नई दिल्लीः भारत-फ्रांस के बीच हुए राफेल लडाकू विमानों के सौदे को लेकर हमला बोलते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए इस सौदे में उनकी व्यक्तिगत संलिप्तता का आरोप लगाया और कहा कि पीएम मोदी ने सौदे को एकतरफा अंतिम रूप देते देते हुए रक्षा खरीद के सभी नियमों को ताक पर रखा और राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता किया है. उन्होंने केंद्र सरकार पर देश के सबसे बड़े घोटाने में प्रधानमंत्री की संलिप्तता को छिपाने का भी आरोप लगाया और कहा कि उन्होंने जो भी स्पष्टीकरण दिया, उसने सरकार को झूठ के जाल में फंसाने का काम किया है. उन्होने कहा कि यूपीए सरकार के समय हुए सौदे को पलटने का कोई अधिकार पीएम मोदी के पास नहीं था. अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा ने यह बातें एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहीं.

संवाददाता सम्मेलन में यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी पूरी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर हमलावर रहे और राफेल से लेकर नोटबंदी तक, ब्लैक मनी से लेकर पेट्रोल डीजल की बढ़ती कीमतों तक हर विषय पर तीखे सवाल पूछते हुए निशाना साधा है. जिसमें अरुण शौरी ने कहा कि इस सौदे में छिपाने लायक या सीक्रेट कुछ भी नहीं है ये सौदा जैसा यूपीए के वक्त था वैसा ही एनडीए के वक्त है. उन्होंने कहा कि जितना भी काला धन है वो बैंक में किसी न किसी के खाते में मौजूद है. जिसके बाद उन्होंने नोटबंदी पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी सरकार की नोटबंदी बुरी तरह फ्लॉप रही और इसमें ब्लैक मनी को सफेद किया गया है.

दूसरी तरफ अरुण शौरी ने प्रधानमंत्री पर डिफेंस प्रोक्योरमेंट पॉलिसी का पालन नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस बात में कोई शक नहीं है कि पीएम मोदी ने डिफेंस प्रोक्योरमेंट पॉलिसी का पालन नहीं किया और उसकी कीमतों को लेकर बयान दिया. क्योंकि अगर ये डील गुप्त थी तो इसकी कीमत संसद में कैसे बता दी गई. उन्होंने देश पीएम मोदी पर देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि डील 126 विमानों की थी तो उसमें से 36 विमान ही खरीदना देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करना है. उन्होंने कहा एक तरफ सरकार कह रही है कि इन लड़ाकू विमानों की जल्द से जल्द जरूरत है लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पहला लड़ाकू विमान 2019 और बाकी 2022 तक देश में आएंगे.

जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील प्रशांत भूषण ने सरकार को राफेल सौदे पर घेरते हुए कुछ सवाल दागे और कुछ बातें सामने रखीं जिसमें उन्होंने कहा, राफेल को लेकर जो टेंडर 2007 में जारी किया गया था उसमें 126 राफेल खरीदने की बात कही गई थी और पीएम मोदी की केंद्र सरकार ने भी पुराने सौदे पर ही बात करी थी लेकिन 10 तारीख की सुबह कुछ और था और शाम को नई डील हो गई जिसमें 126 की बजाय सिर्फ 36 विमान कर दिए गए. उन्होंने कहा कि इस डील के बारे में सिर्फ अनिल अंबानी को ही पता था लेकिन रक्षा मंत्री को इस बात का पता नहीं था कि 126 विमानों की डील को पीएम ने 36 पर कैसे कर दिया.

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