नई दिल्ली : बिलकुल यही चल रहा है संघ और ममता बनर्जी के बीच, एक डाल डाल तो दूसरा पात पात. बीजेपी और संघ अब तक के अजेय गढों को ध्वस्त करने के मास्टर मिशन में लग गया है, जिनमें केरल और पश्चिम बंगाल सबसे ऊपर हैं और संघ की शिकायतें सबसे ज्यादा इन्हीं दो राज्यों से देख सकते हैं. हालिया केस 3 अक्टूबर को सिस्टर निवेदिता मिशन के एक कार्यक्रम से सम्बंधित है, जिसमें संघ प्रमुख मोहन भागवत मुख्य अतिथि थे, जिस ऑडीटोरियम में उन्हें भाषण देना था, उसने उस कार्यक्रम की अनुमति को रद्द कर दिया. ऑडीटोरियरम जिस संस्था का है, उसके अध्यक्ष ममता के एक मंत्री है, साफ है राजनीतिक दवाब हैं. लेकिन इस तरह के बैन से फायदा संघ को ही मिलना तय है.

जनवरी में भी ममता सरकार ने मोहन भागवत की कोलकाता में रैली पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन वो रोक नहीं पाईं क्योंकि हाईकोर्ट के आदेश से उस प्रतिबंध पर रोक लग गई और भागवत ने वो रैली की. इससे ममता की तो किरकिरी हुई ही, संघ की भी पश्चिम बंगाल में प्रतिष्ठा बढ़ी. इस घटना से भी संघ के एजेंडे को ही मदद मिलेगी. संघ और उससे जुड़े संगठन लगातार ममता के खिलाफ अलग अलग मंचों और तरीकों से अलग अलग मौकों पर मोर्चा खोल कर रखे हुए हैं. मार्च में संघ की टॉप बॉडी प्रतिनिधि सभा की मीटिंग में भी पश्चिम बंगाल में बढ़ती जेहादी गतिविधियों और ममता सरकार की मुस्लिम तुष्टिकरण नीतियों के खिलाफ प्रस्ताव पारित हुआ था, उस के बड़े मायने हैं, यानी निशाने पर ममता सरकार है.

तभी तो चारों तरफ से घेरने की योजना बनी और लम्बी लडाई का ऐलान किया गया. बड़े पैमाने पर हाल ही में हनुमान जयंती को कस्बा लेवल पर मनाया गया. उसके बाद काजी नसरुल इस्लाम जैसे राष्ट्रवादी कवि की जयंती पर कई बड़े कार्य़क्रम रखे गए. हाल ही में कोलकाता में यूथ को जोड़ने के लिए एक स्टेट लेवल फुटबॉल टूर्नामेंट भी शुरू किया जिसकी विजेता टीम को अंडर सेवंटीन वर्ल्ड कप में खेलने को मौका मिलेगा, जो 6 अक्टूबर से भारत में शुरू होगा. इस टूर्नामेंट को संघ के सहयोगी संगठन क्रीड़ा भारती ने आयोजित किया है.

इधर ममता सरकार का कहना है कि 30 सितम्बर को दुर्गा पूजा का आखिरी दिन या विजय दशमी है और 1 अक्टूबर को मोहर्रम, ऐसे में तीन अक्टूबर को मोहम भागवत के आने से मुश्किल हो सकती है. इतना ही नहीं संघ ने बडे पैमाने पर विजय दशमी के दिन शस्त्र पूजा की बात कही है, ऐसे में ममता ने बयान दिया है कि शस्त्र को बस मां दुर्गा के हाथ मे ही अच्छे लगते हैं, यानी इस मुद्दे पर भी घमासान के आसार हैं.

मोहन भागवत तीन अक्टूबर को तो केवल एक दिन की यात्रा पर ही कोलकाता जा रहे थे, जिसके तहत उन्हें सिस्टर निवेदिता मिशन के कार्य़क्रम में सिस्टर निवेदिता का राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम में योगदान विषय पर सभा को सम्बोधित करना था. असली मुश्किल तो दिसम्बर में होगी, जब भागवत पश्चिम बंगाल पूरे पांच दिन के लिए जाएंगे, ये खास इसलिए भी है क्योंकि आमतौर पर भागवत पश्चिम बंगाल में साल भर में दो या तीन दिन के दौरे पर ही जाते हैं, ये पहली बार है कि वो पांच दिन वहां रहेंगे. इन पान दिनों में संघ का शिक्षा वर्ग भी होगा, जिसके दौरान पूरा फोकस मिशन पश्चिम बंगाल पर किया जाएगा. भागवत के इन पांच दिनों के कार्य़क्रम का उद्देश्य ही है कि राज्य भर के हर छोटे बड़े महत्वपूर्ण संघ कार्य़कर्ता, पदाधिकारी और सहयोगी संगठनों के बडे पदाधिकारियों से मिल लिया जाए, उनमें जोश भरा जाए, उनकी परेशानियां सुनी जाएं और उनका निदान ढूंढा जाए, असल उद्देश्य पश्चिम बंगाल के भगवाधारियों को ये मैसेज देना है कि जब अपराजेय वामपंथियों को वहां से उखाड़ा जा सकता है तो उनकी जगह लेने वाली टीएमसी को क्यों नहीं.

