कार का Ground Clearance क्या है? असल में कितना होता है जरूरी, जानें क्या है मापने का सही पैमाना
Ground Clearance: जब भी कोई नई कार खरीदने का प्लान बनाता है, तो इंजन से लेकर माइलेज और फीचर्स तक तो सभी बातों का ध्यान रखता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में कार की ग्राउंड क्लीयरेंस का कोई हिसाब नहीं रखता है. खासकर गांवों की कच्ची सड़कों से लेकर शहर में अलग-अलग तरह के रास्ते देखने को मिलते हैं, ऐसे में अगर का रको पर्याप्त ऊंचाई नहीं मिले तो वह रास्तोे को पार करने में सक्षम नहीं रहती है.
क्या होती है Ground Clearance
Ground Clearance असल में कार के नीचे मौजूद सबसे निचले हिस्से और जमीन के बीच की दूरी होती है. जमीन और कार की निचले हिस्से के गैप को ही ग्राउंड क्लीयरेंस कहा जाता है. अगर किसी कार की Ground Clearance 180 mm बताई गई है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि कार के हर हिस्से और जमीन के बीच ठीक 180 mm की दूरी होगी.
Ground Clearance क्यों है जरूरी?
ग्राउंड क्लीयरेंस को इसलिए जरूरी माना जाता है क्योंकि हर सड़क एक जैसी नहीं होती है. किसी शहर में आपको अच्छी तरह बनी हुई सड़क मिल सकती है, लेकिन कुछ किलोमीटर आगे ही बड़े स्पीड ब्रेकर या खराब सड़क सामने आ सकती है. अगर ग्राउंड क्लीयरेंस ज्यादा कम है तो ऐसे में कार इन रास्तों से टकरा सकती है. इसलिए ग्राउंड क्लीयरेंस का होना जरूरी होता है.
कितनी होनी चाहिए Ground Clearance?
ग्राउंड क्लीयरेंस कितनी होनी चाहिए इसका कोई सटीक जवाब तो नहीं है. आमतौर पर भारत में 170-180 mm या उससे ज्यादा की Ground Clearance वाली कारें अच्छी मानी जाती हैं. इसलिए कार लेते समय आपको ग्राउंड क्लीयरेंस का ध्यान जरूर रखना चाहिए.
Ground Clearance मापने का सही पैमाना क्या है?
Ground Clearance को आमतौर पर कार के नीचे के सबसे निचले हिस्से और समतल जमीन के बीच की दूरी के रूप में मापा जाता है. अगर कार समतल जगह पर खड़ी है तो ऐसे में उसका नीचे का हिस्सा देखा जाएगा, जिससे यह अंदाजा लगाया जाएगा कि कार की ग्राउंड क्लीयरेंस कितनी है.
कम ग्राउंड क्लीयरेंस के नुकसान
अगर किसी कार में ग्राउंड क्लीयरेंस काफी कम है तो ऐसे में कार जमीन से या फिर किसी ब्रेकर आदि से टकरा सकती है. आमतौर पर सेडान कारों की ग्राउंड क्लीयरेंस काफी कम होती है. वहीं, एसयूवी की ग्राउंड क्लीयरेंस अन्य कारों के मुकाबले ज्यादा होती है.