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लंगड़ा, चौसा, दशहरी, सफेदा सब एक साथ… 55 साल पुराने एक पेड़ पर उग आए 234 किस्मों के आम; जानिए कैसे हुआ ये अजूबा!

लखनऊ में एक ऐसे पेड़ इजाद किया गया है, जिस पर आश्चचर्यजनक तरीके से एक साथ 234 वैरायटी के आम यानी दशहरी, लंगड़ा, चौसा, सफेदा, बैगनपल्ली, तोतापरी और भी कई सारे आम लहलहा रहे हैं. आम के पेड़ की उम्र 50 साल बताई जा रही है, जो कुदरत का करिश्मा नहीं, बल्कि साइंस का चमत्कार है-

By: Kajal Jain | Last Updated: May 24, 2026 5:33:46 PM IST



शायद आपने सपने में देखा होगा कि एक ही पेड़ पर कई सारे फल लटक रहे हैं. कुछ लोग तो ये इमेजिन भी हीं कर पाते, लेकिन भारत के वैज्ञानिकों ने असलियत में एक ही पेड़ पर 234 तरह के आम उगा दिए हैं. जी हां, सुनने में आपको किसी फेयरीटेल का जादुई किस्सा लग रहा होगा, लेकिन लखनऊ आइए! यहां आप अपनी आंखों से देख सकेंगे कि कैसे एक ही पेड़ पर दशहरी, चौसा, लंगड़ा, तोतापरी और सफेदा समेत पूरे 234 वैरायटी के आम एक साथ लटक रहे हैं. इस आम की उम्र 55 साल बताई जा रही है, जो एक विशेष तकनीक से तैयार किया गया है. ताज्जुब की बात ये है कि सिर्फ आम की वैरायटी दिखने में अलग नहीं है, बल्कि स्वाद से लेकर बनावट तक सब कुछ असली आमों की वैरायटी जैसा है.

कहां हुआ ये चमत्कार?

सबसे पहले तो आपको बता दें कि एक ही पेड़ पर सैंकड़ों वैरायटी के आमों का उगना कोई चमत्कार नहीं, बल्कि उन्नत कृषि की ग्राफ्टिंग तकनीक का कमाल है. जी हां, ग्राफ्टिंग तकनीक से भारत के ही वैज्ञानिकों ने कुछ समय पहले ब्रिमेटो पौधा उगाया था, जिससे बैंगन और आलू एक साथ उगते हैं. अब बागवानी संस्थान के कृषि वैज्ञानिकों ने अपनी बरसों की मेहनत से एक और अजूबा इजाद कर दिया है.

कैसे तैयार किया आम का पेड़?

जैसा कि हमने बताया कि आम की उम्र 50 साल है, जिसे बागवानी में बूढ़ा पेड़ भी कहते हैं. इस पेड की हाइड करीब 52 फीट है, लेकिन पत्तियां और शाखाएं एक दम मजबूती के साथ खड़ी हैं. वैज्ञानिकों ने बताया कि ये आम का पेड़ 50 से 55 साल पुराना है, जिसमें’प्रूनिंग’ यानी कटाई-छंटाई के जरिए 16 फीट का किया गया और फिर शुरू हुआ असली खेल. इस पेड़ पर’ग्राफ्टिंग’तकनीक के जरिए देश के अलग-अलग कोने से लाई गई आम की वैरायटीज की टहनियां पेड़ से अलग विशेष विधि के जरिए जोड़ी गईं. हैरानी की बात तो ये है कि मात्र 16 महीने की देखभाल के बाद पेड़ की टहनियों पर अलग-अलग किस्म के हरे-पीले-नारंगी रंग के आम लहलहाने लगे.

खाने में लजीज – कमाई में अजीज

जैसा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहां भूमि का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ खेती के लिए इस्तेमाल हो रहा है. यहां किसान सिर्फ अनाज ही नहीं, फल, सब्जियां, मसाले आदि सब कुछ उगाते हैं, जो शायद बहुत कम देशों की क्षमता है. ऐसे में ग्राफ्टिंग जैसी तकनीकें किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है. यहां जानिए कैसे-

कम जगह, ज्यादा मुनाफा: ग्राफ्टिंग तकनीक से आज कई प्रगतिशील किसान मुनाफा ले रहे हैं. यदि ये तकनीक सही तरीके किसानों तक पहुंचाई जाए तो वो अपनी छोटी-सी जमीन पर बागवानी करके एक साथ कई वैरायटी उगा पाएंगे.

जल्दी पैदावार: आम के पारंपरिक बागों में एक पेड़ से सिर्फ एक ही वैरायटी का आण मिलता है, जबकि पेड़ों को ग्राफ्टिंग से सुधार दिया जाए तो 16 महीनों में नजारा कुछ और ही होगा.

बाजार की मांग: बाजार में लोकल वैरायटी के आम को सही दाम पर मिल जाते हैं, लेकिन दूसरे राज्यों की वैरायटी के आम काफी महंगे दाम पर मिलते हैं, जिसके पीछे कारण है डिमांड, ट्रांसपोर्टेशन और भी चीजें. लेकिन सोचिए जब लगभग वैरायटी एक ही पेड़ पर उगने लगेंगी तो बाजार मांग और कीमतें भी बैलेंस हो जाएंगी. 

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Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. inkhabar इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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