लखनऊ. उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने में अब सालभर से भी कम समय बचा है. इसलिए दलितों में अपनी पैठ गहरी करने की जद्दोजहद में लगी पार्टियां अब दलित महापुरुषों के सहारे अपनी सियासत चमकाने में लग गई हैं. बाबा साहब अंबेडकर, संत रविदास, जगजीवन राम व कांशीराम के जरिए दलितों को रिझाने की कोशिशें अब ज्यादा तेज हो गई हैं.
 
सत्ता में वापसी तय करने में जुटी SP 
सत्ता में वापसी तय करने में जुटी सपा को दलितों में भी अपनी पैठ बढ़ाने की चिंता है. उसकी रणनीति दलितों में गैर जाटव जातियों में पासी, वाल्मीकि, खटिक, कोरी, धोबी का बड़ा समर्थन हासिल करने की है. पार्टी इन जातियों को बताना चाहती है कि बसपा सरकार में इनकी उपेक्षा हुई. पार्टी का अनुसूचित जाति जन प्रकोष्ठ प्रकोष्ठ दलित बस्तियों में बताएगा कि कैसे अखिलेश सरकार दलित वर्ग के हित में काम कर रही है. चुनाव को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पिछले साल अंबेडकर परिनिर्वाण दिवस पर रद्द सार्वजनिक अवकाश को इस साल बहाल कर दिया.
 
मायावती देंगी करारा जवाब
कभी संत रविदास तो कभी बाबा साहब अंबेडकर. दलित वोटबैंक में सेंध लगाने की विरोधी दलों की लगातार चल रही कोशिशों का बसपा मुखिया मायावती 14 अप्रैल को लखनऊ में बड़ा जमावड़ा कर करारा जवाब देंगी. बसपा दलित समाज में जन्मे संतों, गुरुओं, महापुरुषों के सम्मान में उनकी जयंती व पुण्यतिथि पर बड़े आयोजन करती रही है. बाबा साहब अंबडेकर के जन्मदिन 14 अप्रैल और परिनिर्वाण दिवस 6 दिसंबर को पार्टी हर वर्ष आयोजन करती रही है, लेकिन विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही जिस तरह विरोधी दलों ने पार्टी के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश तेज कर दी है, उसके बाद पार्टी ने बाबा साहब के जन्मदिन पर इस बार शक्ति प्रदर्शन से जवाब देने का फैसला किया है.
 
BSP के खिलाफ BJP छेड़ेगी जंग
विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) बसपा के खिलाफ बड़ी सियासी जंग छेड़ने की तैयारी में है. दलित वोटों को लेकर बसपा के साथ होने वाले इस सियासी टकराव में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर सबसे बड़ा मुद्दा होंगे. बीजेपी 14 अप्रैल को बाबा सहेब की जयंती को अपने सभी छोटे-बड़े कार्यालयों पर प्रमुखता से मनाएगी. अंबेडकर जयंती के बहाने बीजेपी मायावती और उनकी नीतियों पर हमला बोलेगी. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी 10 से 20 फीसदी दलित वोटों को अपनी ओर खींचने की इस मुहिम के तहत ग्रामीण इलाकों पर सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित करने जा रही है.
 
कांग्रेस ने दलित नेताओं को आगे बढ़ाया
लगातार 10 साल केंद्र की सत्ता में रही कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश में दलितों के बीच नए नेतृत्व उभारने में जुट गई है. पार्टी में दलितों के बीच अच्छी पैठ रखने वाले नेताओं को आगे बढ़ाया जा रहा है. पार्टी की ओर से हाल ही में कांग्रेस ने लखनऊ में ‘दलित नेतृत्व विकास और संवाद’ विषय पर दलित कान्क्लेव का आयोजन किया गया था. इसमें कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी शिरकत की थी. पार्टी अब उत्तर प्रदेश में दलित चेहरे के तौर पर पन्नालाल पुनिया को आगे कर रही है. 

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