टिकट बेच रही हैं और उन्होंने पार्टी के संस्थापक कांशीराम की विचारधारा का परित्याग कर दिया है. मौर्य ने कहा कि पार्टी में टिकट केवल बेचा नहीं जा रहा, बल्कि नीलाम किया जा रहा है. मौर्य ने आरोप लगाया कि मायावती दलितों की नहीं, दौलत की बेटी हैं जो विधानसभा चुनावों के टिकट करोड़ों में बेच रही है.
 
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मायावती ने इस आरोप से इनकार करते हुए कहा कि 2012 के विधानसभा चुनाव में भी मौर्य ने बेटे और बेटी को टिकट दिलाया था जो हार गए. लोकसभा चुनाव में भी वो बेटा-बेटी के लिए टिकट मांग रहे थे. इस बार भी कह रहे थे कि बेटा, बेटी और उनको टिकट मिले. मायावती ने कहा कि 2012 में भी वो इसके लिए तैयार नहीं थीं कि उनके बेटा-बेटी को टिकट दिया जाए लेकिन पार्टी के दूसरे नेताओं ने सलाह दी कि चुनाव एनाउंस हो चुका है इसलिए माहौल खराब न हो इसके लिए इस बार मौर्य की मांग को मान लिया जाए लेकिन आगे ऐसा करेंगे तो एक्शन ले लीजिएगा.

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