क्या आप जानते हैं Mount Everest का पुराना नाम? सबसे पहली बार किसने की थी चढ़ाई?
Mount Everest दुनिया की सबसे ऊंची चोटी है, जो हिमालय में नेपाल और तिब्बत की सीमा पर स्थित है. ये पर्वत साहस, रोमांच और प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत प्रतीक माना जाता है. इसकी ऊंचाई लगभग 8,848.86 मीटर है और ये पर्वतारोहियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है. हर साल दुनिया भर से पर्वतारोही इसे फतह करने आते हैं, लेकिन कठिन मौसम और ऑक्सीजन की कमी इसे बेहद खतरनाक बनाते हैं.
ऊंचाई और भौगोलिक स्थिति
माउंट ऐवरेस्ट हिमालय पर्वतमाला का हिस्सा है और ये नेपाल तथा तिब्बत की सीमा पर स्थित है. इसकी ऊंचाई लगभग 8,848.86 मीटर है, जो इसे पृथ्वी की सबसे ऊंची चोटी बनाती है. इसकी चोटी हमेशा बर्फ से ढकी रहती है और मौसम बहुत कठोर होता है.
पुराना नाम पीक XV
इस महान पर्वत को पहले 'पीक XV' के नाम से जाना जाता था. 19वीं सदी में ब्रिटिश सर्वेक्षण के दौरान जब इसकी ऊंचाई मापी गई, तो इसे सीरियल नंबर के आधार पर ये नाम दिया गया था. उस समय इसकी पहचान इसी नाम से होती थी.
नाम परिवर्तन और सर जॉर्ज एवेरेस्ट
1865 में इसका नाम बदलकर माउंट ऐवरेस्ट रखा गया. ये नाम ब्रिटिश सर्वेयर सर जॉर्ज एवेरेस्ट के सम्मान में रखा गया, जिन्होंने भारत के भौगोलिक सर्वेक्षण में बड़ा योगदान दिया और नक्शा निर्माण को नई दिशा दी.
अन्य नाम और स्थानीय पहचान
नेपाल में इसे 'सागरमाथा' कहा जाता है, जिसका मतलब है 'आकाश का सिर.' वहीं तिब्बत में इसे 'चोमोलुंगमा' कहा जाता है, जिसका मतलब है टपर्वतों की देवी.' ये नाम इसकी सांस्कृतिक महत्ता को दिखाता हैं.
पहली सफल चढ़ाई
1953 में एडमंड हिलेरी और तेंजिंग नॉर्गे ने पहली बार इस चोटी पर सफल चढ़ाई की थी. ये उपलब्धि पर्वतारोहण इतिहास में मील का पत्थर मानी जाती है और इसके बाद से दुनिया भर के पर्वतारोही यहां पहुंचने लगे.
डेथ जोन और खतरे
8000 मीटर से ऊपर का क्षेत्र 'डेथ जोन' कहलाता है, जहां ऑक्सीजन बहुत कम होती है. यहां शरीर तेजी से कमजोर होने लगता है और लंबे समय तक जीवित रहना कठिन हो जाता है. यही कारण है कि ये चढ़ाई अत्यंत जोखिमभरी मानी जाती है.