क्या है चीन का ‘बीस्ट मोड’ फाइटर जेट J-16? जिसने बढ़ा दी दुनिया की टेंशन, खूबियां जान उड़ जाएंगे होश
China J-16 Fighter Jet: चीन का शेनयांग J-16 फाइटर जेट की हाल ही में तस्वीरें सामने आई है. इस फाइटर जेट के साथ एक बड़ी संख्या में एयर-टू-एयर मिसाइलों से लैस नजर आया. इसे बीस्ट मोड कहा जा रहा है. तस्वीरों ने रक्षा विशेषज्ञों के बीच बहस छेड़ दी है कि क्या चीन अब लंबी दूरी तक हवाई दबदबा बनाने की नई क्षमता हासिल कर चुका है.
आखिर क्या है बीस्ट मोड J-16?
तस्वीरों में J-16 पर 8 PL-15 लंबी दूरी की BVR मिसाइलें और 2 PL-10 डॉगफाइट मिसाइलें लगी दिखाई दीं. इस कॉन्फिगरेशन में यह विमान एक तरह के मिसाइल ट्रक की तरह काम करता है, जो एक साथ 10-12 एयर-टू-एयर मिलाइलें लेकर उड़ान भर सकता है.
J-16 क्यों है चीन का सबसे खतरनाक 4.5 जेनरेशन फाइटर?
J-16 दो इंजन वाला 4.5 पीढ़ी का मल्टीरोल स्ट्राइक फाइटर है. इसमें AESA रडार, स्वदेशी WS-10B इंजन, कम रडार सिग्नेचर वाली कोटिंग और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम लगे हैं. यह हवा, जमीन और समु्द्र तीनों मोर्चों पर हमला करने में सक्षम माना जाता है.
500 से ज्यादा J-20! चीन कितनी तेजी से बढ़ा रहा है ताकत?
रक्षा विश्लेषकों के मुताबिक चीन के पास अब करीब 500 J-20 स्टील्थ फाइटर हो सकते हैं. कई रिपोर्ट्स का दावा है कि 2030 तक यह संख्या 800 और 2035 तक 1,500 तक पहुंच सकती है. इसी दौर में भारत का स्वदेशी AMCA भी सेवा में आने की उम्मीद है.
J-20 की ताकत क्या है?
चेंगदू J-20 'माइटी ड्रैगन' चीन का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर है. इसमें स्टील्थ डिजाइन, आधुनिक सेंसर, AESA रडार और लंबी दूरी की मिसाइलें हैं. यह दुश्मन की नजर से बचते हुए हवाई बढ़त हासिल करने और सटीक हमला करने के लिए तैयार किया गया है.
J-20S और J-35 से बढ़ेगी चीन की बढ़त?
चीन अब दो सीटों वाले J-20S और नए J-35 स्टील्थ फाइटर का भी तेजी से उत्पादन कर रहा है. J-20S इंसान और ड्रोन के साथ संयुक्त मिशन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और कमांड एंड कंट्रोल ऑपरेशन के लिए बनाया गया है. वहीं पाकिस्तान, J-35 खरीदने वाला पहला विदेशी देश बन सकता है.
सिर्फ फाइटर जेट नहीं, टेक्नोलॉजी में भी चीन की छलांग
ऑस्ट्रेलियन स्ट्रैटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन दुनिया की 74 महत्वपूर्ण तकनीकों में से 66 क्षेत्रों में बढ़त बनाए हुए है. रक्षा, अंतरिक्ष, AI, रोबोटिक्स और ऊर्जा जैसे रणनीतिक सेक्टरों में उसकी प्रगति ने अमेरिका समेत कई देशों की चिंता बढ़ा दी है.