63 की उम्र में MA का दिया एग्जाम, आगे करने वाले हैं इस विषय पर PhD… पंजाब के पूर्व सीएम की शिक्षा यात्रा प्रेरणा से कम नहीं
Charanjit Singh Channi Education: उम्र को अक्सर पढ़ाई की राह में सबसे बड़ी रुकावट माना जाता है, लेकिन पंजाब के पूर्व सीएम और जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी की कहानी इससे अलग नजर आती है. 63 साल की उम्र में चन्नी ने पंजाब यूनिवर्सिटी में MA पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (MPA) की परीक्षा 20 अगस्त 2026 को दी. खास बात यह रही कि जिस दिन उन्होंने परीक्षा दी, उसी दौरान दिल्ली में कांग्रेस की अहम बैठक भी थी. चन्नी ने बैठक में शामिल होने के बजाय अपनी परीक्षा को प्राथमिकता दी.
20 अगस्त को चरणजीत सिंह चन्नी ने दिया MPA का पेपर
चरणजीत सिंह चन्नी ने बताया कि उन्होंने 20 अगस्त को एमए पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की परीक्षा दी थी. परीक्षा के दौरान वह दूसरे विद्यार्थियों के साथ परीक्षा कक्ष में बैठकर पेपर लिख रहे थे. इसी दौरान उनकी तस्वीर बाहर ले ली गई, जो बाद में डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई. तस्वीर सामने आने के बाद उनके परीक्षा देने को लेकर कई तरह के सवाल उठे. चन्नी ने इन सवालों पर सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने परीक्षा के दौरान किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया.
परीक्षा छोड़ते तो एक साल और लगता- चन्नी
चरणजीत सिंह चन्नी ने बताया कि अगर वह इस पेपर को छोड़ देते तो उनकी डिग्री पूरी होने में करीब एक साल और लग जाता. उनका कहना था कि कांग्रेस की बैठकें आगे भी होती रहेंगी, लेकिन परीक्षा का मौका तय समय पर ही मिलता है.
पहले भी चरणजीत सिंह चन्नी हासिल कर चुके हैं कई डिग्रियां
चरणजीत सिंह चन्नी की शिक्षा यात्रा काफी दिलचस्प रही है. उन्होंने BA और LLB की पढ़ाई की. इसके बाद MBA भी किया. वह पॉलिटिकल साइंस में मास्टर डिग्री भी हासिल कर चुके हैं.
चन्नी पॉलिटिकल साइंस में कर चुके हैं PHD
चरणजीत सिंह चन्नी ने पंजाब यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में PHD भी पूरी की है. उनकी अकादमिक रुचि राजनीति और चुनावी रणनीतियों से जुड़े विषयों में रही है.
MPA के बाद फिर PHD करेंगे चन्नी
MPA की पढ़ाई पूरी करने के बाद भी चन्नी अकादमिक क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं. वह पब्लिक पॉलिसी और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े विषय पर आगे PHD की डिग्री लेने वाले हैं.
चन्नी की पढ़ाई की लालसा, युवाओं के लिए प्रेरणा
चरणजीत सिंह चन्नी की यह शिक्षा यात्रा यह बताती है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती. सीएम और सांसद जैसे महत्वपूर्ण राजनीतिक पदों पर रहने के बावजूद उन्होंने उच्च शिक्षा का सिलसिला जारी रखा और 63 की उम्र में परीक्षा देने पहुंचे.