किराए के घर में टूट-फूट का पैसा कौन देगा? 90% किराएदार और मकान मालिक नहीं जानते ये नियम
House Rent Rules: किराए के घर में रहने वाले लोगों के सामने सबसे आम सवालों में से एक यह होता है कि अगर घर का नल टपकने लगे, पाइप फट जाए या बाथरूम की फिटिंग खराब हो जाए, तो उसकी मरम्मत का खर्च कौन उठाएगा, किराएदार या मकान मालिक? कई बार इसी छोटी-सी बात पर दोनों के बीच विवाद कि स्थिती बन जाती है. हालांकि, इसका जवाब हर मामले में एक जैसा नहीं होता. ऐसे में चलिए विस्तार से समझें पूरी जानकारी.
सबसे पहले देखें रेंट एग्रीमेंट में क्या लिखा है?
किराए के घर से जुड़े किसी भी विवाद का पहला आधार रेंट एग्रीमेंट होता है. अगर उसमें साफ लिखा है कि किस तरह की मरम्मत का खर्च कौन उठाएगा, तो उसी के अनुसार फैसला किया जाता है. इसलिए एग्रीमेंट बनवाते समय मरम्मत से जुड़े नियम स्पष्ट रूप से शामिल करना बेहद जरूरी है.
सामान्य घिसावट से खराब हुआ नल या पाइप
अगर नल, शॉवर, पाइपलाइन या बाथरूम की फिटिंग समय के साथ पुरानी होकर खराब होती है, तो इसे सामान्य रखरखाव माना जाता है. ऐसे मामलों में मरम्मत की जिम्मेदारी आमतौर पर मकान मालिक की होती है, क्योंकि घर को रहने योग्य बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है.
किराएदार की लापरवाही से हुआ नुकसान
अगर नल किसी भारी चीज से टूट जाए, पाइप गलत इस्तेमाल की वजह से फट जाए या फिटिंग को नुकसान किराएदार की लापरवाही से पहुंचे, तो उसकी मरम्मत का खर्च किराएदार को उठाना पड़ सकता है. ऐसे मामलों में नुकसान की वजह सबसे अहम होती है.
छोटी मरम्मत कौन करवाएगा?
नल बदलना, वॉशर बदलना, शॉवर की सफाई करना या हल्की लीकेज ठीक करवाना जैसी छोटी-मोटी मरम्मत कई बार किराएदार खुद भी करवा लेते हैं. हालांकि, यदि रेंट एग्रीमेंट में अलग व्यवस्था हो, तो उसी का पालन किया जाएगा.
बड़ी मरम्मत की जिम्मेदारी किसकी?
अगर घर की मुख्य पाइपलाइन खराब हो जाए, दीवार के अंदर लीकेज हो, छत टपकने लगे, बिजली की वायरिंग में समस्या आ जाए या मकान के ढांचे से जुड़ी कोई दिक्कत हो, तो ऐसी बड़ी मरम्मत की जिम्मेदारी सामान्य तौर पर मकान मालिक की होती है. इसके लिए किराएदार को तुरंत मकान मालिक को इसकी जानकारी देनी चाहिए. अगर यह जानकारी लिखित तौर पर हो, तो और भी अच्छा होता है.
अगर मकान मालिक मरम्मत नहीं कराए तो?
जरूरी मरम्मत लंबे समय तक न होने पर और उससे रहने में परेशानी होने पर किराएदार कानूनी विकल्प अपना सकता है. हालांकि, ऐसा कोई भी कदम उठाने से पहले रेंट एग्रीमेंट की शर्तों को ध्यान से पढ़ना और जरूरत पड़ने पर कानूनी सलाह लेना बेहतर रहता है.
मॉडल टेनेंसी एक्ट 2021 क्या कहता है?
मॉडल टेनेंसी एक्ट 2021 में मकान मालिक और किराएदार दोनों की जिम्मेदारियों का सामान्या ढांचा बताया गया है. हालांकि, यह हर राज्य में लागू नहीं है. इसलिए स्थानीय कानूनों और रेंट एग्रीमेंट की शर्तों को प्राथमिकता दी जाती है. किराया एग्रीमेंट बनवाते समय ही साफ लिखवा दें कि कौन सी मरम्मत मकान मालिक कराएगा और किन मामलों का खर्च किराएदार उठाएगा.