नई दिल्ली. अमेरिका की एक ट्रैवर ब्लॉगर जब भारत घूमने आई तो उसके साथ कितना शर्मनाक बर्ताव हुआ, इसका खुलासा उसने खुद किया है. जॉर्डन टेलर नाम की इस महिला ने बताया कि नई दिल्ली में पुरुष बार-बार उसके पास आ रहे थे, उसे दबोचने की कोशिश कर रहे थे. वे मुझे छू रहे थे. उस वक्त मेरा बॉयफ्रेंड भी साथ था. सोशल मीडिया पर ट्रैवललाइट नाम ब्लॉग लिखने वाली जॉर्डन को एक होटल में कैसे प्रताड़ित किया गया, इसका खुलासा उन्होंने खुद किया है.

जॉर्डन अपने बॉयफ्रेंड लिविवो के साथ भारत आई थीं और उन्होंने दिल्ली के पहाड़गंज स्थित मेन बाजार रोड पर एक ओयो रूम्स में कमरा बुक किया था. लेकिन किसी काम से लिविवो को उससे पहले ही वापस जाना पड़ा. इसके बाद जो हुआ, उसे बताते हुए डर जॉर्डन की बातों में साफ झलकता है. जॉर्डन ने कहा, होटल का स्टाफ मेरा यौन उत्पीड़न करने लगा, जिसके बाद मुझे खुद को कमरे में बंद रखने पर मजबूर होना पड़ा.

जॉर्डन ने कहा, उत्पीड़न तब ज्यादा बढ़ गया, जब लिविवो को चार दिन पहले भारत छोड़कर लौटना पड़ा. जैसे ही लिविवो एयरपोर्ट रवाना हुआ, स्थितियां और भी खौफनाक हो गईं. ब्लॉग में जॉर्डन ने लिखा, ”जैसे ही लिविवो ने होटल छोड़ा, स्टाफ का बर्ताव अचानक बदल गया. एक वक्त एेसा आया, जब उन्होंने सीढ़ियों पर भी मुझे फॉलो किया. उन्होंने कमरे में कई बार फोन किया और मैं जानती थी कि वे होटल के कर्मचारी हैं, क्योंकि फोन वहीं इस्तेमाल हो सकता था. वे फोन पर सेक्शुअल आवाजें भी निकालते थे”.

दो दिन नरक बना होटल: जॉर्डन ने लिखा, ”मेरे भारत छोड़ने से दो दिन पहले किसी ने दरवाजा खटखटाया, लेकिन मैंने नहीं खोला. एक घंटे बाद वह शख्स दोबारा लौटा और कोई भारी चीज दरवाजे पर मारी, लेकिन मैंने तब भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. इसके बाद किसी ने कथित तौर पर बाहर से कमरे का एसी बंद कर दिया. इसके बाद उन्होंने दरवाजा खटखटाया और कहा कि AC खराब हो गया है, हम ठीक करने आए हैं. लेकिन मैंने मना कर दिया.फोन पर भी उन्होंने यही बात कही.” कुछ देर बाद उन्होंने कमरे का वाई-फाई भी बंद कर दिया.

उन्होंने दरवाजा खटखटाना बंद कर दिया, लेकिन मुझे फिर भी दरवाजे के नीचे से परछाइयां दिखाई दे रही थीं. जॉर्डन ने लिखा, ”मुझे पता था कि वे झूठ बोल रहे हैं और मेरे कमरे का AC खराब नहीं हुआ था. मैं जानती थी कि अगर मैंने कमरे का दरवाजा खोला तो…क्योंकि वे किसी भी तरह मेरे कमरे में घुसना चाहते थे.

पानी खत्म हो गया, नहीं खाया खाना: जॉर्डन ने बताया, दो दिनों तक एेसा ही चलता रहा, परछाइयां मेरे कमरे के इर्द-गिर्द ही थीं. मेरे कमरे में पानी खत्म हो गया और मैं खाना लेने बाहर भी नहीं जा सकती थी. जिस होटल में रह रही थी, उसी में कैद होकर रह गई. यह बेहद डरावना था. जॉर्डन का डर उस वक्त खत्म हुआ, जब वह एयरपोर्ट के लिए रवाना हुई. उसने गौर किया कि कैसे उस सुबह परछाइयां उसके कमरे के बाहर नजर नहीं आईं. वह एयरपोर्ट के लिए सुबह 3 सुबह ही निकल गई, जिसके बाद उसने चैन की सांस ली.

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