मेरा शुरू से मानना रहा है कि एक टेस्ट मैच की हार पर कभी हो-हल्ला नहीं करना चाहिए। बल्कि इन ग़लतियों से सीखने की कोशिश करनी चाहिए। हारना किसे अच्छा लगता है लेकिन अपने खिलाड़ियों पर भरोसा रखिए। ये खिलाड़ी आपके लिए आगे जीत का रास्ता भी खोल सकते हैं। इस समय सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर है कि बॉक्सिंग डे टेस्ट के लिए भारत की प्लेइंग इलेवन क्या होगी। टीम में क्या क्या बदलाव होंगे लेकिन मैं अपनी बात को दोहराऊंगा कि जो खिलाड़ी इस बार प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं होंगे, उन्हें भी भविष्य में खारिज नहीं किया जा सकता। उनमें भी बहुत टैलंट है।

पृथ्वी शॉ को ही लीजिए। यहां एक टेस्ट में उनके न चलने पर हो-हल्ला करना ठीक नहीं होगा। वह काफी प्रतिभाशाली हैं। इससे पहले अगर वह न्यूज़ीलैंड में सफल नहीं हुए हैं तो वहां अन्य खिलाड़ी भी सफल नहीं हुए हैं। हार का ठीकरा एक या दो खिलाड़ियों पर फोड़ देना ठीक नहीं होगा। लेकिन फिर भी मैं बॉक्सिंग डे टेस्ट में बतौर ओपनर केएल राहुल और मयंक अग्रवाल की जोड़ी को ओपन करते देखना चाहूंगा। राहुल के पास अनुभव है। वनडे क्रिकेट के वह उपकप्तान भी हैं। ज़ाहिर है कि वह ज़िम्मेदारी लेना जानते हैं। बस उन्हे व्हाइटबॉल क्रिकेट के प्रदर्शन को रेड बॉल में तब्दील करना है।

उनके बारे में कहा जा रहा है कि उनका प्रदर्शन पिछली कई टेस्ट सीरीज़ से खराब रहा है। दरअसल, बाहर से बैठकर आलोचना करना बहुत आसान होता है। कभी फॉर्म का खराब होने का यह मतलब नहीं कि आगे भी उनकी फॉर्म खराब ही रहेगी। तीसरे नम्बर पर पुजारा है और मैं चौथे नम्बर पर हनुमा विहारी को खेलते देखना चाहूंगा। वह मौजूदा स्थितियों में इस स्थान के लिए आदर्श हैं। पांचवें नम्बर पर कप्तान आजिंक्य रहाणे होंगे और छठे नम्बर पर शुभमान गिल को अपने करियर की शुरुआत करने का अवसर मिलना चाहिए। गिल लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और इस जगह पर बल्लेबाज़ी करते हुए वह अपने ऊपर से दबाव भी कम कर सकते हैं।

इसके बाद सातवें नम्बर पर मैं साहा की जगह ऋषभ पंत को खेलते देखना चाहूंगा। इसकी बड़ी वजह यह है कि वह टीम में अकेले बाएं हाथ के बल्लेबाज़ हैं। प्रैक्टिस मैच हो या फिर पिछले ऑस्ट्रेलियाई दौरे में उनकी शानदार बल्लेबाज़ी हो, दोनों ही बार उन्होंने काफी प्रभावित किया है। अब आप कल्पना कीजिए कि सातवें नम्बर का बल्लेबाज़ अगर 60 से 70 रन बना दे और उसमें सेंचुरी बनाने की भी कूवत हो तो टीम का स्कोर कहां पहुंचेगा। ऐसा खिलाड़ी टीम को मैच में वापिस लाने का काम कर सकता है। उनके खेलने की शैली के अनुकूल ऑस्ट्रेलिया में विकेट हैं।  आठवें नम्बर पर अश्विन और उसके बाद शमी की जगह मैं नवदीप सैनी को रखना चाहूंगा। उनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह पुरानी गेंद से भी अच्छी गेंदबाज़ी करने की क्षमता रखते हैं। बाकी उमेश और बुमराह तो टीम में हैं ही।

(लेखक देश के लिए 49 टेस्ट और 94 वनडे इंटरनैशनल खेल चुके हैं)