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1000 KM से भी ज्यादा रेंज, 29000 KMPH की रफ्तार; भारत के नए ब्रह्मास्‍त्र का नाम सुनते ही चीन-पाक में मची खलबली, अमेरिका भी अलर्ट

India Agni-6 Missile: भारत की रणनीतिक क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने पुष्टि की है कि भारत की अगली पीढ़ी की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) अग्नि-6 का डिज़ाइन पूरी तरह से तैयार है और अब इसे सरकार की मंज़ूरी का इंतज़ार है. DRDO प्रमुख समीर वी. कामत ने हाल ही में कहा कि संगठन अध्ययन और विकास चरण शुरू करने के लिए पूरी तरह से तैयार है, और जैसे ही इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिलेगी, काम आगे बढ़ाया जाएगा.


By: Shristi S | Published: May 25, 2026 4:49:59 PM IST

अग्नि-6 की मारक क्षमता कितनी होगी? - Photo Gallery
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अग्नि-6 की मारक क्षमता कितनी होगी?

अनुमान है कि अग्नि-6 की मारक क्षमता 8,000 से 12,000 किलोमीटर होगी. इसके अलावा, इसके Mach 24 की गति हासिल करने की उम्मीद है, जो 29,000 किलोमीटर प्रति घंटे के बराबर है. यह क्षमता भारत को उन चुनिंदा देशों की लीग में मजबूती से शामिल कर देगी जो वैश्विक मंच पर लंबी दूरी की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने में सक्षम हैं. इस मिसाइल में MIRV तकनीक शामिल होने की संभावना है, जिससे एक ही मिसाइल एक साथ कई अलग-अलग लक्ष्यों पर हमला कर सकेगी. इसके अतिरिक्त, मानक MIRV क्षमताओं से परे, इसमें MaRV तकनीक भी होने की उम्मीद है, जो इसे आधुनिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों को भेदने में अत्यधिक सक्षम बनाएगी.

यूरोप तक पहुंचेगी भारत की मारक क्षमता अग्नि-6 - Photo Gallery
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यूरोप तक पहुंचेगी भारत की मारक क्षमता अग्नि-6

खबरों के मुताबिक, अग्नि-6 के विकास में भारत के मौजूदा अग्नि-5 मिसाइल कार्यक्रम, साथ ही K-5 और K-6 पनडुब्बी-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों से हासिल तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ उठाया जा रहा है. इसके निर्माण में उन्नत एयरफ्रेम, बहु-चरण ठोस प्रणोदक मोटर और परिष्कृत री-एंट्री पैठ सहायता का उपयोग किया जाएगा. विशेषज्ञ इस पहल को भारत की विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोधक क्षमता की नीति और उसकी मजबूत रणनीतिक स्थिति का प्रमाण मानते हैं. एक बार अग्नि-6 के चालू हो जाने पर, पूरा यूरोप जिसमें लंदन, पेरिस और बर्लिन जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं भारत की मारक सीमा के भीतर आ जाएगा. हालांकि यूरोपीय देशों को भारत से कोई सीधा सैन्य खतरा नहीं है, फिर भी इतनी लंबी दूरी की क्षमताओं वाली भारतीय मिसाइलें स्थापित मानदंडों के संबंध में नई चर्चाओं को जन्म दे रही हैं.

भारत के इस पहल से बढ़ेगी चीन की मुश्किलें - Photo Gallery
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भारत के इस पहल से बढ़ेगी चीन की मुश्किलें

यह स्थिति यूरोप के लिए विशेष रूप से संवेदनशील मानी जाती है, क्योंकि एक तरफ तो वह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए भारत के साथ रणनीतिक और रक्षा सहयोग बढ़ा रहा है; वहीं दूसरी तरफ, भारत की बढ़ती मिसाइल क्षमताएं वैश्विक शक्ति संतुलन के संदर्भ में नई वास्तविकताओं को सामने ला रही हैं. फिर भी, यह उम्मीद की जाती है कि यूरोपीय देश सार्वजनिक विरोध जताने के बजाय एक व्यावहारिक और संतुलित रुख अपनाएंगे.

