नई दिल्ली: आमिर खान के लिए आज दोहरी खुशी का दिन है, आज जहां उनकी फिल्म दंगल ने चीन के बॉक्स ऑफिस पर 725 करोड़ की कमाई कर एक नया रिकॉर्ड बनाया है, वहीं आज उनकी सुपरहिट मूवी जो जीता वही सिकंदर को रिलीज हुए 25 साल हो गए हैं. दिलचस्प बात ये है कि इसी मूवी से बॉलीवुड में शुरूआत की थी फराह खान ने भी. फराह खान ने बतौर कोरियोग्राफर और पूजा बेदी की बतौर एक्ट्रेस विषकन्या के बाद ये दूसरी फिल्म थी. इस तरह इन दोनों के लिए भी ये बड़ा ही खास दिन है. 22 मई 1992 को हुई थी जो जीता वही सिकंदर रिलीज.
 
आमिर के लिए ये फिल्म इसलिए भी खास थी क्योंकि इसे उनके कजिन मंसूर खान डायरेक्ट कर चुके थे, आमिर ने उन्हीं की फिल्म कयामत से कयामत तक के जरिए बॉलीवुड में पहला कदम रखा था और वो भी धमाके के साथ. मंसूर खान ने बॉलीवुड में केवल चार फिल्में डायरेक्ट कीं और एक प्रोडयूस की, और सभी पांचों रही थीं सुपरहिट. इनमें से तीन आमिर खान के साथ थीं कयामत से कयामत तक, जो जीता वहीं सिकंदर और जोश, जबकि उनकी चौधी फिल्म थी जोश, जिसमें शाहरुख, ऐश्वर्या और चंद्रचूड़ थे. जबकि इमरान खान की डेल्ही बेली को उन्होंने प्रोडयूस किया था. जो जीता वही सिंकदर को अमेरिकी फिल्म ‘ब्रेकिंग अवे’ से प्रेरित बताया जाता है, हालांकि तकरीबन इसी थीम पर अरिंदम चौधरी ने सनी देयोल को लेकर एक और फिल्म बनाई थी.
 
फिल्म की स्टोरी देहरादून बेस्ड थी और वहां की स्कूलों की इंटरस्कूल साइकिल चैम्पियनशिप को लेकर उसका तानाबाना बुना गया. आमिर और आयशा की जोड़ी के अलावा विलेन के तौर पर दीपक तिजोरी और वैम्प के तौर पर पूजा बेदी थीं, पूजा बेदी के हिस्से में आया गाना पहला नशा, पहला खुमार उन दिनों हर युवा की जुबान पर चढ़ गया था. जतिन ललित ने फिल्म का म्यूजिक दिया था और मजरूह सुल्तानपुरी ने फिल्म के गीत लिखे थे, लगभग सारे ही गाने काफी पंसद किए गए थे. फराह खान को भी इस फिल्म के बाईचांस मौका मिला था, दरअसल पहला नशा पहला खुमार गाना सरोज खान को कोरियोग्राफ करना था लेकिन किसी वजह से वो नहीं आ सकीं, जबकि गाने को फिल्माने की तैयारी पूरी हो चुकी थी, ऐसे में फराह खान को बुलाया गया. उनकी तो लॉटरी ही लग गई क्योंकि पापा कहते हैं के बाद आमिर का ये दूसरा गाना था जो यूथ नेशनल एंथम बन गया.
 
ऐसी और भी कई दिलचस्प बातें हैं इस फिल्म के साथ. फराह को पूजा बेदी के साथ काफी दिक्कत आ रही थीं, दोनों ही नए थे. ऐसे में फराह ने पूजा को कार पर खड़ा किया और नीचे से तूफान फैन चला दिया, जिससे उनका लम्बी स्कर्ट उड़ने लगी, फराह को यही शॉट चाहिए था. उन दिनों ये शॉट काफी पसंद किया गया था. कहा जाता है कि ये गाना बॉलीवुड का पहला स्लो मोशन फिल्माया गया गाना था, हालांकि महमूद की फिल्म लाखों में एक में भी एक गाना इसी तरह फिल्माया गया था.
 
