इंसानों की 9 महीने की टेंशन से बिल्कुल अलग… ‘जब मर्जी हो’ तब बच्चे को दुनिया में लाते हैं 8 जानवर, हफ्तों या महीनों तक रोक सकते हैं प्रेग्नेंसी!
महिलाओं की प्रेग्नेंसी के 9 महीने का सफर तो हम सब जानते हैं, जहां प्रसव की तारीख लगभग तय होती है और 9 महीने बाद, बच्चा दुनिया में आ जाता है. यह सब इतना आसान नहीं होता, महिलाओं को असहनीय प्रसव पीड़ा होती है. लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि अगर मां के पास यह ताकत हो कि वह जब चाहे अपनी प्रेग्नेंसी को कुछ महीनों या हफ्तों के लिए ‘पॉज’ यानी रोक सके, तो कितना अच्छा और सुविधाजनक होता. आपको यह बात सुनने में किसी साइंस फिक्शन फिल्म जैसी लग सकती है लेकिन कुदरत का करिश्मा देखिए इंसान ऐसा नहीं कर सकते लेकिन कुछ जीव-जंतु ऐसा कर सकते हैं, वो चाहें तो अपनी प्रेग्नेंसी को कुछ हफ्ते या कुछ महीने आगे बढ़ा सकते हैं. इस प्रोसेस को एम्ब्रियोनिक डायपॉज कहा जाता है. इसके तहत कुछ खास जानवर फर्टिलाइज्ड अंडे को तुरंत यूट्रस में इंप्लांट नहीं होने देते, बल्कि हालात अनुकूल होने तक प्रेग्नेंसी को होल्ड पर रख देते हैं. जब उन्हें लगता है कि अब मौसम ठीक है, खाना प्रचुर मात्रा में है और बच्चे की सुरक्षा पक्की है, तभी वे प्रेग्नेंसी को आगे बढ़ाते हैं. इसे गर्भाधान में देरी भी कहा जाता है. इस सर्वाइवल ट्रिक के जरिए मां और बच्चे दोनों की जान बचाई जा सकती है. आइए जानते हैं कि धरती के वो कौन से जीव हैं जो अपने मुताबिक प्रेग्नेंसी को अपनी मर्जी से आगे के लिए शिफ्ट कर सकते हैं.
8. चूहे और अन्य जीव
अन्य छोटे जीव जैसे चूहे आदि भी इस लिस्ट मेंआ ते हैं. आपको बता दें कि कई छोटे चूहे अपनी प्रेग्नेंसी को तब तक रोक कर रख सकते हैं जब तक कि वे अपने पिछले वाले बच्चों को दूध पिलाना बंद नहीं कर देते. एक साथ दोहरी जिम्मेदारी से बचने और अपने शरीर को सुरक्षित रखने के लिए यह प्रकृति का उनका एक बेहतरीन और अनूठा तरीका है.
7. बारहसिंघा
खूबसूरत रो डियर गर्मियों के बीच में मेटिंग करते हैं, लेकिन इनका भ्रूण महीनों तक बिना किसी बड़े विकास के वैसे ही रुका रहता है. यह एक नेचुरल प्रोसेस है जिससे यह पक्का किया जाता है कि सुंदर और छोटे फेंस (शावक) सर्दियों के खतरनाक दिनों में पैदा न होकर सुरक्षित और हरी-भरी वसंत ऋतु की घास के बीच जन्म लें, जहां उनके छिपने और खाने की पूरी व्यवस्था हो.
6. नाइन-बैंडेड आर्मडिलो
आर्मडिलो अपने सख्त कवच के लिए जाने जाते हैं. अगर इन्हें प्रेग्नेंसी के दौरान किसी तरह का भारी तनाव महसूस हो, खराब मौसम का सामना करना पड़े या इनकी सेहत पर बुरा असर पड़ने की संभावना हो, तो ये अपनी प्रेग्नेंसी को महीनों या सालभर तक के लिए डिले कर सकते हैं. जब हालात सुधरते हैं, तभी आगे की प्रक्रिया शुरू होती है.
5. सील
समुद्री जीव सील भी इस अद्भुत सर्वाइवल ट्रिक का इस्तेमाल करते हैं. कई प्रजाति की सील अपने बच्चों के जन्म के समय को महासागर के तापमान में होने वाले बदलावों और बर्फ की सुरक्षा के हिसाब से सेट करती हैं. वे यह सुनिश्चित करती हैं कि उनके बच्चे ऐसे वक्त पर पैदा हों जब तैरना और समुद्र के बदलते मिजाज को संभालना उनके लिए आसान हो, जिसके लिए वे प्रेग्नेंसी को कुछ समय के लिए होल्ड पर रख देती हैं.
4. बैजर्स और ओटर्स
'मस्टेलिड'परिवार से ताल्लुक रखने वाले बैजर्स और ऊदबिलाव (otters) भी इम्प्लांटेशन की प्रक्रिया को लंबे समय तक टाल सकते हैं. वे जानबूझकर इस प्रक्रिया में देरी करते हैं ताकि उनके छोटे-छोटे बच्चे कड़ाके की ठंड या मुश्किल दिनों में पैदा होने के बजाय सीधे गर्म और खुशनुमा वसंत के मौसम में दुनिया में आएं, जहां उनके लिए पर्याप्त भोजन और सुरक्षा उपलब्ध हो.
3. भालू
भूरे और काले भालू गर्मियों के मौसम में मेटिंग (प्रजनन) करते हैं, लेकिन फर्टिलाइज्ड अंडा तुरंत यूटेरस (गर्भाशय) से चिपकता नहीं है, बल्कि उसका विकास रोक दिया जाता है. इस डिले की वजह से बच्चे का जन्म ठीक उस समय होता है जब मादा भालू सर्दियों के दौरान अपनी गुफा में गहरी और सुरक्षित नींद (hibernation) सो रही होती है. इससे मां को गर्भ की अवस्था में ज्यादा दिक्कत नहीं होती और सुरक्षित माहौल में शावकों का जन्म होता है.
2. टम्मार वॉलबी
कंगारू प्रजाति के ही छोटे सदस्य 'टम्मार वॉलबी' भी इस लिस्ट में शामिल हैं. ये छोटे जीव अपने शरीर के अंदर भ्रूण को लगभग 11 महीने तक पॉज मोड पर रख सकते हैं. वे ऐसा इसलिए करते हैं ताकि उनके बच्चों का जन्म साल के सबसे सही और अनुकूल मौसम में हो सके, जिससे उन्हें जीवित रहने में कोई परेशानी न आए और वे सर्दियों या कठिनाइयों से बच सकें.
1. कंगारू
कंगारू अपनी इस अनोखी क्षमता के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं. मादा कंगारू के पास यह अद्भुत खूबी होती है कि वह नए एम्ब्रियो (भ्रूण) के विकास को तब तक रोक सकती है जब तक कि उसका जोए (बच्चा) बड़ा होकर थैली यानी पाउच को पूरी तरह से छोड़कर बाहर नहीं चला जाता. इसके अलावा, अगर सूखा पड़ने के बाद अचानक बारिश आ जाए और ताजा व हरी घास उग आए, तो इस अनुकूल माहौल को देखकर भी वे प्रेग्नेंसी की प्रक्रिया को आगे बढ़ा देती हैं ताकि नए बच्चे को भरपूर पोषण मिल सके.