नई दिल्ली. ऊर्जावान, मिलनसार और सौहार्दपूर्ण आचरण के साथ साथ आतुरता (व्याकुलता) की भावना से ओतप्रोत होने के बाबजूद, हर क्षण मेरे लिए चिंतित रहने वाले पितृतुल्य और विशुद्ध प्रेम की मूर्ति सुबास गंतायत जी का उनकी कर्कश आवाज के साथ मैं आज भी स्मरण करता हूं। वे मूल रूप से ओडिशा से थे, लेकिन नियति ने गुजरात के सूरत शहर को उनका निवास स्थान और कर्मभूमि के रूप में चुना था। अभी इस आलेख को लिखते समय भी उनकी वही कर्कश आवाज मेरे कानों में गूंज रही है।

जहां तक सार्वजनिक जीवन में उनकी सक्रियता की बात है, तो वे भाजपा की ओडिशा इकाई के राज्य कार्यकारिणी सदस्य थे, आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी की सरकार द्वारा लागू किए गए दुर्दांत नियम मीसा (Maintainance of Internal Security Act) के तहत बंदी बनाये गए थे, लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय सचिव, छात्र संगठन एबीवीपी के ओडिशा राज्य के पूर्व राज्य सचिव और सूरत ओडिया वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष भी थे। पेशेवर रूप से उनका कद बहुत बड़ा था, जिसके तहत उन्होंने रिलायंस और अडानी जैसे विशाल औद्योगिक घरानों में वाइस प्रेजिडेंट-कॉर्पोरेट अफेयर्स के पद से अपनी सेवानिवृति ली थी।

वास्तव में वे गुजरात में ओडिशा का चेहरा थे। 20 जून की सुबह उनके देहवसान के बाद से ही देश भर से और पार्टी के सभी स्तरों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ साथ अन्य प्रतिष्ठित सरकारी अधिकारियों से शोक संदेशों की वर्षा होने लगी थी। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा जैसे प्रसिद्ध नेता, भारत सरकार के केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी और एमएसएमई राज्य मंत्री श्री प्रताप सारंगी, भुवनेश्वर की सांसद अपराजिता सारंगी, भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस और इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और जनजातीय मामलों के पूर्व केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम जैसे देश के बहुत से प्रतिष्ठित लोग इस कद्दावर व्यक्तित्व के निधन से अत्यंत दुखी और शोकाकुल थे और सभी ने इस दुखद घड़ी पर अपनी समवेदनाएं भी व्यक्त की थी।

मेरे हृदय में बहुत गहरी वेदना होती है क्योंकि मैंने न केवल एक संरक्षक, पितातुल्य व्यक्तित्व और एक घनिष्ठ मित्र को खोया है, बल्कि एक ऐसे रत्न रूपी व्यक्तित्व को भी खो दिया है जिसने अपनी राजनीतिक पार्टी और ओडिशा के लोगों के उत्थान के लिए अनथक परिश्रम और समर्पण भाव से दिन रात काम किया है। यहां मैं अपनी यादों को प्रतिबिंबित करते हुए इस महान व्यक्तित्व को अपनी भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।

उनकी पार्टी के लिए अपूरणीय और अभूतपूर्व क्षति

भाजपा की ओडिशा राज्य इकाई के वरिष्ठ नेता के निधन से हर कोई बेहद दुःखी और शोकाकुल है। यह निश्चित रूप से पार्टी और पूरे देश के लिए एक अपूरणीय और अभूतपूर्व क्षति है। गंतायत जी के देश के कई बड़े राजनीतिक नेताओं और हस्तियों के साथ लंबे समय से घनिष्ठ और व्यक्तिगत संबंध थे। वे उदार (दयालु), निष्पक्ष और निस्वार्थ भाव से कार्य करने वाले व्यक्तित्व थे। एबीवीपी में सक्रिय रूप से काम करते समय से ही उनके साथ कई राजनेताओं के प्रगाढ़ संबंध थे। उनके साथ संजोये गए अद्भुत संस्मरण हमेशा याद किए जाएंगे।

संरक्षण के लिए एक जुनून

वे ओडिशा में भाजपा पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। ओडिशा को देश का नंबर-1 राज्य बनाने के सपने और दृष्टिकोण (विजन) के साथ वे लगातार प्रयासरत रहे और उन्होंने गुजरात में ओडिया लोगों का प्रतिनिधित्व करने के लिए अथक परिश्रम भी किया। उन्होंने गुजरात में भी भाजपा के हित में पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। उन्होंने गुजरात में भी ओडिशा, इसकी संस्कृति और वहां के लोगों का बड़े स्तर पर प्रतिनिधित्व किया।

संकटकाल में उनकी शांति और धीरज विरोधाभासी जैसा था

मैं गंतायत जी को एक सज्जन, दयालु और स्नेही व्यक्ति के रूप में स्मरण करता हूँ, जिन्होंने जीवन और उसकी राह में आने वाली सभी चुनौतियों का धैर्य के साथ सामना किया। वह एक बुद्धिजीवी व्यक्ति थे, जिन्होंने बहुत कम आयु में ही अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी और इस आशा के साथ इसकी सफलता के लिए कड़ा परिश्रम किया था कि इससे उनके देशवासियों का भला होगा। हालांकि उनका व्यवहार बेचैनी अथवा आतुरता से भरा हुआ था, परन्तु, उनकी सबसे अच्छी विशेषता (गुण) यह थी कि वे संकट के समय में धैर्य बनाये रखने में सफल रहते थे जबकि मेरे जैसे दूसरे लोग खुद को बचाए रखने के लिए संघर्ष करते थे।

प्रेरणादायक समाजसेवी व्यक्तित्व

गंतायत एक प्रेरणादायक समाजसेवी और कार्यकर्ता थे, जिनके मन में काम करते समय हमेशा परहित्त के ही विचार चलते रहते थे। जब मैं एबीवीपी का कार्यकर्ता था मुझे उनके मार्गदर्शन में कार्य करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। वे मेरे लिए पितातुल्य थे। मैं गंतायत जी द्वारा प्रदर्शित मार्ग का सदैव अनुसरण करूंगा और उनके पास समस्या को न देखते हुए उसके समाधान को देखने या ढूंढने की उनकी क्षमता और गुण को सदैव स्मरण रखूंगा। अभी हाल ही में अप्रैल 2021 में, भाजपा की राज्य इकाई एकत्र आई थी और उसने राज्य को नंबर-1 बनाने का आवाहन किया था। पार्टी ने गंतायत जी सहित राज्य में अपने तीन संस्थापक नेताओं को सम्मानित भी किया था।

“आपके द्वारा सामाजिक क्षेत्र में दिए गए समय ने हम सभी पर एक गहन प्रभाव निर्मित किया है और आपको सदैव स्मरण किया जाएगा। आपका कोटिशः धन्यवाद और हम आपको बहुत ज्यादा याद करते हैं। ”

युवराज पोखरना सूरत के एक इंजीनियर हैं जो शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। इसके साथ ही युवराज सोशल मीडिया, राजनीति और सरकारी नीतियों सहित समसामयिक मुद्दों पर गहरी नजर और पकड़ रखते हैं।

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