अग्नि-6 पर क्या है सैन्य विशेषज्ञों का मानना? - Photo Gallery
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अग्नि-6 पर क्या है सैन्य विशेषज्ञों का मानना?

भारत पहले से ही मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) का सदस्य है, और उसका परमाणु सिद्धांत पहले इस्तेमाल न करने के सिद्धांत पर आधारित है. यही कारण है कि भारत के मिसाइल कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी देशों में जो चिंता देखी जाती है, वह वैसी आशंका नहीं दर्शाती जैसी आमतौर पर अन्य परमाणु कार्यक्रमों से जुड़ी होती है. इसके अलावा, NATO का मौजूदा मिसाइल रक्षा ढांचा मुख्य रूप से दुष्ट राज्यों से उत्पन्न होने वाले खतरों पर केंद्रित है. सैन्य विशेषज्ञों का मानना ​​है कि अग्नि-6 भारत की पूर्ण-क्षमता वाली निवारक क्षमता को साकार करने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकती है. यह न केवल भारत की रणनीतिक पहुंच को वैश्विक स्तर तक बढ़ाएगी, बल्कि यह एक स्पष्ट संदेश भी देगी कि भारत उभरती हुई बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में एक जिम्मेदार और शक्तिशाली रणनीतिक शक्ति के रूप में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है.

चीन के लिए बढ़ती चुनौतियां और  DF-41 मिसाइल कितनी ताकतवर - Photo Gallery
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चीन के लिए बढ़ती चुनौतियां और DF-41 मिसाइल कितनी ताकतवर

चीन की सबसे उन्नत इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM), DF-41, अपनी अत्यधिक गति और लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता के कारण वैश्विक रणनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है. रिपोर्ट्स के अनुसार, DF-41 अधिकतम Mach 25 (31,000 km/h) की गति से उड़ सकती है, जिससे यह दुनिया की सबसे तेज परमाणु-सक्षम मिसाइलों में से एक बन जाती है. अपनी इस हाइपरसोनिक क्षमता के कारण, यह मिसाइल कई परमाणु वॉरहेड ले जा सकती है और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों को निशाना बना सकती है. इसकी ऑपरेशनल रेंज लगभग 12,000 से 15,000 किलोमीटर होने का अनुमान है, जिससे यह अमेरिका सहित कई महाद्वीपों तक पहुंच सकती है. DF-41 मुख्य भूमि चीन से अमेरिका तक पहुँचने में लगभग 30 मिनट का समय लेती है. रक्षा विश्लेषकों का मानना ​​है कि DF-41 की तैनाती से चीन की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता और मज़बूत होती है और इसका वैश्विक रणनीतिक संतुलन पर काफ़ी असर पड़ सकता है.

पाकिस्तान की शाहीन मिसाइल सीरिज कितनी पीछे? - Photo Gallery
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पाकिस्तान की शाहीन मिसाइल सीरिज कितनी पीछे?

पाकिस्तान के बैलिस्टिक मिसाइल ज़खीरे का हिस्सा, शाहीन मिसाइल सीरीज़ को उसकी रणनीतिक ताकत का एक अहम हिस्सा माना जाता है. पाकिस्तान के नेशनल इंजीनियरिंग एंड साइंटिफिक कमीशन (NESCOM) द्वारा विकसित इस सीरीज में कई वैरिएंट शामिल हैं, जिनमें से हर एक की मारक क्षमता और गति अलग-अलग है. शाहीन-I (Hatf-IV) एक कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता 790 से 900 किलोमीटर बताई जाती है. इसके विपरीत, शाहीन-II (Hatf-VI) एक मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है, जो 1,500 से 2,000 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है. इस सीरीज़ की सबसे उन्नत मिसाइल शाहीन-III है, जिसकी ऑपरेशनल रेंज लगभग 2,750 किलोमीटर है. बताया जाता है कि यह मिसाइल Mach 18 तक की गति हासिल करने में सक्षम है. इस तरह, जब अग्नि सीरीज से तुलना की जाती है, तो पाकिस्तान की शाहीन मिसाइलें काफ़ी पीछे रह जाती हैं.