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PULSE: विपक्षी दलों के संघर्ष से जनता के मुद्दे गायब!

नई दिल्ली. हमारे संविधान के अनुच्छेद 23 और 24 में नागरिकों को अत्याचार, शोषण, भेदभाव और कुरीतियों से बचाने की व्यवस्था बना, समानता का अधिकार दिया गया था। इसमें सकारात्मक रक्षात्मक समानता की व्यवस्था की गई है। देश की आजादी....Read More

Pulse : अति न्यायिक सक्रियता और सुस्ती क्यों?

नई दिल्ली. हम पिछले दो दशकों से लगातार न्यायिक सक्रियता और उसकी सुस्ती को देख रहे हैं। अचानक अदालतें किसी बात पर काफी सक्रिय हो जाती हैं, तो कभी संकट गुजरने के बाद जागती हैं। कभी वे इतनी सुस्ती से....Read More

Pulse: कर्ज और दर्द से कराहते हमारे किसान

नई दिल्ली. किसानों के आंदोलन का इतिहास ईस्ट इंडिया कंपनी के राज में शुरू हुआ, तो थमा ही नहीं। मुगल सल्तनत हो या राजे रजवाड़ों का वक्त, किसानों का उत्पीड़न नहीं होता था। अंग्रेजी हुकूमत में मनमानी खेती कराने और....Read More

Pulse: नेहरू की विदेश नीति से ही लौटेगा सम्मान

देश जब अंग्रेजी हुकूमत से आजाद हुआ, तब हम हर तरह से बदहाल राष्ट्र थे। देश की जीडीपी कुल 1.3 अरब डॉलर थी, जिसकी हिस्सेदारी दुनिया की अर्थव्यवस्था में 3.9 फीसदी थी। जीडीपी 1.8 फीसदी की दर से बढ़ रही....Read More

Pulse: महामारी से भी ज्यादा खतरनाक है बेरोजगारी !

यूपी के फतेहपुर जिले के हथगाम में एक युवक ने फांसी लगा आत्महत्या कर ली। पति की मौत से सदमें में उसकी नवविवाहिता ने भी चार दिन बाद खुदकुशी कर ली। युवक मुंबई स्थित एक कंपनी में कार्यरत था। महामारी....Read More

Pulse : मक्कार जनता देश को अंधकार में ले जाती है

आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र का वर्णन करते हुए कहा है कि जब जनता मक्कारीपूर्ण कार्य करती है, तब राज्य, राजा सहित सभी को उसका भुगतान करना पड़ता है। उनका श्लोक “राजा राष्ट्रकृतं पापं राज्ञ: पापं पुरोहित:। भर्ता च स्त्रीकृतं....Read More

किसान समस्या नहीं, समाधान हैं

कोरोना महामारी के दौर में जब चंद पूंजीपति, सत्तानशीन सियासी दल और नौकरशाही को छोड़कर पूरा देश रो रहा था, तब हमारे किसानों की उपज ने, न सिर्फ देशवासियों का पेट भरा बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी बचाने में....Read More

रचनात्मक नीतियां अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगी

सांख्यिकी मंत्रालय ने मंगलवार को जीडीपी के आकड़े जारी कर खुशखबरी दी कि मौजूदा वित्तीय वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर 20.1 फीसदी रही। सरकार ने इसे बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश....Read More

सहिष्णुता हमारी ताकत रही है, हिंसा नहीं

नई दिल्ली. दिसंबर 2015 को साबरमती आश्रम में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने कहा था, कि गंदगी सड़कों पर नहीं, हमारे दिमाग में है। गंदगी उन विचारों में है, जो समाज को 'उनके' और 'हमारे', 'शुद्ध' और 'अशुद्ध', के बीच....Read More

कौन समझेगा हमारी आवाम का दर्द?

हमें अपने पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का आजादी की रात का भाषण याद है। उन्होंने तब कहा था “भविष्य में हमें आराम नहीं करना है। न चैन से बैठना है बल्कि लगातार कोशिश करनी है। इससे हम जो....Read More

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