Eid-e-Milad-un-Nabi: दुश्मनों को भी दे देते थे मुंह का निवाला! पैगंबर मोहम्मद साहब की वो आदतें, जो हर मुसलमान को अपनानी चाहिएं
Prophet Muhammad Good Habbits: एक अच्छी और प्रोडक्टिव ज़िंदगी जीने का क्या मतलब है? हर कोई जानना चाहता है कि अच्छी आदतें कैसे अपनाई जाएं, और हर जगह इसके अलग-अलग जवाब मिलते हैं. असल में अच्छी आदतें, प्रोडक्टिविटी और सच्ची खुशी अनुशासन और एक स्वस्थ आध्यात्मिकता से आती हैं. अनुशासन और अच्छी आदतें अपनाने की कोशिश करते समय हमारे सामने कई तरह के रोल मॉडल हो सकते हैं और इसीलिए, हमें बहुत सोच-समझकर चुनना चाहिए कि हम किसे अपना आदर्श बनाएं. लेकिन आज हम जिस रोल मॉडल की बात करने जा रहे हैं वो हैं पैगंबर मोहम्म्द साहब. ये एक ऐसे शख्स थे जिन्हें मुसलमान सबसे ज्यादा अहमियत देते हैं. वहीं आज यानी ईद-ए-मिलाद-उन-नबी (Eid-e-Milad-un-Nabi) के मौके पर हम उन आदतों को जानेंगे जिन्हें हमें जरूर अपनाना चाहिए.
हमेशा अच्छा बोलें
पैगंबर साहब की बोली बहुत ही मीठी थी. वो शब्दों की बनाने और बिगाड़ने की ताकत को किसी और से बेहतर समझते थे. अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में, वे हमेशा सोच-समझकर शब्द बोलते थे.
जल्दी राय न बनाएं और न ही चुगली करें
धरती पर हर मर्द और औरत ने गुनाह किए हैं. कोई भी इंसान मुकम्मल नहीं है और कोई भी दूसरों की राय या फ़ैसले से बचा हुआ नहीं है. इसलिए, हमें अपनी राय अपने तक ही रखनी चाहिए. जब हम ग्रुप में हों, तो हमें दूसरों को नीचा दिखाने और उनकी चुगली करने से बचना चाहिए.
गुस्से पर काबू पाएं
और जब हम इसे काबू नहीं कर पाते, तो यह हमें काबू करने लगता है. गुस्से में हम बेतुके काम करते हैं, ऐसे काम जो हम आम तौर पर नहीं करते. जब हम गुस्से में आ जाते हैं, तो हम रिश्तों को नुकसान पहुँचाते हैं और शांति भंग करते हैं. पैगंबर (PBUH) हमें शांति और सम्मान बनाए रखने के लिए गुस्से पर काबू रखने की सीख देते हैं.
दूसरों के लिए समय निकालें
चाहे हमारा शेड्यूल कितना भी व्यस्त क्यों न हो, हम अपनी ज़िंदगी के अहम लोगों के लिए समय निकालना नहीं भूल सकते. हमें अपने चाहने वालों के लिए समय निकालने की आदत डालनी चाहिए. एक आध्यात्मिक और राजनीतिक नेता होने के बावजूद, यह बात मशहूर है कि पैगंबर (PBUH) हमेशा अपने दोस्तों और चाहने वालों के लिए समय निकालते थे.
रोज़ा रखने के फायदे
हाल ही में सेहत, वज़न और एनर्जी को कंट्रोल करने के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग एक लोकप्रिय तरीका बन गया है. समय-समय पर उपवास करने से ब्लड प्रेशर, आराम की स्थिति में हार्ट रेट और वज़न घटाने में मदद मिलती है, साथ ही मसल्स भी बनी रहती हैं. इससे बहुत पहले कि साइंस यह साबित करता कि इंटरमिटेंट फास्टिंग सेहत के लिए बहुत अच्छी है, पैगंबर मोहम्मद इसका पालन करते थे. पैगंबर (PBUH) हर सोमवार और गुरुवार को उपवास रखते थे. इसके अलावा, वह हर महीने की 13, 14 और 15 तारीख को भी उपवास रखते थे.
कम खाएं
पैगंबर (PBUH) ने लंबी उम्र, बेहतर सेहत और बीमारियों से बचाव के लिए कम खाने की आदत पर ज़ोर दिया. साइंस ने अब यह साबित कर दिया है कि कैलोरी का सेवन कम करने से उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है और कैंसर, डायबिटीज़ और अल्जाइमर जैसी बीमारियों से बचाव होता है.