India Not Signing Joining RCEP Deal: नरेंद्र मोदी सरकार ने रीजनल कंप्रेहेंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप (RCEP) समझौते को ठुकरा दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की चिंताओं को देखते हुए और घरेलू उद्योगों के हित को लेकर कोई भी समझौता नहीं करने का निर्णय लिया है. बैंकॉक में आरसीईपी समिट को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आरसीईपी की कल्पना करने से हजारों वर्ष पहले भारतीय व्यापारियों, उद्यमियों और आम लोगों ने इस क्षेत्र के साथ संपर्क स्थापित किया था. हमारे किसानों, व्यापारियों और उद्योगों का काफी कुछ दांव पर है. कर्मचारी और उपभोक्ता हमारे लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज जब हम आरसीईपी के 7 वर्षों की वार्ता को देखते हैं तो वैश्विक आर्थिक और व्यापार परिदृश्य सहित कई चीजें बदल गई हैं. हम इन परिवर्तन को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं, मौजूदा आरसीईपी समझौता आरसीईपी की मूल भावना को पूरी तरह से प्रतिबिंबित नहीं करता है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आरसीईपी समझौते में शामिल नहीं होने के फैसले की सराहना की है.

गृहमंत्री अमित शाह ने अपने ट्वीट में कहा कि आरसीईपी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करने का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मजबूत नेतृत्वक्षमता और राष्ट्रीय हित को सबसे ऊपर रखने के उनके दृष्टिकोण का परिणाम है. यह फैसला हमारे किसानों, लघु उद्योगों, डेयर, मैन्युफेक्चर सैक्टर, फार्मस्टफार्मास्युटिकल, स्टील और केमिकल उद्योग के हित में लिया गया है. इसके साथ ही शाह ने पिछली यूपीए सरकार पर भी निशाना साधा है.

कांग्रेस पार्टी राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्वीट कर कहा है कि भाजपा सरकार पूरे गाजे बाजे के साथ रासेप समझौते के जरिए भारत के किसानों के हित कुचलकर भारत के राष्ट्रीय हित को विदेशी देशों के हवाले करने जा रही थी. देश के किसानों ने पूरी एकता के साथ इसका विरोध किया. प्रिंयका गांधी ने अपने ट्वीट में #किसानोंकीजीत की जीत का इस्तेमाल किया है. बता दें कि इससे पहले कांग्रेस पार्टी ने आरसीईपी समझौते के विरोध में देशभर में आंदोलन करने का ऐलान किया था.

आसियन देशों व भारत के बीच क्षेत्रीय व्यापार आर्थिक भागीदारी (RCEP) समझौते को लेकर इन दिन भारत में राजनीतिक दलों के बीच सियासी संग्राम छिड़ा हुआ है. कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियां और तमाम किसान संगठन आरसीईपी समझौते का विरोध कर रहे हैं. इन सबके बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को थाईलैंड दौरे पर पहुंचे हैं और इस दौरे में इस समझौते को आखिरी रूप दिया जा सकता है. कांग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस समझौते को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बताया है. उन्होंने कहा कि आरसीईपी समझौता भारतीय किसानों, दुकानदारों, छोटे और मध्यम उद्यमियों के लिए बहुत बड़ी मुसीबत बनेगा. कई अर्थशास्त्रियों ने भी आरसीईपी समझौते को भारत के लिए नुकसानदायक बताया है. इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि क्या है आरसीईपी समझौता और क्यों मोदी सरकार इसको लेकर सावधानी से कदम उठा रही है-

जानें क्या है RCEP

आरसीईपी दक्षिण एशियाई देशों के प्रमुख संगठन आसियान के 10 देशों ब्रुनेई, इंडोनेशिया, कंबोडिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, विएतनाम और इसके 6 प्रमुख भागीदार देशों चीन, जापान, भारत, दक्षिणी कोरिया, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच एक मुक्त व्यापार समझौता है. समझौते के फलस्वरूप में इन देशों के बीच पारस्परिक व्यापार में टैक्स में कटौती के अलावा कई तरीके की आर्थिक छूट दी जाएगी. तमाम विरोधाभासों के बीच समझौते के 25 बिंदुओं में से 21 पर सहमति की बात कही गई है.

