पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल राहिल शरीफ का कार्यकाल बढना तय-सा लग रहा है. भारत के साथ पाकिस्तान का जो मौजूदा रिश्ता है, वो जनरल शरीफ के लिये बहुत मुफीद है. हालात जितने नाज़ुक रहेंगे, नए चीफ को कमान न देने का दबाव नवाज़ शरीफ पर उतना ही ज्यादा रहेगा. 
 
लिहाज़ा जनरल राहिल शरीफ को जबतक उन्हें एक्सटेंशन नहीं मिल जाता, तबतक वे भारत के साथ युद्द अब-हुआ, तब-हुआ सा माहौल बनाए रखेंगे. वैसे, नवाज़ शरीफ चाहते नहीं है कि वे राहिल की मियाद बढाएं, क्योंकि राहिल में शरीफ को जनरल मुशर्रफ दिखने लगे हैं. मुशर्रफ को बतौर जनरल इन्हीं नवाज शरीफ ने एक्सटेंशन दिया था, लेकिन मुशर्रफ ने शरीफ का तख्ता पलट दिया. 
 
राहिल कैसे बने सेना प्रमुख
जनरल राहिल शरीफ को नवाज ने कई सीनियर अफसरों को दरकिनार कर सेना प्रमुख बनाया और इसकी कुछ वाजिब वजहें थीं. पहली ये कि राहिल पंजाब से हैं, उनके पिता और नवाज़ के पिता एक-दूसरे के करीबी हैं. और सबसे बड़ी बात, राहिल पीएमएल-एन नेता अब्दुल क़ादिर बलोच के बहुत बड़े विश्वासपात्र रहे हैं. 
 
राहिल की बढ़ रही है लोकप्रियता
लेकिन हाल के कुछ साल में उत्तरी पश्चिमी पाकिस्तान में आतंकियों के खिलाफ सेना की जो मुहिम चली है, उसने राहिल शरीफ को पाकिस्तान में काफी लोकप्रिय बना दिया है. खुद नवाज़ शरीफ की पार्टी के कुछ धाकड़ नेता उनपर इस बात के लिये दबाव बनाने लगे हैं कि जनरल राहिल की मियाद बढा दी जाए. आज के हालात में जनरल राहिल के जनवरी में दिए उस बयान को सामने रखना नासमझी होगी जिसमें उन्होंने खुद कहा था कि वे अपना कार्यकाल बढाना नहीं चाहते. 
 
नवाज शरीफ को राहिल से लग रहा है डर
जनरल राहिल २०१३ में सेना प्रमुख बनाए गए और २०१४ में पनामा पेपर लीक को लेकर इमरान खान और उनकी पार्टी तहरीके इंसाफ ने नवाज़-खानदान को ऐसा घेरा कि सरकार की साख को काफी धक्का पहुंचा. उधर राहिल, आतंकवाद के खिलाफ़ फौज की मुहिम को इतना तेज़ कर चुके थे कि २०१५ के दूसरे हिस्से में आते-आते, समूचे पाकिस्तान में उनकी इमेज मसीहा जैसी होने लगी. नवाज़ शरीफ़ को ये बात खटकने लगी और उनके मन में कहीं-ना-कहीं ये डर घर करने लगा कि अगर राहिल शरीफ का क़द यूं ही बढता रहा तो हो सकता है वे एक और तख्तापलट का शिकार हो जाएं. 
 
मुशर्रफ भी जनरल राहिल के साथ
ऊपर से पिछले साल सितंबर में जनरल परवेज़ मुशर्रफ ने राहिल के कार्यकाल को बढ़ाने की पुरज़ोर वकालत कर नवाज़ के कान खड़े कर दिए. दरअसल मुशर्रफ, राहिल शरीफ के बड़े भाई शब्बीर शरीफ के दोस्त हैं और मुशर्रफ की तरह फौज के बहुत सारे अफसर हैं जो शब्बीर शरीफ के चलते जनरल राहिल शरीफ से एक जज्बाती लगाव रखते हैं. 
 
शब्बीर शरीफ पाक फौज के बेहद तेज़-तर्रार अफसर माने जाते थे और वे १९७१ के युद्द में भारतीय फौज के हाथों मारे गए. उन्हें बाद में पाकिस्तान का सबसे बड़ा सैनिक सम्मान निशान-ए-हैदर मिला. शब्बीर शरीफ के चलते पाकिस्तानी फौज में राहिल की हैसियत आम सेना प्रमुख से थोड़ी ऊंची है. 
 