इतना ही नहीं उसके फौरन बाद यानी अगले साल जनवरी में संघ में नंबर दो की हैसियत रखने वाले सर कार्यवाह भैय्याजी जोशी उत्तर बंगाल की यात्रा पर जाएंगे. यानी कहीं से भी मिशन को कमजोर नहीं होने देना है. ध्यान दीजिए इधर हनुमान जयंती के कार्यक्रम खत्म हुए, साथ में नजरूल इस्लाम जयंती के भी चले, फिर दुर्गा पूजा आ गई, उसके साथ ही रामलीला आयोजन शुरू हो गए, अब विजय दशमी पर शस्त्र पूजा के कार्य़क्रम पश्चिम बंगाल में कस्बा स्तर पर होना तय हुए हैं तो बजरंग दल ने अष्टमी और नवमी यानी 28029 को अपना त्रिशूल दीक्षा का कार्यक्रम रख दिया है.

इधर अक्टूबर में 13 से लेकर 15 तारीख तक भोपाल में संघ के कार्यकारी मंडल की भी मीटिंग है, इसे दीपावली बैठक का नाम दिया गया है. जिसमें पश्चिम बंगाल के मुद्दे के अलावा स्वामी विवेकानंद के प्रसिद्ध शिकागो भाषण की 125वीं सालगिरह पर होने वाले समरोहों, कार्यक्रमों पर भी चर्चा होगी. चूंकि स्वामी विवेकानंद पश्चिम बंगाल की धरती पर पैदा हुए थे, तो ऐसे में उनके या उनकी शिष्या सिस्टर निवेदिता से जुड़े कार्य़क्रमों को लेकर बंगालियों का भावुक होना तय है. जो फुटबॉल टूर्नामेंट क्रीड़ा भारती कोलकाता में करवा रहा है, उसको भी स्वामी विवेकानंद की शिकागो स्पीच की याद में ही करवाया जा रहा है. इसके अलावा बाढ़ राहत के काम में भी संघ के स्वंयसेवकों को जुटने के लिए कहा गया है.

जाहिर है 2019 में लोकसभा चुनाव है, अभी बीजेपी के पास पश्चिम बंगाल में बस एक सीट है और अमित शाह अपने टारगेट यानी 22 सीट्स का ऐलान कर चुके हैं, जो आसान नहीं है, ऐसे में अभी से जुटना होगा. बीजेपी अपने दम पर कर पाएगी भी नहीं. इस मिशन के लिए संघ से जुड़े संगठन जनता के पास आंकड़ों के साथ भी जा रहे हैं कि कैसे 1951 में पश्चिम बंगाल में 78.45 फीसदी हिंदू थे, जो अब यानी 2011 में घटकर 70.54 ही रह गए हैं. वो इसके पीछे साजिश का इशारा कर रहे हैं. वो कालियाचक पुलिस स्टेशन और मालदा जैसी घटनाओं को भी वीडियोज और अखबारी रिपोर्ट्स के जरिए पश्चिम बंगाल की जनता तक लेकर जा रहे हैं कि जब सिक्योरिटी फोर्सेज सेफ नहीं तो आप क्या होंगे. इसलिए बड़े बड़े रैली या मोर्चे भी आयोजित किए जा रहे हैं, शस्त्र पूजा और त्रिशूल दीक्षा भी उसी की कड़ी हैं. साफ मैसेज वहां उनकी विचारधारा में यकीन करने वालों को देना है कि डरने की जरूरत नहीं है, संघ के एजेंडे को फायदा मालदा जैसी घटनाओं या बरकत जैसे मौलानाओं के बयानों से तो मिलता रहा ही है, ममता सरकार की बैन की राजनीति से भी मिलता है.