कन्नप्पा से लेकर श्रीराम तक, जानिए भगवान शिव के 8 सबसे महान भक्त, जिनकी भक्ति से प्रसन्न हुए महादेव
Lord Shiva Devotees: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र समय माना जाता है. इस पूरे महीने शिवभक्त जलाभिषेक, व्रत और पूजा-अर्चना कर भोलेनाथ की कृपा पाने का प्रयास करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पौराणिक कथाओं में ऐसे कई भक्तों का उल्लेख मिलता है, जिन्होंने अपनी अटूट श्रद्धा और समर्पण से भगवान शिव को प्रसन्न कर दिव्य वरदान प्राप्त किए थे? आइए जानते हैं ऐसे ही 8 महान शिव भक्तों की प्रेरणादायक कहानियां.
कन्नप्पा – जिन्होंने शिवलिंग के लिए अपनी आंखें अर्पित कर दीं
दक्षिण भारत के शिकारी कुल में जन्मे कन्नप्पा को भगवान शिव का सबसे महान भक्त माना जाता है. कथा के अनुसार जब उन्होंने शिवलिंग की आंख से रक्त बहते देखा तो बिना किसी संकोच के अपनी आंख निकालकर शिवलिंग पर अर्पित कर दी. दूसरी आंख भी अर्पित करने को तैयार हो गए, तभी भगवान शिव प्रकट हुए और उन्हें दृष्टि वापस देकर अपने परम भक्त का सम्मान दिया.
रावण – शिव तांडव स्तोत्र के रचयिता
लंका के राजा रावण को भगवान शिव का परम भक्त माना जाता है. उसने कठोर तपस्या कर अपने सिर महादेव को अर्पित किए और शिव तांडव स्तोत्र की रचना की. उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे चंद्रहास तलवार और कई दिव्य शक्तियों का वरदान दिया.
ऋषि मार्कंडेय – जिनकी भक्ति ने मृत्यु को भी रोक दिया
ऋषि मार्कंडेय की आयु केवल 16 वर्ष तय थी, लेकिन उनकी भक्ति ने काल को भी पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था. जब यमराज उनके प्राण लेने आए, तो बालक मार्कंडेय शिवलिंग से लिपट गए थे और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने लगे थे. स्वयं महादेव ने प्रकट होकर यमराज से मार्कंडेय के प्राणों की रक्षा की और उन्हें अमरता तथा चिरंजीवी होने का वरदान दिया था.
बाणासुर – सहस्त्र भुजाओं से की शिव आराधना
दैत्यराज बलि के पुत्र बाणासुर भगवान शिव के अनन्य भक्त थे. उन्होंने अपनी हजार भुजाओं से भगवान शिव के तांडव के दौरान अनेक वाद्ययंत्र बजाकर उनकी आराधना की. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव ने उनके नगर की रक्षा का वचन दिया.
नंदी – शिव के वाहन ही नहीं, सबसे प्रिय गण
ऋषि शिलाद के पुत्र नंदी ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया. महादेव ने उन्हें अजर-अमर होने का वरदान दिया और अपना वाहन, मुख्य द्वारपाल तथा गणों का अधिपति बनाया. आज भी हर शिव मंदिर में नंदी की विशेष पूजा होती है.
भगवान श्रीराम – जिन्होंने स्थापित किया रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग
लंका विजय से पहले भगवान श्रीराम ने समुद्र तट पर बालू से शिवलिंग बनाकर पूजा की थी. यही स्थान आज रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रसिद्ध है. शिव और श्रीराम एक-दूसरे को अपना आराध्य मानते हैं.
कुबेर – शिव कृपा से बने धन के देवता
पूर्व जन्म में गुणनिधि नामक व्यक्ति रहे कुबेर ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें समस्त धन-संपदा का स्वामी, दिक्पाल और अपना परम मित्र बनाया.
उपमन्यु – बालभक्ति से मिले क्षीरसागर के स्वामी
बालक उपमन्यु को दूध की इच्छा थी, लेकिन गरीबी के कारण उनकी माता उन्हें दूध नहीं दे सकीं. तब उन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या की. उनकी सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें क्षीरसागर का वरदान दिया और उनकी सभी इच्छाएं पूरी कीं.