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बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे!

 हम अंग्रेजी हुकूमत से आजादी के 74 साल पूरे कर चुके हैं। 75वें वर्ष में प्रवेश करते वक्त हमारी सरकार “आजादी का अमृत महोत्सव” मना रही है। 15 अगस्त 1947 को प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के तिरंगा फहराते....Read More

Tokyo Olympic 2020 : चिंता, तनाव और संकटों से जूझते खिलाड़ी!

नई दिल्ली. टोक्यो ओलंपिक में हमारे खिलाड़ियों ने अब तक देश को एक स्वर्ण, दो रजत और चार कांस्य पदक दिलाये हैं। हमारी महिला वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने जब पहला रजत पदक जीता, तो पूरा देश झूम उठा। नीरज चोपड़ा....Read More

अवसरवाद का पर्याय बन गई राजनीति!

नई दिल्ली. महात्मा गांधी का मानना था, कि लक्ष्य की सफलता तब है, जब उसके लिए पवित्र साधन और रास्ते अपनाये जायें। राज्य व्यवस्था में लोकतंत्र को श्रेष्ठ माना गया है। हमारे देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था सबसे पहले आई। इसका....Read More

अवसरवाद का पर्याय बन गई राजनीति!

नई दिल्ली. महात्मा गांधी का मानना था, कि लक्ष्य की सफलता तब है, जब उसके लिए पवित्र साधन और रास्ते अपनाये जायें। राज्य व्यवस्था में लोकतंत्र को श्रेष्ठ माना गया है। हमारे देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था सबसे पहले आई। इसका....Read More

लोकतंत्र के बूते जो शीर्ष पर पहुंचे, वही उसके शत्रु!

नई दिल्ली. भारत को संप्रभु लोकतांत्रिक देश बनाने के लिए हजारों लोगों अपना जीवन कुर्बान किया, तो हजारों लोगों ने सालों-साल जेल काटी। देश की आजादी के लिए अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ दो तरह के आंदोलन हुए थे, एक अहिंसक....Read More

उत्कृष्ट साहसी पत्रकारिता को विनम्र श्रद्धांजलि!

वातानुकूलित पत्रकारिता के दौर में गोलियों, बमों और रॉकेट लांचरों के बीच सच को दुनिया के सामने लाने का जज्बा कम लोगों में होता है। विश्व की सबसे विश्वसनीय न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के फोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी को अफगानिस्तान में तालिबानियों....Read More

यह न्याय व्यवस्था का कत्ल है!

इस साल अप्रैल के आखिरी महीने में सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायमूर्ति एनवी रमण, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और एएस बोपन्ना की तीन सदस्यी पीठ ने पत्रकार सिद्दीक कप्पन को दिल्ली के अस्पताल में बेहतर इलाज का आदेश दिया। आदेश में न्यायमूर्तियों....Read More

हम किसका भविष्य बना रहे हैं?

भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना ने एक व्याख्यान में कहा, “बड़े पैमाने पर गरीबी, अशिक्षा, पिछड़ापन, असमानताओं और कथित अज्ञानता के बावजूद स्वतंत्र भारत के लोगों ने खुद को बुद्धिमान साबित किया है। जनता ने अपने कर्तव्यों का बखूबी....Read More

धर्मांधता हमारे भविष्य को जहरीला बना रही!

विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश भीड़तंत्र में तब्दील हो गया है? इस वक्त यह सवाल मौजूं है। जुलाई 2017 में सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पड़पोते तुषार गांधी और तहसीन पूनावाला की याचिका....Read More

शाहखर्ची, भ्रष्टाचार और भुखमरी!

यूपी के शाहजहांपुर निवासी अखिलेश गुप्ता ने व्यवसायिक कर्ज न चुका पाने के कारण परिवार सहित आत्महत्या कर ली। लखनऊ की एक फ्लोर मिल में काम करने वाले महेश अग्रवाल ने नौकरी चले जाने के अवसाद में खुदकुशी कर ली।....Read More

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Aanchal.Pandey

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