लखनऊ: वैवाहिक झगड़ों में आपने कई बार सुना होगा कि कोर्ट ने पति या ससुराल पक्ष से लड़की को गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया है. ये आम बात है लेकिन क्या आपने कभी ऐसा फैसला सुना है कि पत्नी को कोर्ट ने आदेश किया हो कि वो गुजारा भत्ता के लिए पति को पैसा दे? नहीं ना, लेकिन ऐसा हुआ है और ये उल्टी गंगा बही है यूपी के मुजफ्फरनगर में जहां फैमिली कोर्ट ने पत्नी को आदेश दिया है कि वो पति को गुजारा भत्ता के पैसे दे. महिला कानपुर में इंडियन आर्मी से रिटायर हैं, जबकि पति चाय बेचते हैं.

कोर्ट ने महिला को आदेश दिया है कि वो अपनी पेंशन से हर महीने दो हजार रूपये अपने पति को दे. हालांकि महिला के पति कोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं और एक तिहाई पेंशन गुजारा भत्ते के रूप में मांग रहे हैं. पति का कहना है कि वो सात साल से केस लड़ रहे हैं और जितने रूपये कोर्ट ने उन्हें देने का आदेश दिया है उतने तो सिर्फ उनके इलाज पर खर्च हो जाएंगे.

जानकारी के मुताबिक मुजफ्फरनगर के सोहंकार जिले के खतौली में रहने वाले किशोरी लाल की 30 साल पहले कानपुर की रहने वाली मुन्नी देवी से शादी हुई थी. मुन्नी देवी इंडियन आर्मी में चतुर्थ श्रेणी की कर्मचारी थीं जो अब रिटायर हो चुकी हैं. मुन्नी देवी को 12 हजार रूपये पेंशन मिलती है. दोनों पति पत्नी पिछले दस साल से अलग रह रहे हैं. किशोरी लाल ने साल 2013 में गुजारा भत्ता के लिए मुन्नी देवी पर केस किया था जो वो जीत गए हैं.

दोनों के बीच अभी तक तलाक नहीं हुआ है. किशोरी लाल के वकील बालेश कुमार तायल ने बताया कि हिंदू मैरेज एक्ट के सेक्शन-25 के तहत करीब 7 साल पहले ये केस फाइल किया गया था.

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