दिलचस्प बात ये भी थी कि इस फिल्म में दीपक तिजोरी के रोल के लिए उन दिनों अक्षय कुमार ने भी ऑडीशन दिया था, लेकिन उनको रिजेक्ट कर दिया गया था. बाद में उस रोल के लिए मिलिंद सोमन को चुन लिया गया, लेकिन कुछ दिनों की शूटिंग के बाद मिलिंद को भी मना कर दिया गया, शायद मंसूर आमिर के सामने उनकी कदकाठी का ही विलेन चाहते थे, उनके मजबूत और स्मार्ट नहीं. तब दीपक तिजोरी को चुना गया. कयामत से कयामत तक की तरह इस फिल्म में भी आमिर खान के भतीजे इमरान खान ने ही आमिर के बचपन का रोल किया था, आमिर के भाई फैजल खान को भी जेवियर कॉलेज के एक स्टूडेंट का रोल दिया गया.
 
इसी तरह पहले इस फिल्म के लिए आय़शा जुल्का की जगह साउथ की हीरोइन गिरिजा शेट्टर को चुना गया था, एक गाना भी शूट हुआ. लेकिन उसको इंगलैंड शिफ्ट होना था, उसने कहा कि जल्द फिल्म की शूटिंग खत्म कर दो, जो कि मुमकिन नहीं था, तो फिर आयशा जुल्का को उसकी जगह लिया गया और फिर से उस गाने की शूटिंग आयशा के साथ की गई. हालांकि सबसे पहले नगमा को एप्रोच किया गया था, लेकिन नगमा ने दो हीरोइंस वाली मूवी में काम करने से मना कर दिया था. इसी तरह आमिर के बड़े भाई के रोल में मार्मिक से पहले आदित्य पांचोली को साइन किया गया था. इसी तरह पूजा बेदी के रोल के लिए पहले माला सिन्हा की बेटी प्रतिभा सिन्हा को साइन किया गया था, उसके बाद एक मॉडल करिश्मा को लिया गया, लेकिन आखिरी मोहर पूजा बेदी के नाम पर लगी.
 
सबसे दिलचस्प बात कि जिस अमोल गुप्ते से फिल्म तारे जमीन पर को लेकर आमिर खान की तनातनी हुई थी वो इस फिल्म में रेस एनाउंसर के रोल में थे. 1993 में जो जीता वही सिकंदर को फिल्म फेयर में बेस्ट फिल्म का अवॉर्ड भी मिला था. इस फिल्म से एक और चर्चित चेहरे ने अपना बॉलीवुड कैरियर शुरू किया था, वो थी अरशद वारसी की बीवी मारियो गोरेटी. जानी मानी वीजे मारिया आमिर के स्कूल मॉडल स्कूल की डांसिंग टीम में जवां हो यारो गाने में नाचती दिखी थीं. लोग तब भी चौंके जब कयामत से कयामत तक में सुपर हिट म्यूजिक देने के वाबजूद मंसूर खान ने इस फिल्म के लिए नई संगीतकार जोड़ी जतिन ललित की साइन कर ली, लेकिन उसका फैसला गलत साबित नहीं हुआ. संगीतकार जतिन पंडित हमसे है सारा जहां गाने पर जेवियर कॉलेज की तरफ से फिल्म में नाचते भी दिखे.
 
बाहुबली की तरह मंसूर खान ने भी इस फिल्म को इतना ज्यादा शूट कर लिया था कि इसमें दो फिल्में बन जातीं, लेकिन उस वक्त सीक्वल बनाने की हिम्मत किसी में नहीं थी, इसलिए ढेर सारी सींस कट कर दिए गए थे. ये कहा जाता है कि मंसूर जो जीता वही सिकंदर को कयामत से कयामत तक से पहले बनाना चाहते थे लेकिन किसी वजह से इरादा बदलना पड़ा. हालांकि उनकी शुरूआती तीनों फिल्मों में पिता नासिर हुसैन की ही तरह मजरूह सुलतानपुरी ने ही गाने लिखे. ये अलग बात है कि ये आखिरी फिल्म थी जिसे नासिर हुसैन ने प्रोडयूस किया था. अब आखिर में एक और दिलचस्प बात, अगर आपने फिल्म देखी होगी तो अधिकतर सींस में आयशा जुल्का को एक रेड कैप पहने पाएंगे, उसकी वजह ये थी कि आयशा के माथे पर चोट लग गई थी और नई हीरोइन लेने पर फिर से सींस शूट करने पड़ते, तो आइडिया आया कि क्यों ना यूथ फिल्म हैं तो हीरोइन को कैप पहना दी जाए, आयशा उस कैप में क्यूट भी लगीं, ऑडियंस को पता भी नहीं लगा और फिल्म भी सुपर डुपर हिट हो गई.