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Zero Civic Sense Hack: अब खुले में पेशाब करने वालों को दिखेगा ‘आईना’, 2026 के इस जुगाड़ के लिए नोबल प्राइज की सिफारिश तेज!

मैसूर में बस स्टैंड के पास 'यहां पेशाब करना मना है' या 'दंडनीय अपराध है' का बोर्ड देखकर भी लोग खुले में हल्के हो रहे थे, जिससे पब्लिक प्लेस की गंदगी बढ़ती जा रही थी, लेकिन अधिकारियों ने लोगों के इस जीरो सिविक सेंस से निपटने का ऐसा तरीका खोज निकाला कि खुले में पेशाब करने वाले ढीठ लोग भी शर्म से पानी-पानी हो जाएंगे. सोशल मीडिया पर इस फैसले की काफी सराहना हो रही है.

By: Kajal Jain | Published: May 7, 2026 10:15:10 AM IST



भारत के लगभग हर बस स्टैंड या रेलवे स्टेशन के बाहर ऐसा कोना जरूर होता है, जहां लोग चुपचाप हल्के होने जाते हैं. इस तरह की गतिविधियां रोकने के लिए ‘यहां पेशब करना मना है’ या ‘यहां पेशाब करना दंडनीय अपराध है’ जैसे पोस्टर भी लगवाए जाते हैं, लेकिन लोगों का सिविक सेंस देखिए लोग उसी जगह को सबसे ज्यादा गंदा करते हैं, जहां ऐसी चेतावनी लिखवाई जाती हैं. ऐसी ही समस्या से मैसूर सिटी कॉर्पोरेशन तंग आ चुका था, जहां बस स्टैंड के करीब ज्यादातर जगह गंदगी और बीमारी का अड्डा बनती जा रही थी, लेकिन अधिकारियों की सूझबूझ देखिए, जहां लोग सबसे ज्यादा लापरवाही करते थे, वहीं दीवारों पर ‘स्टेनलेस स्टील के मिरर’ लगा दिए. ये आइडिया मैसूर में ‘शीशे की दीवार’ के नाम से फेमस हो रहा है. 

लोगों ने की जमके तारीफ 

मैसूर सिटी कॉर्पोरेशन का ये आइडिया लोगों को काफी पसंद आ रही है. सोशल मीडिया पर लोग तेजी से वीडियो को शेयर कर रहे हैं और अधिकारियों के नए शेम हैक की तारीफों के पुल बांध रहे हैं. सोशल मीडिया पर वायरल एक ऐसी ही वीडियो में यूजरने प्रतिक्रिया दी है कि ये जिसका भी आइडिया है नोबल पुरस्कार का हकदार है.

इस वीडियो पर एक यूजर ने कमेंट किया कि शीशे पर पैसा खर्च करने से अच्छा है कि पास में पब्लिक टॉयलेट बनवा दिया जाए, जिसके जवाब में भी कमेंट किया गया है, जिसमें लिखा है कि बस स्टैंड के पास जहां शीशे लगवाए गए हैं, वहां पहले से एक पब्लिक टॉयलेट है. इसके बावजूद लोग जीरो सिविक सेंस अपना रहे हैं.

क्यों लगवाए शीशे

मैसूर प्रशासन के इस ठोस कदम को लोग  शेम हैक भी कह रहे हैं. इस कार्यवाही के पीछे प्रशासन का मानना है कि जब लोग शीशे के सामने खड़े होंगे तो उन्हें अपने आप पर शर्म आ जाएगी और वो ऐसा काम नहीं करेंगे. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये आइडिया व्यवहारिक विज्ञान की नज थ्योरी का हिस्सा है, जिसके मुताबिक, ऐसी हरकतें करते वक्त जब इंसान खुद को आईने में देखता है तो पब्लिक शेम और सेल्फ अवेयर गलत काम करने से रोक देती है.

हालांकि ऐसा एक एक्सपेरिमेंट साल 2020 में बैंगलुरु में भी किया गया, जिसके मिले-जुले नतीजे थे. अब देखना ये है कि मैसूर सिटी कॉर्पोरेशन का ये मास्टरस्ट्रोक काम करता है या नहीं?

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Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. inkhabar इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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