नई दिल्ली. इबोला, एएसआरएस और जीका वायरस के बाद एक और जानलेवा बीमारी दुनिया पर मंडरा रही है. इस बीमारी के बारे में दुनिया के मशहूर डॉक्टर और साइंटिस्ट भी अभी नहीं पता लगा पा रहे हैं लेकिन इससे दुनिया के करोड़ों लोगों पर खतरा मंडरा रहा है. वर्ल्ड हैल्थ ऑर्गेनाइजेशन (डब्लू एचओ) के वैज्ञानिकों ने इस बीमारो को वैश्विक महामारी की लिस्ट में रखा है. इसका नाम डिजीज एक्स नाम दिया गया. साथ ही इसके खतरे के बारे में वैश्विक अलर्ट जारी किया गया है.

डिजीज एक्स के कारण और लक्षणों के बारे में अभी पता नहीं चल पाया है. पहले इसे खतरे की सूची से बाहर रखा गया था ताकि इसके कारणों और लक्षणों के बारे में पता लगाया जा सके लेकिन उस समय इसके कारण कोई समस्या नहीं हुई थी. जेनेवा में हर साल बीमारियों पर चर्चा के बारे में एक मीटिंग बुलाई जाती है. इस साल हुई मीटिंग में वैज्ञानिकों ने मान लिया कि वे इस बीमारी के बारे में नहीं जानते.

इस बीमारी के बारे में कहा गया है कि यह मानव जनित बीमारी है जो कि पर्यावरण से छेड़छाड़ और प्रकृति के दोहन के कारण पैदा हो रही है. इसके बारे में बताया गया है कि जेनेटिक बदलाव किए जाने और युद्ध के लिए जैविक और रासायनिक हथियारों के निर्माण की वजह से यह महामारी पैदा हो रही है. डब्लूएचओ ने शनिवार को चेतावनी देते हुए कहा कि यह वैश्विक फ्लू महामारी कभी भी शुरू हो सकती है. इसे दुनियाभर के 33 लाख लोगों को मारने के लिए सिर्फ 200 दिन लगेंगे. उम्मीद की जा रही है कि दुनियाभर के शोधकर्ता इस महामारी को रोकने के लिए कड़ी मेहनत करेंगे. नॉर्वेजियन वैज्ञानिक और डब्ल्यूएचओ के सलाहकार जॉन-आर्न रोटिंगेन ने द डेली टेलीग्राफ से बातचीत के दौरान कहा कि यह टीके और नैदानिक ​​परीक्षणों में लचीलेपन के महत्व का प्रतिनिधित्व करता है. इसके बारे में यह भी कहा जा रहा है कि डिजीज एक्स स्पेनिश फ्लू और एचआईवी की तरह ही पैदा हो सकती है क्योंकि, जानवरों और इंसानों की बीच संपर्क में काफी बढ़ोत्तरी हुई है. 

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