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1110 मैच, 4000 विकेट और 39000 रन! 52 की उम्र में खेला आखिरी मैच, वो इकलौता खिलाड़ी जिसका सचिन भी नहीं तोड़ पाए रिकॉर्ड!

क्रिकेट में जहाँ खिलाड़ी 10-15 साल में रिटायर हो जाते हैं, वहीं इंग्लैंड के दिग्गज विल्फ्रेड रोड्स ने तीन दशकों तक राज किया. 30 साल से लंबे इंटरनेशनल करियर और 1,110 फर्स्ट-क्लास मैचों के साथ रोड्स ने 4,000 विकेट और 39,000 रन का ऐसा अमर रिकॉर्ड बनाया, जिसे तोड़ना सचिन तेंदुलकर या विराट कोहली जैसे दिग्गजों के लिए भी नामुमकिन रहा. 


By: Shivani Singh | Published: July 27, 2026 8:09:25 PM IST

1110 मैच, 4000 विकेट और 39000 रन! 52 की उम्र में खेला आखिरी मैच, वो इकलौता खिलाड़ी जिसका सचिन भी नहीं तोड़ पाए रिकॉर्ड! - Photo Gallery
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30 सालों का ऐतिहासिक सफर

क्रिकेट की दुनिया में एक ऐसा खिलाड़ी भी था जिसने तीन दशकों तक दुनिया के बेहतरीन बल्लेबाजों और गेंदबाजों को अपनी काबिलियत से मात दी. वह सिर्फ़ एक खिलाड़ी नहीं थे, बल्कि क्रिकेट के मैदान पर लंबे समय तक टिके रहने और लगातार अच्छा प्रदर्शन करने की जीती-जागती मिसाल थे. विल्फ्रेड रोड्स क्रिकेट इतिहास के इतने शानदार और अद्भुत स्तंभ हैं कि सचिन तेंदुलकर या विराट कोहली जैसे आज के दिग्गज भी उनके रिकॉर्ड कभी नहीं तोड़ पाए. 1899 में अपने डेब्यू से लेकर 1930 में अपने आखिरी मैच तक, रोड्स का इंटरनेशनल करियर पूरे 30 साल और 315 दिनों का रहा.

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फर्स्ट-क्लास क्रिकेट के बादशाह

फर्स्ट-क्लास क्रिकेट के 'अमर बादशाह' विल्फ्रेड रोड्स के आंकड़े इतने हैरान करने वाले हैं कि वे किसी परीकथा जैसे लगते हैं. उन्होंने कुल 1,110 फर्स्ट-क्लास मैच खेले—एक ऐसा वर्ल्ड रिकॉर्ड जिसे आज के दौर में छूना भी लगभग नामुमकिन है. इतने लंबे करियर के दौरान, रोड्स ने खेल के सिर्फ़ एक पहलू में ही नहीं, बल्कि एक ऑल-राउंडर के तौर पर भी बेहतरीन प्रदर्शन किया. एक गेंदबाज के तौर पर शुरुआत करके मिडिल-ऑर्डर बल्लेबाज और बाद में ओपनर के तौर पर खूब रन बनाना उनकी अद्भुत काबिलियत को दिखाता है. वह दुनिया के इकलौते ऐसे क्रिकेटर हैं जिन्होंने फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में 4,000 विकेट लिए और 39,000 से ज़्यादा रन बनाए.

1110 मैच, 4000 विकेट और 39000 रन! 52 की उम्र में खेला आखिरी मैच, वो इकलौता खिलाड़ी जिसका सचिन भी नहीं तोड़ पाए रिकॉर्ड! - Photo Gallery
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48 की उम्र में साहसी वापसी

रोड्स के करियर का सबसे शानदार और रोमांचक अध्याय 1926 में लिखा गया. इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच मशहूर एशेज सीरीज चल रही थी. पहले चार टेस्ट मैच ड्रॉ पर खत्म हुए थे, जिससे सीरीज 0-0 से बराबरी पर थी. ओवल में होने वाला आखिरी मैच निर्णायक था. इंग्लैंड के चयनकर्ताओं ने सचमुच एक हैरान करने वाला और साहसी फैसला लिया: उन्होंने 48 साल के विल्फ्रेड रोड्स को टीम में वापस बुलाया. रोड्स ने अपना पिछला टेस्ट मैच छह साल पहले, 1920 में खेला था.

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आलोचकों को मुंहतोड़ जवाब और एशेज पर कब्जा

आलोचकों को लगा कि यह फैसला बहुत बुरा साबित होगा, लेकिन रोड्स मैदान पर उतरे और इतिहास रच दिया. उन्होंने न सिर्फ़ मैच खेला, बल्कि अपनी जादुई स्पिन गेंदबाजी से ऑस्ट्रेलिया की मजबूत बल्लेबाजी लाइनअप को तहस-नहस कर दिया. उन्होंने मैच में छह विकेट लिए (पहली पारी में दो और दूसरी पारी में चार). अपनी घातक गेंदबाज़ी की बदौलत, इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया को करारी शिकस्त दी और एशेज़ ट्रॉफी अपने नाम की. 48 साल के एक अनुभवी खिलाड़ी ने इंग्लैंड को ऐसी ऐतिहासिक जीत दिलाई जिसे देश हमेशा याद रखेगा.

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रिकॉर्ड जो समय की सीमाओं से परे हैं

क्रिकेट की दुनिया में, सचिन तेंदुलकर को उनके शानदार 24 साल के इंटरनेशनल करियर के कारण 'क्रिकेट का भगवान' माना जाता है. वहीं, विराट कोहली अपनी फिटनेस और रन बनाने की कभी न खत्म होने वाली भूख के लिए जाने जाते हैं; फिर भी, इन दोनों दिग्गजों की उपलब्धियों के मुकाबले विल्फ्रेड रोड्स का रिकॉर्ड और भी ज़्यादा ज़बरदस्त लगता है. तीन दशकों से ज़्यादा समय तक टेस्ट करियर बनाए रखना, 52 साल की उम्र तक इंटरनेशनल क्रिकेट खेलना और 1,110 मैचों में हिस्सा लेना, ये ऐसे कारनामे हैं जिन्हें आज के दौर में हासिल करने के लिए कम से कम दो जिंदगियों की ज़रूरत होगी.