July 18, 2024
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Delhi: 'जब 370 हटी तब कहां थे केजरीवाल, आज जुटा रहे समर्थन'- केजरीवाल पर उमर अब्दुल्ला की कटाक्ष

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक एवं दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बीजेपी के अध्यादेश के खिलाफ अन्य पार्टियों से समर्थन मांग रहे हैं. अब जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने केजरीवाल पर तंज कसा है.

केजरीवाल ने 370 हटाने का किया था समर्थन- अब्दुल्ला

जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम एवं नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने दिल्ली सीएम केजरीवाल को लेकर कहा है कि, ‘जब घाटी से केंद्र की भारतीय जनता पार्टी ने धारा 370 हटाई तो उस समय अरविंद केजरीवाल कहां थे. उन्होंने उस समय केंद्र सरकार का समर्थन किया था और आज वो अन्य विपक्षी दलों से अध्यादेश के खिलाफ समर्थन मांग रहे हैं.’

सपा अध्यक्ष अखिलेश ने जताया समर्थन

बता दें कि केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ अरविंद केजरीवाल कई विपक्षी दलों के प्रमुख से मिल रहे हैं. हाल ही में दिल्ली सीएम और AAP पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल लखनऊ स्थित सपा कार्यालय में अखिलेश यादव से मिले. महत्वपूर्ण बैठक के बाद केजरीवाल और अखिलेश यादव ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की है. इस दौरान केजरीवाल ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव समर्थन जताने के लिए धन्यवाद कहा.

इन विपक्षी नेताओं से भी की मुलाकात

इससे पहले केजरीवाल ने 22 मई को दिल्ली में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की थी. इसके बाद 23 मई को वे कोलकाता में पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी से मिले थे, फिर 24 मई को केजरीवाल मुंबई पहुंचे, यहां उन्होंने मातोश्री पहुंचकर शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख और पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे से मुलाकात की. 25 मई को AAP संयोजक ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार से उनके मुंबई में स्थित आवास पर मुलाकात की. इसके बाद केजरीवाल ने 27 मई को हैदराबाद में तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर से मुलाकात की थी. फिर 1 जून को चेन्नई में तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन और 2 जून को रांची में हेमंत सोरेन से मुलाकात की थी.

राजधानी में केंद्र सरकार लेकर आई है अध्यादेश

गौरतलब है कि, केंद्र सरकार ने कुछ सप्ताह पहले देर रात अध्यादेश जारी कर सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया, जिसके तहत सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली में ट्रांसफर-पोस्टिंग का अधिकार अरविंद केजरीवाल सरकार को दिया था. अध्यादेश के मुताबिक, दिल्ली में अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग के लिए नेशनल कैपिटल सिविल सर्विसेज अथॉरिटी बनाई जाएगी. इसमें तीन सदस्य- मुख्यमंत्री, दिल्ली के मुख्य सचिव और प्रमुख गृह सचिव होंगे. यह कमेटी बहुमत के आधार पर कोई भी फैसला लेगी. अगर कमेटी में फैसले को लेकर कोई विवाद पैदा होता है तो अंतिम फैसला उपराज्यपाल करेंगे. अब 6 महीने के अंदर संसद में इससे जुड़ा कानून भी बनाया जाएगा.

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