Happy Ending से कोसों दूर हैं ये 8 ब्लॉकबस्टर फिल्में: रुला देने वाले क्लाइमैक्स के बाद भी दर्शकों के सिर चढ़कर बोलता है इनका जादू!
8 Heart Breaking Bollywood Movies: बॉलीवुड में हमेशा से यह उम्मीद की जाती रही है कि लव स्टोरी का अंत हैप्पी एंडिंग के साथ हो, हीरो की जान बच जाए और हर गम का कोई न कोई खूबसूरत समाधान निकल आए. लेकिन कुछ डायरेक्टर्स ने लीक से हटकर ऐसे रास्ते चुने जहां किरदारों को हार, जुदाई, मौत या बिना किसी क्लोजर के जिंदगी बिताना पड़ी. देवदास से लेकर रॉकस्टार, लुटेरा और मसान तक, ऐसी कई बेहतरीन फिल्में हैं जिन्होंने कन्वेंशनल हैप्पी एंडिंग के बजाय दर्द और अधूरेपन को चुना, लेकिन फिर भी वे हमारे दिलों में हमेशा के लिए बस गईं. चाहे वह दबे हुए अरमान हों, एडिक्शन हो या फिर समाज की मजबूरियां, ये फिल्में साबित करती हैं कि एक अधूरा या सैड एंडिंग भी कहानी को और ज्यादा ताकतवर और यादगार बना सकता है. जब भी हम अपनी भावनाओं से जुड़ना चाहते हैं या कुछ गहराई से महसूस करना चाहते हैं, तो घूम-फिरकर इन्हीं फिल्मों के पास चले आते हैं. आइए जानते हैं ऐसी ही 8 शानदार बॉलीवुड फिल्मों के बारे में, जिनकी दर्द भरी कहानियों ने दर्शकों को रुला दिया लेकिन लोग इन्हें आज भी बार-बार देखना पसंद करते हैं.
8. कल हो ना हो
बाकी फिल्मों से अलग, कल हो ना हो एक ऐसी फिल्म है जो अंत में थोड़ी उम्मीद तो देती है, लेकिन उसके लिए उस इंसान को छीन लेती है जिसे दर्शक सबसे ज्यादा प्यार करते थे. शाहरुख खान का किरदार 'अमन' खुद अपने प्यार का बलिदान देकर नैना और रोहित को मिला देता है. यह फिल्म आज भी सबसे बड़े टियरजर्कर के रूप में जानी जाती है, क्योंकि यह सिखाती है कि प्यार सिर्फ पाना नहीं, बल्कि किसी को खुश देखने के लिए जाने देना भी है.
7. दिल से..
मणि रत्नम की यह फिल्म रोमांस को राजनीति और आतंकवाद के खतरनाक मैदान में ले जाती है. शाहरुख खान का किरदार 'अमर' मनीषा कोइराला की 'मेघना' से प्यार कर बैठता है, जिसकी जिंदगी दर्द और आतंकवाद के साए में गुजरी है. यह फिल्म किसी भी पारंपरिक फिल्मी सेफ एंडिंग को चुनने से इनकार करती है और दोनों किरदारों का अंत एक साथ दर्दनाक मोड़ पर होता है.
6. रांझना
धनुष का किरदार 'कुंदन' सालों तक सोनका कपूर की 'जोया' के पीछे पागल रहता है, भले ही जोया उसे बार-बार इनकार करती है. कहानी अंत में ऐसे मोड़ पर पहुंचती है जहां कुंदन को अपनी दीवानगी की भारी कीमत चुकानी पड़ती है. यह फिल्म एक तरफ के जुनून से भरे प्यार को बेहद सीरियल और इमोशनल अंदाज में बड़े पर्दे पर पेश करती है.
5. मसान
नीरज घायवान की यह फिल्म किसी आसान जवाब या फिल्मी ड्रामे में यकीन नहीं रखती. इसके किरदार मौत, सामाजिक दबाव और गहरे दिल टूटने के दौर से गुजरते हैं, लेकिन फिल्म अंत में आगे बढ़ने और जिंदगी की खूबसूरती को तलाशने का संदेश देती है. यही खट्टी-मीठी और सच्ची भावना मसान को बार-रे-बार देखने लायक बनाती है क्योंकि इसका दर्द जीवन की सच्चाई से जुड़ा है.
4. आशिकी 2
राहुल और आरोही की प्रेम कहानी म्यूजिक, एम्बिशन और बेइंतहा प्यार पर टिकी थी. लेकिन राहुल की शराब की लत और डिप्रेशन उसके प्यार पर भारी पड़ जाता है. इस फिल्म का ट्रैजिक अंत इसके इमोशनल कोर को और ज्यादा मजबूत बनाता है. इसने साबित कर दिया कि दर्शक ऐसी प्रेम कहानियों को भी दिल से अपनाते हैं जिनका अंत खुशियों से नहीं होता.
3. लुटेरा
विक्रमादित्य मोटवाने की यह फिल्म धीरे-धीरे एक पीरियड रोमांस से बदलकर अपराध, गिल्ट और रिडम्पशन की कहानी बन जाती है. रणवीर सिंह का किरदार 'वरुण' सोनाक्षी सिन्हा की 'पाखी' को धोखा देने के बाद वापस लौटता है, लेकिन तब तक पाखी गंभीर रूप से बीमार हो चुकी होती है. इसका क्लाइमैक्स दर्द से भरा है जो अपने पीछे गहरा दुख और थोड़ी सी उम्मीद दोनों छोड़ जाता है.
2. रॉकस्टार
इम्तियाज अली की इस फिल्म में रणबीर कपूर का किरदार 'जॉर्डन' फेम और शोहरत तो पा लेता है, लेकिन उस शख्सियत को खो देता है जो उसकी दुनिया का सेंटर थी. डायरेक्टर ने जानबूझकर इस कहानी को कोई रोमांटिक और सुखी अंजाम नहीं दिया. हीर की मौत का यह प्लॉट पारंपरिक हैप्पी एंडिंग के बजाय एक इमोशनल और सच्चाई पर खत्म होता है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता.
1. देवदास
संजय लीला भंसाली की यह फिल्म हिंदी सिनेमा की सबसे आइकॉनिक ट्रैजिक लव स्टोरीज में से एक है. इसमें शाहरुख खान ने खुद को तबाह करने वाले देवदास का किरदार निभाया है, जो अपने घमंड और हालातों की वजह से पारो (ऐश्वर्या राय बच्चन) से जुदा हो जाता है. फिल्म का अंत बेहद दर्दनाक है जहां देवदास की मौत पारो के घर के दरवाजे पर होती है, और मात्र कुछ ही कदमों की दूरी कभी कम नहीं हो पाती और एंडिंग दर्शकों को अंदर तक झकझोर कर रख देती है.