कठुआ में आठ साल की मासूम बच्ची के साथ गैंगरेप के बाद हत्या कर दी गई. बेहद दुखद, हृदय विदारक घटना. देश के बाकी लोगों की तरह मैं भी चाहती हूं कि दोषियों को फांसी की सजा मिले. बल्कि इससे भी एक कदम बढ़कर उन्हें सूली पर लटका दिया जाए. लेकिन माफ कीजिए मैं आपके आंदोलन में शामिल नहीं हो सकती. आपकी तरह सोशल मीडिया पर हैशटैग वाली मुहिम नहीं चला सकती ना ही मैं हाथ में मोमबत्ती लिए इंडिया गेट पर प्रदर्शन कर सकती हूं. क्योंकि मैं जानती हूं कि आपका ये आक्रोश एक सोची समझी राजनीति का हिस्सा है. आप एक एजेंडे के तहत ऐसा कर रहे हैं. मैं आप पर भरोसा नहीं कर सकती. मुझे शक नहीं पूरा यकीन है कि यदि कल को मेरे या मेरे परिवार में से किसी महिला के साथ ऐसी घटना हो जाती है तो आप विरोध तो दूर सांत्वना का एक शब्द भी पीड़ित के लिए नहीं निकालेंगे. क्योंकि मेरे या मेरे परिवार की किसी महिला के साथ किसी घटना का विरोध करने से आपके एजेंडे की पूर्ति नहीं होती.

बिहार में 6 साल की बच्ची के साथ बलात्कार करके उसकी हत्या कर दी गई लेकिन उसका विरोध नहीं किया गया और ना ही कोई कैंपेन चला. वजह आपको पता ही है. असम में पिछले कुछ दिनों से लगातार नाबालिगों से रेप और हत्या की घटनाएं हो रही हैं लेकिन उन्हें अखबारों की सुर्खियों छोड़ो छोटा सा कॉलम भी नहीं मिल रहा. वजह आपको पता है.

अगर किसी घटना में किसी हिंदू का हाथ है तो आपको वजह मिल जाती है विरोध की अगर अगर आरोपी हिंदू नहीं है तो आपकी सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता. मरे तो मरता रहे. कठुआ में रेप की घटना हुई तो आपने हिंदुस्तान से लेकर अमेरिका तक ढोल पीट दिया. पूरी दुनिया को बता दिया कि देखो हिंदू राष्ट्रवादी कितने जल्लाद हैं वहीं बात जब मुस्लिम आतंकवादी की आती है तो आपको उसमें गरीब हेडमास्टर का बेटा नजर आता है.

क्या-क्या याद दिलाऊं, पिछले महीने यूपी में एक महिला को जबरन धर्म बदलने पर मजबूर किया गया और जब उसने ऐसा नहीं किया तो चार लोग जो अल्पसंख्यक समाज के थे, उन्होंने उसका रेप किया. बाद में जब पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार करने पहुंची तो स्थानीय लोगों के साथ-साथ समाजवादी पार्टी के नेता ने ही आरोपियों के पक्ष में खड़े हो गए. हमेशा की तरह आपके कान पर जूं नहीं रेंगी क्योंकि ये आपके एजेंडे के खिलाफ खबर थी. फिर वही ढाक के तीन पात. ना खबर मिली ना इंसाफ.

मुझे आपके विरोध प्रदर्शनों से कोई लगाव नहीं है क्योंकि आपका विरोध एक खास एजेंडे के तहत है. अगर खबर एंटी हिंदू और प्रो मुस्लिम है तो आप गला फाड़-फाड़ कर चिल्लाएंगे. ढोल पीट-पीटकर कहेंगे कि देखो हिंदू राष्ट्रवाद, हिंदू आतंकवाद और ना जाने क्या-क्या. क्योंकि इससे आपकी स्वार्थ सिद्धि होती है. आप खुद को कथित प्रोग्रेसिव दिखाने के लिए एक धर्म और वर्ग विशेष के खिलाफ हुई घटनाओं पर ही बोलोगे. अगर वही घटना किसी हिंदू के साथ होती है तो है होती रहे आपकी बला से. आपको क्या फर्क पड़ता है? आपकी संवेदना क्यों जागे? हिंदू के साथ हुआ अपराध आपकी सोई चेतना को क्यों झकझोरे? आप को किसी के दुख-दर्द से कोई सरोकार नहीं है. आपको सिर्फ एजेंडा चलाना है इसलिए मैं आपके साथ नहीं हूं.

(नोट- उपरोक्त दिए गए विचार व आंकड़े लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि आईटीवी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.)

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