Thursday, August 11, 2022

सिर तन से जुदा जैसी आवाजें किसके शह पर निकल रही हैं

किसकी शह पर सिर तन से जुदा

विद्याशंकर तिवारी
भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नुपूर शर्मा द्वारा पैगंबर मोहम्मद के दांपत्य जीवन को लेकर दिये गये बयान पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. हालांकि वह वक्तव्य को लेकर खेद जता चुकी हैं लेकिन उदयपुर में कन्हैयालाल की हत्या से शुरू हुई दहशतगर्दी जारी है. कन्हैयालाल के अलावा अमरावती में उमेश कोल्हे की भी उसी तर्ज पर हत्या की गई. इतना ही नहीं जिसने भी नुपूर शर्मा के बयान का समर्थन किया उसे धमकी दी गई और वीडियो जारी कर माफी मांगने को कहा गया. कन्हैयालाल की हत्या के बाद अजमेर के वकील की गर्दन उड़ाने और राजसमंद में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी पर जानलेवा हमले जैसी घटनाएं भी हुईं.

कौन दे रहा है धमकी

धमकी भरे फोन, ई मेल का सिलसिला बीजेपी की प्रवक्ता रहीं नुपूर शर्मा से शुरू हुआ था और इसकी चपेट में दिल्ली बीजेपी के मीडिया प्रभारी रहे नवीन कुमार जिंदल भी आ गये थे. दोनों को अभी भी धमकियां मिल रही है लेकिन हद तो अजमेर दरागाह के खादिम हिस्ट्रीशीटर सलमान चिश्ती ने की. उसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें वह नुपूर शर्मा का सिर काटकर लाने वाले को अपना घर देने की बात कह रहा है.

वीडियो में कह रहा है कि वक्त पहले जैसा नहीं रहा वरना मैं बोलता नहीं, मुझे कसम है मेरी मां की, मैं उसे सरेआम गोली मार देता, बच्चों की कसम मैं उसे गोली मार देता. सीना ठोक कर कहता हूं जो भी नुपूर शर्मा की गर्दन लाएगा मैं अपना घर उसे दे जाऊंगा और रास्ते पर निकल जाऊंगा. सलमान का वादा है अभी भी चीरने का दम रखता हूं. इससे पहले भी 17 जून को सलमान चिश्ती ने गुस्ताख ए रसूल की यही सजा, सर तन से जुदा, सर तन से जुदा जैसा बयान दिया था.

सिर तन से जुदा के पीछे कौन

पैगंबर पर दिये गये बयान को लेकर अभी तक राजस्थान और महाराष्ट्र में दो हत्याएं हुई हैं और कई लोगों को जान से मारने की धमकी मिली है. उत्तर प्रदेश के कानपुर से लेकर प्रयागराज तक हिंसा की घटनाएं हुई. यूपी में सख्त कार्रवाई हुई लेकिन राजस्थान और महाराष्ट्र में एक्शन को लेकर वो तेजी नहीं दिखी. कन्हैयालाल के बेटे ने नुपूर शर्मा के समर्थन में पोस्ट किया था जिस पर तत्काल उनकी गिरफ्तारी हुई लेकिन जब सुरक्षा मांगी तो नहीं दी गई, नतीजा यह हुआ कि उनका सिर तन से जुदा कर दिया गया.

दोहरा मानदंड

इसमें दो राय नहीं हो सकती कि किसी को भी ऐसी बात नहीं बोलनी चाहिए जिससे किसी की आस्था को ठेस पहुंचे, नुपूर शर्मा ने बेशक प्रतिक्रिया स्वरुप हदीश के हवाले से पैगंबर मोहम्मद के दांपत्य जीवन को लेकर टिप्पणी की लेकिन वह चाहती तो इससे बच सकती थीं. दरअसल 27 मई को एक चैनल के डिबेट में नुपूर शर्मा के अलावा उस डिबेट में मुस्लिम पॉलिटिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष तसलीम रहमानी और जामिया मिल्लिया इस्लामिया में इस्लामिक स्टडीज के प्रोफेसर जुनैद हारिस हिस्सा ले रहे थे. इसी दौरान रहमानी और नुपूर शर्मा में बहस हो गई और नुपूर ने पैगंबर पर टिप्पणी कर दी. उसके बाद देश दुनिया में हंगामा मच गया, किसी ने इस बात पर गौर नहीं किया कि उस डिबेट में शिवलिंग को लेकर क्या कहा गया था और किसने शुरुआत की अलबत्ता नुपूर शर्मा की प्रतिक्रिया को लेकर आसमान सिर पर उठा लिया.

सोशल मीडिया में दो ग्रुप

सोशल मीडिया में दो ग्रुप बन गये, सिर कलम करने की बात होने लगी. इसके बाद एफआईआर से निलंबन तक की कार्रवाई हो गई लेकिन समुदाय विशेष का गुस्सा नहीं थमा और उदयपुर से लेकर अमरावती तक सर तन से जुदा किया जाने लगा. पूरा देश हिल गया, पूछा जाने लगा कि आखिर ये सब क्या हो रहा है, एक कोने से आवाज आई समाज में जो जहर फैलाया गया था वो अपना रंग दिखा रहा है. दूसरे कोने से आवाज गूंजी…नहीं सहेगा हिंदुस्तान. सियासतदान अपने हिसाब से बयान जारी कर सियासत करने लगे लेकिन कोई नहीं बोला कि इंसानियत मर रही है और कट्टरता किसी का भला नहीं कर सकती. हिंदू देवी देवताओं को कला के नाम पर चाहें जितना अपमानित कर लिजिए लेकिन न तो मामला संवेदनशील बनता है और न ही किसी को डर लगता है, आखिर क्यों?

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