नई दिल्ली. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के छह महीने से भी कम समय बाद अपने पद से इस्तीफा देने की पेशकश की है। सूत्रों का कहना है कि तीरथ सिंह रावत ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को एक पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने राज्य में संवैधानिक संकट से बचने के लिए इस्तीफा देने की पेशकश की है।

संवैधानिक संकट क्या है?

तीरथ सिंह रावत ने 10 मार्च को त्रिवेंद्र सिंह रावत की जगह उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। शपथ लेने के समय तीरथ सिंह रावत उत्तराखंड विधानसभा में निर्वाचित विधायक नहीं थे बल्कि पौड़ी गढ़वाल का प्रतिनिधित्व करने वाले लोकसभा सांसद थे। वह वर्तमान में लोकसभा सांसद बने हुए हैं। संविधान के अनुसार, एक मंत्री या मुख्यमंत्री को शपथ लेने के छह महीने के भीतर राज्य विधानमंडल के लिए निर्वाचित होना होता है।

आपको बता दें कि उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में एक वर्ष से भी कम का समय बचा है और अपने पद पर बने रहने के लिए रावत का 10 सितम्बर तक विधानसभा सदस्य निर्वाचित होना संवैधानिक बाध्यता है। पौड़ी से लोकसभा सांसद रावत ने इस वर्ष 10 मार्च को मुख्यमंत्री का पद संभाला था।

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