इतिहास गवाह है
हाल में उनकी जो लोकप्रियता बढी है, उसने उनको और कद्दावर बना दिया है. ऐसे में ये मान लें कि नवाज़ शरीफ के चाहने भर से राहिल शरीफ अपनी कमान नए जनरल को सौंप देंगे, पाकिस्तान के इतिहास को देखते हुए थोड़ा अटपटा लगता है. अगर ऐसा हो जाए तो पाकिस्तान के ६९ साल के इतिहास में ये पहली बार होगा कि कोई जनरल अपना कार्यकाल पूरा होने पर मौजूदा सरकार के फैसले के मुताबिक अपने उत्तराधिकारी को कमान सौंपेगा. 
 
एक्सटेंशन के बाद ही होता है तख्तापलट
अब तक हुआ ये है कि या तो एक्टेंशन मिला है या फिर तख्तापलट हुआ है. मुशर्रफ को तो एक्सटेंशन मिला ही था, जनरल कियानी को भी मिला था. ऐसे में इस बात के पूरे आसार बन रहे हैं कि जनरल राहिल शरीफ का कार्यकाल नवाज़ शरीफ बढाएंगे. 
 
ये हैं इस बार दावेदार
खुदा-ना-खास्ता ये नहीं हुआ तो फिर बहुत मुमकिन है कि जनरल राहिल शरीफ, उत्तराधिकारी अपनी पसंद का बनाएं और अगर ऐसा हुआ तो फिर ले. जनरल ज़ुबैर महमूद हयात, पाकिस्तानी फौज के अगले प्रमुख हो सकते हैं. इसकी वजह ये है कि जनरल राहिल की तरह जनरल ज़ुबैर का पूरा खानदान फौजी है और उनके तीन भाई आज भी पाक फौज में बहुत ऊंचे ओहदों पर हैं. 
 
नवाज की पसंद है कोई और
इसके अलावा जनरल ज़ुबैर का अनुभव आर्मी चीफ होने के लिये मुफीद है. वे आज की तारीख में रावलपिंडी में सेना मुख्यालय में चीफ ऑफ जनरल स्टाफ है, लेकिन इससे पहले वे स्ट्रैटेजिक प्लान्स डिविजन के प्रमुख थे. लेकिन नवाज़ शरीफ की पसंद ले. जनरल जावेद इक़बाल रामदे हैं और इसका कारण ये है कि जनरल जावेद के परिवार का शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन के करीबी रिश्ता है. खुद जनरल जावेद के परिवार के कई लोग पार्टी में कई बड़े ओहदों पर हैं.
 
राहिल मांग सकते है एक्सटेंशन
वैसे दो नाम और भी नये सेना प्रमुख के तौर पर आ रहे हैं – ले. जनरल इशफाक़ नदीम और ले. जनरल क़मर बाजवा, लेकिन पाकिस्तान के मौजूदा हालात और जनरल राहिल शरीफ के मंसूबों को अगर ठीक से समझा जाए तो वे नवाज शरीफ से एक्सटेंशन लेंगे जरुर. 
 
ये मात्र संयोग नहीं
जनरल राहिल शरीफ का कार्यकाल २९ नवंबर को खत्म हो रहा है और यह महज संयोग नहीं था कि जब नवाज़ शरीफ यूएन में अपना भाषण देने के लिये विमान में थे तब पाकिस्तानी आतंकवादियों ने उरी में हमला किया.
 
इस हमले के पीछे कश्मीर को बतौर मुद्दा गरमाने की मंशा कम थी, भारत को उकसाने की नीयत ज्यादा थी. इसमें अगर किसी को फायदा हो सकता था तो सिर्फ राहिल शरीफ को, क्योंकि उन्हें पता है कि भारत में जो सरकार आज है, वो चुप रहनेवाली नहीं है. आप एक करेंगे तो वो दस करने का फऱमान जारी कर देगी. माहौल बिगड़ेगा, फौज तनेगी, हालात नाज़ुक होंगे और ऐसे में कोई भी हुकूमत नए सेना प्रमुख को लाने का जोखिम नहीं लेगी. इसलिए इंतज़ार कीजिए, जनरल राहिल शरीफ को २९ नवंबर से पहले एक्सटेंशन मिल जाएगा.
 
(ये लेखक के निजी विचार हैं)