Kundali me Vivah Ke Yog: विवाह में देरी के पीछे कौन से ग्रह हैं जिम्मेदार? कुंडली के इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
Kundali me Vivah Ke Yog: वैदिक ज्योतिष में किसी व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों की स्थिति और उनसे बनने वाले कॉम्बिनेशन के आधार पर शादी के बारे में भविष्यवाणी की जाती है. किसी व्यक्ति की कुंडली का अध्ययन करके एक ज्योतिषी यह तय करता है कि कुंडली शादी के लिए अनुकूल है या नहीं और क्या शादी जल्द ही होगी. कभी-कभी लड़के और लड़कियों में सभी गुण होता है. फिर भी उनकी शादी में कई तरह की रुकावटें आती है. आज हम शादी में देरी या न होने के कारणों का ज्योतिषीय विश्लेषण करेंगे. वैदिक ज्योतिष के अनुसार, शनि, राहु, केतु जैसे ग्रह और कुछ अशुभ ग्रह शादी में देरी के लिए ज़िम्मेदार होते है. हालांकि कुंडली में कुछ ऐसे कॉम्बिनेशन भी बनते हैं जो किसी व्यक्ति की शादी में देरी और रुकावटें पैदा कर सकते है. आइए शादी में देरी के मुख्य कारणों को जानें…
कुंडली में शादी का भाव (House of marriage in the horoscope)
वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुंडली में 12 भाव होते हैं, जिनमें से सातवां भाव शादी के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. कुंडली का सातवां भाव आपके पार्टनर को दिखाता है. कुंडली का सातवां भाव पहले भाव के विपरीत होता है.
पहला घर खुद को दिखाता... (The first house shows itself...)
पहला घर खुद को दिखाता है, और उसके सामने वाला सातवां घर पार्टनर को दिखाता है. इसका मतलब है कि पहला और सातवां घर एक दूसरे को पूरा करता है. इसलिए जिनके सातवें घर पर बुरे ग्रहों की नजर होती है, उनकी शादी में देरी होती है.
शादी के लिए ज़िम्मेदार ग्रह (Planets responsible for marriage)
वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुछ बुरे ग्रह शादी में देरी के लिए ज़िम्मेदार होते है. कुंडली में राहु, शनि, केतु और आठवें भाव का स्वामी शादी में देरी की संभावना बनाते है.
ग्रह शादी का संकेट (Planetary Signs of Marriage)
जब ये ग्रह कुंडली में शादी से जुड़े ग्रहों, या घरों और उनके स्वामियों पर असर डालते हैं, तो यह शादी में देरी का संकेत देता है.
कुंडली में शनि का ध्यान (Meditation of Saturn in the horoscope)
वैदिक ज्योतिष में शनि को देरी का ग्रह माना जाता है. शनि सभी ग्रहों में सबसे धीमी गति से चलने वाला ग्रह है. इसलिए कुंडली में शादी का एनालिसिस करते समय, कुंडली में शनि की स्थिति पर जरूर ध्यान दिया जाता है.
कब शादी होता देरी? (When would marriage be delayed?)
जब कुंडली में शनि सातवें भाव या सातवें भाव के स्वामी पर असर डालता है, तो यह शादी में देरी का संकेत देता है. वैदिक ज्योतिष के अनुसार सिंह या कर्क लग्न वाले लोगों की शादी में देरी होने की संभावना ज़्यादा होती है.
कौन होता शादी का जिम्मेदार? (
राहु और केतु भी शादी में देरी के लिए ज़िम्मेदार होता है. जब राहु या केतु लग्न से सातवें घर में होता हैं, तो व्यक्ति की शादी में देरी होती है. कुंडली में राहु-केतु दोष शादी में देरी का कारण बनता है. इसके अलावा कुंडली में मंगल दोष व्यक्ति की शादी में रुकावटें पैदा करता है.
ज्योतिष में क्या कहता है? (What does astrology say?)
ज्योतिष में शुक्र को एक शुभ ग्रह माना जाता है और यह शादी का कारक है. पुरुष की कुंडली में शुक्र पत्नी को दिखाता है. इसलिए अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शुक्र कमज़ोर या पीड़ित है, तो यह शादी में देरी का कारण बनता है. इसके अलावा जिनकी शादी में देरी हो रही है, उन्हें अपने आठवें घर का एनालिसिस करवाना चाहिए.