नई दिल्ली. आज से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र से पहले रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्वदलीय बैठक बुलाई. इस बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि बेरोजगारी के मुद्दे पर भी संसद में चर्चा होनी चाहिए. वहीं कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने आर्थिक मंदी और नौकरियां नहीं होने पर चिंता जताई.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्वदलीय बैठक में कहा कि बेरोजगारी पर भी चर्चा होनी चाहिए. बता दें कि मोदी सरकार नागरिक संसोधन बिल इस सत्र में पेश करेगी जिसका पूर्वोत्तर के राज्यों ने खासा विरोध किया है. 

पीएम मोदी ने कहा कि संसद का मुख्य काम है चर्चा और वाद-विवाद और यह सत्र भी पिछले सत्र की तरह प्रोडक्टिव सत्र होना चाहिए. वहीं संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने संवाददाताओं सेकहा कि सरकार हर मुद्दे पर संसद के नियमों के अंतर्गत चर्चा करने को तैयार है. बता दें कि एनडीए की बैठक में शिवसेना नहीं पहुंची थी. सूत्रों के अनुसार एनडीए की बैठक में पीएम मोदी ने सहयोगी दलों से कहा कि जनता द्वारा दिए गए जबर्दस्त जनादेश का सम्मान करें. प्रधानमंत्री ने सभी सहयोगी दलों को मतभेदों को भुलाकर साथ रहने को कहा.

पीएम मोदी ने कहा, ‘एनडीए काफी बड़ा परिवार है. आइए हम सब मिलकर लोगों की सेवा के लिए काम करें. हमें जनता ने बहुत जबर्दस्त जनादेश दिया है. हमें इसका सम्मान करना है. हम एक तरह की सोच वाले दल हैं भले ही हमारी विचारधाराएं अलग हों लेकिन छोटे-मोटे मतभेदों की वजह से हमें बिखरना नहीं है.’

पहली बार एनडीए से अलग विपक्ष के स्थान पर बैठेगी शिवसेना

बता दें कि पीएम मोदी का यह बयान ऐसे दौर में आया है जब शिवसेना पहली बार बीजेपी के खिलाफ सदन में विपक्ष के खेमे में बैठने जा रही है. महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद के लिए शिवसेना और बीजेपी का 30 साल पुराना गठबंधन टूट गया. मोदी सरकार में शिवसेना के कोटे से मंत्री अरविंद सावंत ने भी इस्तीफा दे दिया. महाराष्ट्र में शिवसेना का एनसीपी और कांग्रेस के साथ सरकार बनाने का इरादा है. लेकिन इस पर अंतिम मुहर सोमवार को एनसीपी प्रमुख शरद पवार और काग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की मुलाकात के बाद ही लग सकेगा. वहीं एनडीए की बैठक के बाद बीजेपी के एक अन्य सहयोगी लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान ने कहा, ‘हम शिवसेना को मिस कर रहे हैं. शिवसेना मीटिंग से अनुपस्थित थी.’

नागरिक संशोधन बिल: विरोध के बावजूद होगा पास?

नरेंद्र मोदी सरकार शीतकालीन सत्र में नागरिकता संशोधन बिल पेश करेगी. इस बिल का विपक्ष काफी विरोध भी कर रहा है. अगर यह विधेयक कानून बनता है तो अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई और पारसी धर्म को मानने वाले अल्पसंख्यक समुदायों को 12 साल की बजाय सिर्फ छह साल भारत में गुजारने और बिना उचित दस्तावेजों के भी भारतीय नागरिकता मिल सकेगी.नॉर्थ ईस्ट के लोग इस बिल का विरोध इस बात पर कर रहे हैं कि इससे इन राज्यों की संस्कृति, भाषा और पारंपरिक विरासत छिन्न भिन्न हो जाएगी.

इन अहम बिलों को भी सदन में पेश करेगी मोदी सरकार

काराधान विधि (संशोधन) अध्यादेश, 2019
इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अध्यादेश, 2019
नाशकजीवमार प्रबंधन विधेयक 2019
बहुराज्य सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक 2019
वायुयान (संशोधन) विधेयक, 2019
कंपनी (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2019
प्रतिस्पर्धा (संशोधन) विधेयक, 2019
दिवाला और शोधन अक्षमता (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2019
गर्भ का चिकित्सीय समापन (संशोधन) विधेयक, 2019
सामुद्रिक दस्युता निवारण विधेयक, 2019
अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण विधेयक, 2019
स्वास्थ्य सेवा कार्मिक और नैदानिक स्थापन विधेयक, 2019
माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण (संशोधन) विधेयक, 2019
आयुध (संशोधन) विधेयक, 2019
किशोर न्याय संशोधन विधेयक, 2019
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2019
राष्ट्रीय नदी गंगा (पुनर्जीवन, संरक्षण और प्रबंधन) विधेयक, 2019
वैयक्तिक डाटा सुरक्षा विधेयक, 2019
औद्योगिक संबंध संहिता विधेयक, 2019

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