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Sawan 2026: बैंगन से लेकर प्याज-लहसुन तक, सावन में आपकी थाली से क्यों गायब हो जाती हैं ये 9 चीजें? जानिए इसके पीछे का राज!

Foods Avoided In Sawan: मानसून की पहली फुहार के साथ ही भारत में सिर्फ मौसम ही नहीं बदलता, बल्कि देश भर के घरों की रसोई में भी एक हेल्दी और सात्विक बदलाव आ जाता है. सावन (श्रावण) के पवित्र महीने में प्लेट्स ज्यादा सादी हो जाती हैं, मसालों का इस्तेमाल कम हो जाता है, और कई ऐसी चीजें जो सालभर खाई जाती हैं, वे अचानक मेन्यू से गायब हो जाती हैं. सावन के महीने में पीढ़ियों से खान-पान के विशेष नियमों का पालन होता आया है. भगवान शिव की भक्ति से जुड़ी ये परंपराएं सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और व्यावहारिक रूप से भी बेहद जरूरी हैं. मानसूनी मौसम में ह्यूमिडिटी (नमी) बढ़ जाती है, आयुर्वेद के अनुसार पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, और बैक्ट्रिया व कीड़े-मकोड़े पनपने का खतरा बढ़ जाता है. आइए जानते हैं सावन के महीने में किन 10 चीजों से परहेज किया जाता है और इसके पीछे क्या वजह है-


By: Kajal Jain | Published: July 31, 2026 2:05:32 PM IST

हरी पत्तेदार सब्जियां - Photo Gallery
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1. हरी पत्तेदार सब्जियां

पालक, मेथी, सरसों और चौलाई जैसी हरी सब्जियां सावन में सबसे पहले रसोई से बाहर होती हैं. बारिश के मौसम में इन सब्जियों में कीड़े, घोंघे और लार्वा पनपने का खतरा बहुत ज्यादा होता है, जो पत्तियों के अंदर छिपे रहते हैं. आयुर्वेद के अनुसार भी मानसून में पेट की गर्मी कमजोर होती है, इसलिए ऐसी चीजें खाने से मना किया जाता है जिन्हें साफ करना या पचाना मुश्किल हो.

प्याज और लहसुन - Photo Gallery
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2. प्याज और लहसुन

सावन में प्याज और लहसुन का न होना सबसे बड़ा बदलाव है. इन्हें साफ-सुथरे न होने के कारण नहीं, बल्कि आध्यात्मिक कारणों से छोड़ा जाता है. आयुर्वेद में इन्हें 'राजसिक' और 'तामसिक' माना गया है, जो मन को उत्तेजित करते हैं. सावन में मानसिक शांति, संयम और भक्ति बनाए रखने के लिए सात्विक भोजन यानी बिना प्याज-लहसुन का खाना खाया जाता है.

मांस - Photo Gallery
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3. मांस

सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है, इसलिए इस दौरान मांस का त्याग करना अहिंसा, संयम और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है. इसके अलावा, मानसून की उमस भरे मौसम में बैक्टीरिया बहुत तेजी से फैलते हैं, जिससे मांस के खराब होने और फूड पॉइजनिंग का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.

अंडे - Photo Gallery
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4. अंडे

सावन के व्रत और उपवास के दौरान अंडों को गैर-शाकाहारी माना जाता है. इस महीने में हल्का, सादगी भरा और आध्यात्मिक रूप से शुद्ध भोजन खाने पर जोर दिया जाता है. अंडों की जगह लोग दूध, दही, पनीर, मेवे और सिंघाड़े के आटे जैसी चीजों का सेवन करते हैं.

शराब - Photo Gallery
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5. शराब

सावन को शारीरिक और मानसिक शुद्धि का महीना माना जाता है. भक्तों का मानना है कि नशीली चीजें ध्यान, प्रार्थना और अनुशासन से भटकाती हैं. सेहत के लिहाजसे भी शराब शरीर में डिहाइड्रेशन और पाचन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकती है, इसलिए इस दौरान शराब से पूरी तरह दूरी बनाई जाती है

तली-भुनी चीजें - Photo Gallery
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6. तली-भुनी चीजें

बारिश के मौसम में गर्मागर्म पकौड़े भले ही बहुत अच्छे लगते हों, लेकिन सावन में लोग तली-भुनी चीजों से परहेज करते हैं. आयुर्वेद के अनुसार इस मौसम में पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, जिससे भारी और ऑयली खाना पचाना मुश्किल हो जाता है और पेट में भारीपन या सूजन महसूस हो सकती है.

खमीर वाली चीजें या फर्मेंटेड फूड्स - Photo Gallery
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7. खमीर वाली चीजें या फर्मेंटेड फूड्स

सावन में कुछ घरों में अचार, खमीर उठे हुए बैटर और फर्मेंटेड चीजों से परहेज किया जाता है. गर्म और उमस भरे मौसम में फर्मेंटेशन की प्रक्रिया बहुत तेज हो जाती है, जिससे खाना जल्दी खराब होने का खतरा रहता है. यही वजह है कि इस महीने में हमेशा ताजा पक्का हुआ भोजन खाने पर जोर दिया जाता है.

बैंगन - Photo Gallery
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8. बैंगन

बारिश के मौसम में बैंगन की एक अलग ही कहानी है. सावन में लोग बैंगन से बचते हैं क्योंकि इस दौरान इसमें कीड़े लगने की संभावना सबसे ज्यादा होती है. कई बार ये कीड़े इतने छोटे होते हैं कि बाहर से दिखाई नहीं देते. बुजुर्गों के समय से चली आ रही यह परंपरा आज भी कई घरों में निभाई जाती है.

मशरूम - Photo Gallery
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9. मशरूम

मशरूम नेचुरली मानसून में ही उगते हैं, और यही कारण है कि सावन में इन्हें नहीं खाया जाता. पुराने समय में लोग जंगलों से जंगली मशरूम तोड़ते थे, जिसमें जहरीली और खाने योग्य किस्मों की पहचान करना मुश्किल होता था. हालांकि आज बाजार में कल्टीवेटेड मशरूम मिलते हैं, फिर भी सावन की पारंपरिक और सात्विक भोजन की थाली में इन्हें शामिल नहीं किया जाता.