Old House Door: पुराने घरों के दरवाजे छोटे और नीचे क्यों बनाए जाते थे? क्या था इसके पीछे का विज्ञान
Old House Door Design: अगर आपने कभी किसी गांव या पुराने पुश्तैनी घर को ध्यान से देखा होगा, तो एक बात जरूर नोटिस की होगी कि वहां के दरवाजे आज के मुकाबले काफी छोटे और नीचे होते थे. घर में प्रवेश करने के लिए लोगों को सिर झुकाना पड़ता था. पहली नजर में यह सिर्फ पुराने समय की निर्माण शैली लग सकती है, लेकिन इसके पीछे कई वैज्ञानिक, सामाजिक और सांस्कृतिक वजहें छिपी थीं. ऐसे में चलिए विस्तार से समझे आखिर हमारे पूर्वज घरों के दरवाजे इतने छोटे क्यों बनाते थे.
घर का टेम्परेचर कंट्रोल करने का था आसान तरीका
पुराने जमाने में, 24 घंटे बिजली नहीं मिलती थी, न ही एयर कंडीशनर या हीटर सस्ते थे. इसलिए, टेम्परेचर कंट्रोल करने के लिए दरवाज़े छोटे रखे जाते थे. गर्मियों में, छोटे दरवाज़े बाहर की गर्म हवा को घर में आने से रोकते थे, जबकि सर्दियों में, छोटे दरवाज़े घर को गर्म रखते थे और वेंटिलेशन बनाए रखते थे.
सुरक्षा के लिहाज से भी छोटे दरवाजे थे फायदेमंद
पुराने जमाने में, ये दरवाज़े चोरी और डकैती से बचाने का काम करते थे. छोटे दरवाज़ों से सिर्फ़ एक ही आदमी अंदर आ सकता था, और वह भी झुककर. अगर कोई हमला करने की कोशिश करता, तो दरवाज़े का छोटा साइज़ उसे पूरा ज़ोर लगाने से रोकता था, जिससे अंदर वाले अपना बचाव कर पाते थे.
छोटे दरवाजे से दीवारों और चौखट की मजबूती बनी रहती थी
पुराने ज़माने में, दरवाज़े भारी लकड़ी के बने होते थे ताकि वे आसानी से टूट न सकें. हालांकि, दीवारें सीमेंट की नहीं, बल्कि मिट्टी या पत्थर की बनी होती थीं. दरवाज़े से ज़्यादा दबाव पड़ने पर दीवार या दरवाज़े का फ्रेम गिर सकता था. इसलिए, दीवार पर दबाव कम करने और दरवाज़े के फ्रेम को झुकने से बचाने के लिए दरवाज़ों का साइज़ छोटा रखा जाता था.
छोटे दरवाजों से परिवार की प्राइवेसी रहती थी सुरक्षित
छोटे दरवाज़े घर के अंदर प्राइवेसी बनाए रखने में भी मदद करते थे. छोटे दरवाज़ों से कोई भी सीधे कमरे या आंगन में झांक नहीं सकता था. इससे महिलाओं को प्राइवेसी मिलती थी.
छोटे दरवाजे से झुककर प्रवेश करना था सम्मान का प्रतीक
कहा जाता है कि जब कोई व्यक्ति झुककर किसी के घर में जाता है, तो वह अपना ईगो पीछे छोड़ देता है. यह सम्मान और विनम्रता दिखाता है. इसलिए, पुराने घरों में दरवाज़े छोटे और नीचे बनाए जाते थे.
पुराने समय की समझ आज भी देती है सीख
आज भले ही घरों के दरवाजे बड़े और आधुनिक डिजाइन के बनने लगे हों, लेकिन पुराने समय की यह वास्तुकला अपने भीतर विज्ञान, सुरक्षा, ऊर्जा बचत और संस्कृति का अनोखा मेल समेटे हुए थी. यही वजह है कि पुराने घरों की कई पारंपरिक तकनीकें आज भी टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल निर्माण के उदाहरण के रूप में देखी जाती हैं.