हमें अपने पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का आजादी की रात का भाषण याद है। उन्होंने तब कहा था “भविष्य में हमें आराम नहीं करना है। न चैन से बैठना है बल्कि लगातार कोशिश करनी है। इससे हम जो बात कहते हैं या कह रहे हैं, उसे पूरा कर सकें। भारत की सेवा का मतलब है, करोड़ों पीड़ितों की सेवा करना। इसका अर्थ है, अज्ञानता और गरीबी को मिटाना, बीमारियों और अवसर की असमानता को खत्म करना। हमारी पीढ़ी के सबसे महान व्यक्ति की यही इच्छा रही है कि हर आंख से आंसू मिट जाएं। शायद यह हमारे लिए पूरी तरह से संभव न हो, पर जब तक लोगों कि आंखों में आंसू हैं और वो पीड़ित हैं, तब तक हमारा काम खत्म नहीं होगा। इसलिए हमें मेहनत करनी होगी, जिससे हम अपने सपनों को साकार कर सकें। ये सपने भारत के लिए हैं, साथ ही पूरे विश्व के लिए भी हैं। आज कोई खुद को बिल्कुल अलग नहीं सोच सकता, क्योंकि सभी राष्ट्र और लोग एक दूसरे से बड़ी निकटता से जुड़े हुए हैं। जिस तरह शांति को विभाजित नहीं किया जा सकता, उसी तरह स्वतंत्रता को भी विभाजित नहीं किया जा सकता। इस दुनिया को छोटे-छोटे हिस्सों में नहीं बांटा जा सकता है। हमें ऐसे आजाद महान भारत का निर्माण करना है, जहां उसके सारे बच्चे रह सकें”। आज जब हम अंग्रेजी हुकूमत से आजादी के 75वें साल में पहुंच चुके हैं। उस वक्त पंडित नेहरू के ये शब्द और भी महत्वपूर्ण हो गये हैं।

तालिबान ने सत्ता पर कब्जा कर लिया

हमारे पड़ोसी अफगानिस्तान में धार्मिक कट्टरता के लिए पहचाने जाने वाले तालिबान ने सत्ता पर कब्जा कर लिया है। दूसरे पड़ोसी, मेम्यार में वहां की सेना ने सत्ता हथिया ली है। पाकिस्तान से हमारे रिश्ते कभी अच्छे नहीं रहे हैं। अब चीन, श्रीलंका और नेपाल से भी हमारे बहुत अच्छे संबंध नहीं हैं। भूटान जैसा गरीब और अमेरिका जैसी महाशक्ति भी हमसे खफा है। हमारे देश की बहुसंख्यक आबादी धार्मिक कट्टरता का शिकार होकर तालिबानी संस्कृति को अपनाने लगी है। जिसमें अपने सिवाय किसी दूसरे के लिए बहुत गुंजाइश नहीं बचती है। ये हालात तब हैं जबिक आजादी के 75वें साल में हम वैश्विक भुखमरी के इंडेक्स में 94, जो एशिया में अफगानिस्तान को छोड़कर सबसे खराब हाल में है। विश्व में हमारे पीछे सिर्फ 12 वो देश हैं, जिनको सामान्य व्यक्ति जानता भी नहीं है। हमारे प्रधानमंत्री लालकिले से फख्र के साथ यह बताते हैं कि वह प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत दिवाली तक 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज दे रहे हैं। इस आंकड़े से समझा जा सकता है कि भिखारी की तरह मुफ्त अनाज के लिए कैसे और कौन लोग लाइन में लगेंगे। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि 2019 में 37 करोड़ लोग गरीब थे और अब 80 करोड़ दो वक्त की रोटी के लिए लाइन में लगे हैं।

9 रईशों के पास देश की आधी संपत्ति

 आपको यह भी जानना चाहिए कि भारत के सिर्फ 9 रईशों के पास देश की आधी संपत्ति है और आधे में देश की 135 करोड़ की आबादी जीवन यापन करती है। अमेरिकी रिसर्च सेंटर के मुताबिक कोरोना काल में अदूरदर्शी नीतियों के चलते देश में मध्यम वर्ग की संख्या में एक तिहाई कमी आई है, जबकि गरीबों की संख्या दो गुनी हो गई है। विश्व प्रसन्नता रिपोर्ट के मुताबिक 149 देशों में भारत 139वें स्थान पर है। इससे समझा जा सकता है कि लोगों की आंखों में कितने आंशू भरे हैं। यह हाल तब है, जबकि भारत के पड़ोसी अन्य सभी देश उससे अधिक खुशहाल हैं। सेंटर फॉर मॉनीटरिंग इंडियन इकोनॉमी की रिपोर्ट कहती है कि भारत में इस वक्त बेरोजगारी दर आजादी के बाद सबसे अधिक 14.5 फीसदी है। पिछले कुछ सालों में देश के 55 फीसदी परिवारों की न सिर्फ आय घटी है बल्कि उनके अंदर निराशा घर कर गई है। ऐसे में देश किस दिशा में जा रहा है? इस पर सोचना हम सभी की महती जिम्मेदारी है। निराशा, बेरोजगारी और भुखमरी के चलते देश में आत्महत्यायें तेजी से बढ़ी हैं। कोविड-19 के चलते हमने अपने देश के कई लाख लोग खो दिये हैं। प्रेस की स्वतंत्रता हो या आपसी घृणा बढ़ाने की घटनायें, इन दोनों मामलों में भारत की किरकिरी पूरे विश्व में हो रही है।

