प्रिय, प्रधानमंत्री जी नमस्कार, उम्मीद है आप कुशल मंगल होंगे और होने भी चाहिए. आपके कंधों पर 130 करोड़ देशवासियों का जिम्मा है. इसे आप बखूबी निभा रहे हैं जैसा कि आपकी पार्टी के लोगों की तरफ से ही कहा जाता है. आपका नाम देश विदेश की नामी हस्तियों वाली लिस्ट में शुमार होता है. पढ़कर, सुनकर अच्छा लगता है. लेकिन पीएम साहब कठुआ और उन्नाव की घटनाओं पर जिस तरह का माहौल बन रहा है वह आपकी छवि को आपके द्वारा किए गए प्रचार से अलग तरह की प्रदर्शित कर रहा है.

प्रधानमंत्री जी, शुक्रवार को आप बेटियों की चिंता पर बोले. आपने दोनों घटनाओं का नाम लिए बगैर इसे राष्ट्र और समाज के नाम तौर पर शर्मनाक बताया. पीएम साहब आपने जितने घुमावदार तरीके से यह बात कही वह 56 इंच पर बिल्कुल सूट नहीं करती. पीएम साहब देश ने आप पर भरोसा करके चार साल पहले झोली भरकर वोट दिए. आपने उस वक्त बलात्कार की घटनाओं को बहुत शर्मनाक बताया था. आपने वहशियों पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया था लेकिन ये क्या पीएम साहब एक बलात्कारी 10 महीने तक मजे से रहा और पीड़िता पल पल इंसाफ के इंतजार में कुढ़ती रही.

आपने सारी व्यवस्था को दुरुस्त करने का वादा किया था. आपने हर तरह की समस्याओं का समाधान कर अच्छे दिन लाने का वादा किया था लेकिन ये नहीं बताया था कि अच्छे दिन किनके आएंगे? ये अच्छे दिन कुलदीप सेंगर के लिए आए क्योंकि 10 महीने तक आपकी पार्टी की सरकार की पुलिस उसके खिलाफ नतमस्तक रही और एफआईआर तक नहीं की. पीएम साहब, पीड़िता इंसाफ की पहली सीढ़ी यानि एफआईआर तक के लिए मुख्यमंत्री आवास पर आत्मदाह करने पहुंच गई. इसके बाद भी आपकी पार्टी के मुख्यमंत्री ने उसको गिरफ्तार करने से इंकार कर दिया. क्या आपने इन्हीं अच्छे दिनों का वादा किया था.

पीएम साहब, उस बेचारी के बाप को मार दिया गया. एक पिता का साया उठना परिवार के लिए कितना दुखदायी होता है उसे आप जानते ही होंगे. आप चुनावी दौरों में हमेशा अपनी मां के संघर्ष के चर्चे करते रहे हैं. आपकी मां आपको पालने के लिए कितने कष्ट उठाती थीं यह आपने कई बार भावुक होकर बताया है. लोगों ने भी उस भावना का बखूबी सम्मान किया है. लेकिन जनता की भावना का ख्याल कौन करेगा प्रधान सेवक जी. उस बेटी और परिवार का क्या होगा जिसे आपकी पार्टी के विधायक की वजह से मार डाला गया. उसे प्रताड़ित किया गया.

प्रधानमंत्री जी, अब आपके समर्थक और पार्टी कार्यकर्ता तर्क देंगे कि विपक्ष हंगामा कर रहा है. वे तर्क देंगे पिछली सरकार के कार्यकाल का. आप भी इसे दूसरों पर थोपने लगें तो आपसे बिल्कुल उम्मीदें खत्म हो जाएंगी. प्रधानमंत्री जी, आपने नारा दिया था बेटी बचाओ. अब लोग कह रहे हैं कि ये भी उसी वक्त क्लियर कर देना था कि किससे ? आपने तो जनता की सेवा का वचन लिया था. आप तो झोले वाले फकीर थे लेकिन आपकी पार्टी ने धनाड्य विधायक पर कार्रवाई को क्यों टाले रखा पीएम साहब. मेरे मन में तो यही सवाल आ रहा है पीएम साहब की आपकी फकीरी वाला झोला सिर्फ जनता को दिखाने के लिए है.

पीएम साहब आपके समर्थन में लोग लिख रहे हैं कि एक दिन में 50 बच्चियों के साथ बलात्कार होता है. यानी हर घंटे दो बेटियां बलात्कार की शिकार हो जाती हैं. लेकिन इनके लिए कोई कैंडिल मार्च नहीं होता. उन दो बच्चियों के बलात्कार के खिलाफ हंगामा इसलिए बरप रहा है क्योंकी ये दोनों घटनाएं बीजेपी शासित राज्यों में हुई है. यानि आपके समर्थक भी इतने गिर गए हैं कि पढ़े लिखे लोग भी जनता पर सेलेक्टिव अटैक के आरोप लगा रहे हैं. यही कल आप भी कह सकते हैं. लेकिन प्रधान सेवक जी, आप ऐसा ही तर्क दें इससे पहले ही मैं बता देना चाहती हूं कि जनता सेलेक्टिव अटैक नहीं कर रही है. हर बलात्कार बुरा होता है पीएम साहब यह अपने भक्तों को भी बताइये. लेकिन इन मामलों में जो जनता आक्रोश दिखा रही है वह कहीं ना कहीं आपकी चुप्पी की वजह से है साहब. दोनों मामलों में आपकी पार्टी और सरकार आरोपियों को बचाती नजर आ रही है प्रधानमंत्री जी. अगर आपको वाकई बेटियों की फिक्र है तो अपना पराया छोड़ दीजिए प्रधान सेवक जी. जनता सड़क पर आती है तो सरकार को भी सड़क पर ला देती है प्रधानमंत्री जी.

                                                                                                      आपके ही देश की एक बेटी.

(नोट- उपरोक्त दिए गए विचार व आंकड़े लेखिका के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि आईटीवी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.)

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