‘पढ़ाई’ से लेकर ‘डोली उठने’ तक बेटियों का सारा खर्चा उठा रही सरकार, सीधे खाते में आता है पैसा; जानिए कौन ले सकता है लाभ!
UP Government Scheme: अगर आप भी उत्तर प्रदेश के निवासी हैं, आपके भी घर में भी बेटी है और आप उसके भविष्य को लेकर हमेशा फिक्र में रहते हैं, तो राज्य की सरकार द्वारा चलाई जा रही 5 शानदार योजनाओं का लाभ ले सकते हैं. अक्सर जानकारी न होने की वजह से आम लोग इन सरकारी योजनाओं का फायदा नहीं उठा पाते हैं, जबकि सरकार बेटियों के जन्म से लेकर उनकी पढ़ाई, सुरक्षा और शादी तक के लिए आर्थिक मदद देती है. इन योजनाओं के जरिए बेटियों को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है ताकि उन्हें जीवन में किसी भी तरह की मुश्किलों का सामना न करना पड़े. चाहे वह कन्या सुमंगला योजना हो, सुकन्या समृद्धि खाता हो या फिर सामूहिक विवाह योजना, हर कदम पर सरकार माता-पिता की मदद के लिए तैयार है. आइए जानते हैं इन पांचों योजनाओं के बारे में विस्तार से, जो आपकी लाडली की जिंदगी को पूरी तरह बदल सकती हैं और आपके सारे बोझ को आसान कर सकती हैं.
5. मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना
इस योजना के तहत यूपी सरकार बेटियों को जन्म से लेकर हायर एजुकेशन तक आर्थिक सहायता देती है, जिसकी कुल राशि को बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया गया है. यह पैसा अलग-अलग चरणों में सीधे बेटी के बैंक खाते में भेजा जाता है- जैसे जन्म पर 5,000, टीकाकरण पूरा होने पर 2,000, क्लास 1, 6 और 9 में एडमिशन पर क्रमशः 3,000 और 5,000 रुपये, तथा 12वीं के बाद कॉलेज या कम से कम 2 साल के डिप्लोमा कोर्स में दाखिले पर 7,000 रुपये दिए जाते हैं. इस योजना का लाभ उठाने के लिए परिवार यूपी का मूल निवासी होना चाहिए और वार्षिक आय 3 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए. एक परिवार की अधिकतम दो बेटियों को इसका लाभ मिलता है, लेकिन दूसरे बच्चे के रूप में जुड़वां बेटियां होने पर तीनों को इसका फायदा मिल जाता है.
4. सुकन्या समृद्धि योजना
बेटी के भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित करने के लिए केंद्र सरकार की यह छोटी बचत योजना काफी फेमस है, जिसमें 10 साल से कम उम्र की बेटी का खाता परिवार के माता-पिता या कानूनी अभिभावक खुलवा सकते हैं. इसमें सालाना कम से कम 250 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक जमा किए जा सकते हैं, जिस पर सरकार फिलहाल 8.2 प्रतिशत की दर से सालाना ब्याज दे रही है. इस योजना में जमा राशि, मिलने वाला ब्याज और मेच्योरिटी पर मिलने वाला पूरा पैसा इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है. यह खाता 21 साल में मेच्योर होता है, लेकिन बेटी के 18 साल की उम्र पार करने के बाद पढ़ाई के लिए 50 फीसदी तक राशि निकाली जा सकती है.
3. मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों की शादी के लिए उत्तर प्रदेश सरकार इस योजना के तहत प्रति जोड़ा कुल 1 लाख रुपये खर्च करती है. इसमें से 60,000 रुपये सीधे दुल्हन के बैंक खाते में भेजे जाते हैं, 25,000 रुपये से शादी के जरूरी उपहार जैसे कपड़े और बर्तन दिए जाते हैं, और 15,000 रुपये टेंट, खाना, पानी व अन्य विवाह समारोह के आयोजनों पर खर्च किए जाते हैं. इस योजना का लाभ उठाने के लिए लड़की की उम्र कम से कम 18 साल और लड़के की उम्र 21 साल होनी चाहिए, साथ ही परिवार की सालाना आय 3 लाख रुपये से कम और वे यूपी के मूल निवासी होने चाहिए. एससी, एसटी, ओबीसी, जनरल और अल्पसंख्यक सभी वर्गों के लोग इसके लिए आवेदन कर सकते हैं, और इसमें विधवा व तलाकशुदा महिलाओं की दोबारा शादी के लिए भी आर्थिक मदद मिलती है.
2. उत्तर प्रदेश रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष
यह योजना गंभीर हिंसा और अपराध की शिकार हुई महिलाओं और बेटियों के लिए वरदान साबित होती है, जिसके तहत उन्हें तुरंत मेडिकल ट्रीटमेंट और आर्थिक सहायता दी जाती है. अपराध की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित बेटियों को 1 लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, और सरकारी या एम्पैनलड अस्पतालों में उनका इलाज पूरी तरह मुफ्त होता है. जरूरत पड़ने पर सरकार उनके रहने, पढ़ाई और सामान्य जीवन में लौटने के लिए भी मदद करती है. इसके अलावा, अगर पीड़िता के छोटे बच्चे हैं, तो उनकी परवरिश और शिक्षा के लिए भी वित्तीय सहायता का पूरा प्रावधान इस कोष के अंतर्गत किया गया है.
1. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना
बेटियों के प्रति समाज की सोच बदलने और उनकी एजुकेशन के उद्देश्य से चलाई जा रही इस योजना के तहत लड़कियों को मुफ्त बैग, यूनिफॉर्म और स्टेशनरी उपलब्ध कराई जाती है. स्कूलों में लड़कियों का ड्रॉपआउट रेट (बीच में पढ़ाई छोड़ना) रोकने के लिए स्पेशल मिशन भी चलाए जाते हैं और लड़के-लड़की के जेंडर रेशियो को सुधारने की कोशिश भी की जा रही है. इसके साथ ही, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के माध्यम से जरूरतमंद और गरीब परिवार की बेटियों को मुफ्त रेजिडेंशियल (होस्टल) शिक्षा मुहैया कराई जाती है ताकि कोई भी बेटी पढ़ाई से वंचित न रह जाए.