Nautapa 2026: भारत में मई-जून की भीषण गर्मी में पारा 40 डिग्री के पार हो जाता है. इन दो महीनों में गर्मी अपने सबसे पीक लेवल पर होती है, जिसे जेठ की गर्मी भी कहते हैं. इसमें भी 9 दिनों की गर्मी सबसे खतरनाक बताई जाती है, जिसे ज्योतिष शात्र में नौतपा कहा गया है. ये सूर्य देव के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करने पर होता है. इस साल नौतपा 25 मई से 6 जून तक चलने वाला है. ये वो समय होगा, जब धरती पर सूरज की किरणें डायरेक्ट पड़ेगी. इस समय तापमान इतना ज्यादा होता कि हीट स्ट्रोक से लेकर तमाम बीमारियों का खतरा भी बना रहता है.
नौतपा को लेकर मान्यताएं?
नौतपा को लेकर शास्त्रों में कुछ मान्यताएं भी हैं. ऐसा कहा जाता है कि यदि नौतपा में गर्मी तेज पड़ती है तो मानसून में अचछी बारिश होती है. इसे खेती के लिहाज से भी काफी अहम मानते हैं, क्योंकि 9 दिन की तेज गर्मी समंदर से बादल बनाती है, जिसके बाद मानसून आते ही खरीफ की फसलों में अपने आप बारिश का पानी लग जाता है.
क्या कहते हैं साइंटिस्ट?
नौतता को लेकर वैज्ञानिक और शास्त्रों के तर्क काफी अलग हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि मात्र 9 दिन की गर्मी से पूरे मानसून का आकलन नहीं कर सकते, क्योंकि कई बार नौतपा की तेज गर्मी के बावजूद मानसून काफी लेट हुआ है, जबकि बाकी सीजन में बारिश सामान्य रहती है.
कब शुरू हुआ नौतपा?
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में नेशनल अवॉर्डी विज्ञान प्रसारक सारिका घारू बताती हैं कि सूर्य की 365 दिन की परिक्रमा को पूरा करने के बाद पृथ्वी दोबारा अपनी परिक्रमा चालू कर देती है, जबकि सूर्य के रोहिणी तारा आ जाता है. इसलिए मध्य भारत में गर्मी के वो 9 सबसे भीषण दिन चालू हो जाते हैं. उन्होंने बताया कि वैसे तो सन् 1000 में 11 मई को इसकी शुरुआत हो गई थी, जिसके बाद सन् 1200 में 13 मई और सन् 1400 में 17 मई को नौतपा चालू हुआ था. अंदाजा लगाया जाा है कि एक हजार साल पहले मध्य भारत में तीव्र गर्मी को नौतपा कहा गया होगा.
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