सैकड़ों किसानों को अपनी जान से हाथ गंवाना पड़ा

देश का किसान राजधानी की सीमाओं पर शरणार्थियों से भी बुरे हाल में पिछले नौ माह से पड़ा है। इस दौरान सैकड़ों किसानों को अपनी जान से हाथ गंवाना पड़ा है। इन किसानों को देशद्रोही, खालिस्तानी और पाक-चीन परस्त बताकर लगातार बदनाम किया जाता रहा है। दूसरी तरफ देश का यह सामाजिक स्वभाव बन रहा है कि मुस्लिम समुदाय बहुसंख्यकों का दुश्मन है। उसके खिलाफ खुलेआम हमले किये जा रहे हैं। घृणात्मक प्रचार से लेकर पीट-पीटकर मार डालने तक की घटनायें आम हैं। अधिकतर सियासी दल वोटबैंक के दबाव में उनपर कोई कार्रवाई करने के पक्ष में नजर नहीं आते हैं। जो दल पीड़ितों का समर्थन करते हैं, उन्हें देशद्रोही करार दे दिया जाता है। धार्मिक कट्टरपंथ हमें तालिबानी संस्कृति की दिशा में ले जा रहा है। महिलाओं और बच्चियों के प्रति अपराधों में यकायक बड़ी तेजी आई है। यौन हिंसा से लेकर तमाम तरह से उन्हें शिकार बनाया जा रहा है। लोकतांत्रिक संस्थाओं के साथ ही न्यायपालिका की गरिमा भी गिरी है। इन संस्थाओं की निष्पक्षता सवालों के दायरे में है। जांच एजेंसियां हों या आमजन की आवाज बनने वाला सोशल मीडिया सभी सत्तानुकूल चलने को विवश हैं। इस 15 अगस्त को प्रधानमंत्री ने 88 मिनट का भाषण दिया। इस भाषण में भी कमोबेश वही बातें शामिल थीं, जो लंबे समय से होती चली आ रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के वह शब्द सिर्फ शब्द ही बनकर रह जाएंगे, जिनमें कहा गया था कि हमें कुछ ऐसा करना है कि हर आंख से आंसू मिट जाएं।

 हमें हर व्यक्ति के आंखों से आंसू मिटाने हैं

इस वक्त देश की जरूरत धार्मिक कट्टरपंथ को खत्म करके सर्वजन के विकास की दिशा में आगे बढ़ने की है। हमें हर व्यक्ति के आंखों से आंसू मिटाने हैं। उनसे दूरी बनाने की जरूरत है, जो सिर्फ अपने लिए सोचते हैं। हमारे प्रधानमंत्री ने यह सही ही कहा कि यही समय है, सही समय है, भारत का अनमोल समय है, हर तरफ असंख्य भुजाओं की शक्ति है। हम इस शक्ति को सही दिशा और दशा दे सकें, तो सबका हित होगा। आमजन पर करों का बोझ कम हो और उनकी सामाजिक सुरक्षा बढ़े। हर हाथ को काम और हर घर में खुशहाली, तभी आएगी जब सार्वजनिक धन कुछ लोगों पर नहीं बल्कि सभी लोगों के हित में खर्च होगा। सत्ता की शाहखर्ची पर लगाम लगे और सुरक्षा के नाम पर फैला तामझाम खत्म हो। सुरक्षा आमजन को चाहिए न कि सत्ता शक्ति का उपभोग करने वालों को। हमारा धर्म वसुधैव कुटुंबकम का संदेश देता है। पंडित नेहरू के शब्दों में “हमें ऐसे आजाद महान भारत का निर्माण करना है, जहां उसके सारे बच्चे रह सकें”। जब यह शब्द सार्थक होंगे तभी आजादी भी सार्थक होगी।
जय हिंद!
(लेखक आईटीवी नेटवर्क के प्रधान संपादक हैं।)
ajay.shukla@itvnetwork.com

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