भारत में राजनीति की उत्तेजित स्थिति को देखते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा शहर की सड़कों पर पंजीकरण नंबरों के आधार पर वैकल्पिक रूप से वाहन चलाने के लिए गए फैसले को मिल रही अकास्मिक वाहवाही पर किसी को हैरान नहीं होना चाहिए. इस ‘अस्थायी’ उपाय को शुरू करने के कुछ दिनों बाद किए गए अध्ययनों से पता चलता है कि ‘सम-विषम’ उपाय शुरू करने के बाद दिल्ली के प्रदूषण स्तर में कोई खास कमी नहीं आई है. यह तो तय है कि पुरुषों द्वारा चलाए जा रहे ‘सम-विषम’ निजी वाहनों पर प्रतिबंध लगाने से अत्यधिक भीड़भाड़ वाली राजधानी के वातावरण में फैली हुई जहरीली ‘स्मॉग’ की मात्रा कम करने में कोई खास कामयाबी नहीं मिलने वाली.

इस स्मॉग ने दुर्भाग्यशाली शहवासियों के फेफड़ों को इतना कमजोर कर दिया है कि राजधानी में श्वास-संबंधी बीमारियों के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है. राजधानी के रूप में दिल्ली को बरकरार रखने के निर्णय को देखते हुए यह उचित होता कि शहर व इसके आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयों को स्थापित न किया जाए ताकि भीड़ को कम किया जा सके.

 अरविंद केजरीवाल की खांसी और कफ के पीछे एक ऐसा क्रूर सत्ता साधक घात लगाए बैठा है जो एक दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र की कुर्सी पर स्थापित होने का सपना देख रहा है. आम आदमी पार्टी के अस्तित्व के प्रारंभिक दिनों की शिथिल संस्कृति के स्थान पर आज अरविंद केजरीवाल का अपना पार्टी के ऊपर उतना ही मजबूत नियंत्रण है जितना कि सोनिया गांधी का कांग्रेस पर. लेकिन इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता कि नई दिल्ली नगर निगम, पुलिस और डीडीए जैसे दिल्ली-केंद्रित निकायों के मामलों पर अधिकारों की कमी द्वारा लगाई गई बाधाओं के बावजूद, कुल मिलाकर, आम आदमी पार्टी ने कई अन्य राज्य सरकारों की तुलना में खुद को बेहतर रूप से अपराधमुक्त किया है. देश के कई अन्य भागों की तुलना में राजधानी में भ्रष्टाचार की व्यापकता कम और अभिनव विचारों के लिए रुचि अधिक दिखाई पड़ती है. लेकिन यह संघवाद का दुर्भाग्य है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली सरकार का पीछा करने और उसे प्रताड़ित करने का मन बना लिया है और यही उसका एकमात्र लक्ष्य प्रतीत होता है. इस कार्य में गृह मंत्रालय को दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग का उत्साही सहयोग प्राप्त है. अगर नजीब जंग ने नीतिगत पहलों में बाधा उत्पन्न करने में कम समय व्यय किया होता और दिल्ली के नागरिकों को लाभान्वित करने के तरीकों के बारे में सोचने पर अधिक ध्यान केंद्रित किया होता तो आज वह इतने पक्षपाती दिखाई नहीं देते. 2015 विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी की विशाल जीत पर केंद्रीय गृह मंत्रालय और उपराज्याल नजीब जंग जिस तरीके से प्रतिक्रिया दे रहे हैं, उससे मोदी सरकार की छवि खराब हो रही है और केजरीवाल जनता की सहानुभूति बटोरने में लगे हुए हैं.

यह याद रखने की आवश्यकता है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री के साथ पारस्परिक विचार-विमर्श में प्रधानमंत्री ने खुद विधिवत निर्वाचित दिल्ली सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों का समर्थन किया है. यह पहले भी कहा जा चुका है लेकिन इसे दोहराए जाने की आवश्यकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को उनके राजनीतिक शत्रुओं की तुलना में उनके परिकल्पित मित्रों द्वारा कहीं अधिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है.

 आम आदमी पार्टी ने मशहूर बॉलीवुड हस्तियों के बजाय साधारण नागरिकों को अपना शुभांकर बनाने का निर्णय लिया है. जबकि दिल्ली में पुलिस द्वारा जारी किए गए आदेश की उल्लंघन करते हुए एक मोटर चालक को शायद उसकी अंतरात्मा न झकझोरे, लेकिन अपने पुत्र अथवा पुत्री सदृश एक आदर्शवादी किशोर का सामना करना बिलकुल ही अलग मामला है. ऐसे स्वयंसेवकों की तैनाती ने एक ऐसी नैतिक ताकत प्रदान की है जो निश्चित रूप से अमीर व प्रभावशाली वर्ग द्वारा कैमरे के सामने अनमने मन से झाड़ू लगाए जाने वाली तस्वीरों से कहीं बेहतर है. प्रधानमंत्री मोदी का स्वच्छ भारत अभियान एक ऐसी पहल है जो इस देश के बेहतर भविष्य के लिए बेहद अहम है. इस अभियान को कार्यान्वित करने वालों को ‘सम-विषम’ अभियान के प्रति ‘आम आदमी’ के दृष्टिकोण से सीखने की आवश्यकता है. यह उपाय लागू करने के बाद प्रदूषण स्तर में आई कमी एक बहस का विषय हो सकती है, लेकिन इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता कि इस अभियान ने कई नागरिकों को कार में अकेले सवार होने और आयातित र्इंधन को जलाने के बजाय मेट्रो और कार पूलिंग जैसे विकल्पों के बारे में गंभीरता से सोचने पर विवश कर दिया है. समुदाय के प्रति दायित्व की भावना ने दिल्लीवासियों को ‘सम-विषम’ योजना के प्रति आज्ञाकारिता के उच्च स्तरों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है और केवल इसी कारण से इस योजना को 15 जनवरी को समाप्त करने के बजाय इससे भी आगे जारी रखा जाना चाहिए. बेशक, कारों और प्रदूषण फैलाने वाले अन्य वाहनों का विकल्प प्रदान करने के लिए और कदम उठाए जाने की आवश्यकता है जैसे कि और अधिक सड़कों का निर्माण और साइकिलों के लिए विशेष मार्ग सुनिश्चित करना.  भारतीय जनता पार्टी को मशहूर खेल एवं बॉलीवुड हस्तियों से आगे बढ़ते हुए साधारण नागरिक तक पहुंचने की जरूरत है. प्रधानमंत्री की   अपार लोकप्रियता का प्रमुख कारण यह भी है कि नरेंद्र मोदी एक साधारण पृष्ठभूमि से हैं और केवल अपने कड़े परिश्रम के बूते पर आज देश के प्रधानमंत्री बने हैं.

(ये लेखक के निजी विचार हैं)