नई दिल्ली/ उत्तराखंड में सियासी घमासान के बाद अब एक बार फिर मुख्यमंत्री के आवास का वास्तुदोष चर्चाओं में आ गया है. मुख्यमंत्री का आवास को 30 करोड़ रुपए की लागत से बना है. इस सरकारी आवास में अब तक जितने भी मुख्यमंत्री रहे है वह अपना कार्यकाल यानी पूरे 5 साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए है. इस लिस्ट में अब त्रिवेंद्र सिंह रावत का भी नाम जुड़ गया है.

मुख्यमंत्री का आवास जो कि 30 करोड़ रूपए की लागत से बना है. उस सरकारी आवास में अफवाहों की वजह से करीबन सभी पूर्व मुख्यमंत्री इस आवास में रहने से बचते रहे है. बता दें कि त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सरकारी आवास में आने से पहले पूर्व राज्य संपत्ति विभाग ने बंगले को संवारने का काम भी किया था. इस मुख्यमंत्री सरकारी आवास का निर्माण नारायणदत्त तिवारी के कार्यकाल में शुरू हुआ था, जो बीजेपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री बीसी खंडूडी के पहले कार्यकाल में पूरा हुआ.

मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी ही सबसे पहले इस सरकारी आवास में रहे थे लेकिन कुछ ही समय बाद उन्हें पद से हटना पड़ा था. जब 2011 में भुवन चंद्र खंडूड़ी दोबारा मुख्यमंत्री बने, तो करीब छह महीने आवास में रहे थे लेकिन बाद में पार्टी चुनाव हार गई और खंडूड़ी मुख्यमंत्री होने के बावजूद कोटद्वार से चुनाव हार गए.

डॉ रमेश पोखरियाल निशंक भी मुख्यमंत्री के रूप में इस सरकारी आवास में ज्यादा दिनों तक पद पर नहीं रह पाए. विजय बहुगुणा सरकारी आवास में करीब एक साल और 11 महीने तक इस पद पर रह पाए थे. हरीश रावत भी अपनी कुर्सी सुरक्षित रखने के लिए इस मुख्यमंत्री आवास में शिफ्ट नहीं हुए और उन्होंने अपना पूरा कार्यकाल बीजापुर गेस्ट हाउस में ही बिताया था. वह कभी भी इस सरकारी आवास में नहीं गए. हालांकि वह भी 2017 में अपनी किस्मत के सितारे नहीं बदल पाए. और पद नहीं संभाल पाए. अब आखिरकार त्रिवेंद्र सिंह रावत भी इस सरकारी आवास में रहे और अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए. अब ये संयोग है या फिर वास्तुदोष पता नही लेकिन जो भी इस सरकारी आवास में रहता है वो अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाता है.

Uttarakhand Assembly Elections: जानिए कौन है तीरथ सिंह रावत, जिन्हे बनाया गया है उत्तराखंड का नया मुख्यमंत्री

Uttrakhand Assembly Elections: तीरथ सिंह रावत बने उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री

देश और दुनिया की ताजातरीन खबरों के लिए हमे फॉलो करें फेसबुक,ट्विटर