आरसीईपी में शामिल सभी सदस्य देशों की आबादी 3.4 अरब है और इसकी कुल जीडीपी 49.5 ट्रिलियन डॉलर है जो विश्व की जीडीपी का 39 फीसदी है. रीजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप यानी आरसीईपी पर चर्चा वर्ष 2012 से ही चल रही है और यह एक समझौता वैश्विक राजनीति के परिदृश्य सेल लेकर वैश्विक व्यापार को बदलने की क्षमता रखता है. हालांकि भारत पार्टनर देशों से आने वाले सामान को टैरिफ फ्री रखने समेत इस समझौते के कई बिंदुओं को लेकर पशोपेश में है. इस व्यापाक समझौते में चीनी आयात की भारतीय बाजार में डंपिंग को लेकर भी चिंता जताई जा रही है.कहा जा रहा है कि इस समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद भारतीय बाजार में चीनी वस्तुओं की बाढ़ आ जाएगी.

मोदी सरकार RCEP को लेकर सावधानी से उठा रही है कदम

भारत में आरसीईपी को लेकर लगातार हो रहे विरोध के बीच मोदी सरकार पहले ही जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लिए जाने की बात कह चुकी है. वाणिज्य एंव उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में कहा था कि भारत जल्दबाजी में कोई भी एफटीए यानी मुक्त व्यापार समझौता नहीं करेगा. घरेलू उद्योग के हितों से समझौता किए बिना ही को गठजोड़ किया जाएगा. आरसीईपी के संदर्भ में काफी सारी गलत सूचनाएं हैं. भारत अपनी शर्तों पर एफटीए या व्यापाक भागीदारी समझौता करेगा.

कांग्रेस, विपक्षी दल, किसान संगठन, उद्योग संगठन और आरएसएस से जुड़े संगठन कर रहे हैं RCEP का विरोध

आर्थिक सुस्ती की आहट, निर्यात में कमी, राजकोषीय घाटे में बढ़ोतरी जैसी चिंताओं के बीच क्षेत्रीय व्यापाक आर्थिक भागीदारी (RCEP) का मुद्दा मोदी सरकार के सामने बढ़ी मुश्किल के तौर पर सामने आया है. कांग्रेस विपक्षी दल, किसान संगठन, उद्योग संगठन और यहां तक की आरएसएस से जुड़े स्वेदेशी जागरण मंच जैसे संगठन भी इस RCEP समझौते का विरोध कर रहे हैं. संभवता 4 नवंबर को आरसीईपी का ऐलान होना है. हालांकि बैठक का नतीजा कुछ भी हो, लेकिन सरकार के लिए घरेलू उद्योग जगत की मांगों और समझौते में फायदे देखने वालों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होगा.

कांग्रेस तो आरसीईपी के विरोध में देशभर में आंदोलन छेड़ने का ऐलान कर चुकी है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एके एंटनी ने कहा था कि भारत एक गंभीर आर्थिक संकट और मंदी की ओर बढ़ रहा है. ऐसे माहौल में जिम्मेदार बनने के बजाय सरकार आरसीईपी समझौते पर चर्चा करने में वक्त बर्बाद कर रही है. कांग्रेस नेता जयराम रमेश का सरकार पर आरोप है कि आरसीईपी के मौजूदा मसौदे से राष्ट्रहित को हटा दिया गया है. रमेश ने आरसीईपी को नोटबंदी, जीएसटी के बाज अर्थव्यवस्था के लिए तीसरा संभावित झटका करार दिया है.

Congress Claims Article 370 Dilution: कांग्रेस नेता पवन खेरा का दावा, कांग्रेस ने बिना विवाद के 12 बार अनुच्छेद 370 में किए बदलाव

Delhi NCR North India Air Pollution Smog: वायु प्रदूषण का स्तर बेहद खराब, रोजाना आप पी रहे कई सिगरेट का जहर, दिल्ली- एनसीआर, हरियाणा, यूपी, बिहार और झारखंड के शहरों की फुल लिस्ट

Leave a Reply

Your email address will not be published.

देश और दुनिया की ताजातरीन खबरों के लिए हमे फॉलो करें फेसबुक,गूगल प्लस, ट्विटर पर और डाउनलोड करें Inkhabar Android Hindi News App