US Sanctions On CAB: नागरिकता संशोधन बिल सोमवार को लोकसभा में पास हो गया. अब बुधवार को गृह मंत्री अमित शाह इसे राज्यसभा में पेश करेंगे. लेकिन इस बीच इस बिल का विरोध राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर हो रहा है. अमेरिका की एक संस्था यूनाइटेड स्टेट्स कमिशन फॉर इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम ( USCIRF) ने  ने एक बयान जारी कर कहा है, लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल का पास होना बेहद परेशान करने वाला है. अगर CAB दोनों सदनों द्वारा पास होता है तो अमेरिकी सरकार को भारत के गृह मंत्री अमित शाह और अन्य शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ प्रतिबंध लगाने के बारे में सोचना चाहिए.

बता दें कि सोमवार को विपक्ष के तीखे विरोध के बावजूद मोदी सरकार ने लोकसभा में अपने पूर्ण बहुमत का लाभ उठाते हुए नागरिकता संशोधन बिल आसानी से पास करवा लिया. इस बिल के पक्ष में 311 वोट पड़े वहीं विपक्ष में महज 80 वोट पड़े. अब यह बिल बुधवार को राज्यसभा में पेश किया जाएगा. इस बिल को पेश करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि यह बिल बिल्कुल भी अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है. उन्होंने कहा कि इस बिल से यह साफ हो गया है कि किसी भी धर्म से संबंध रखने वाले लोगों को नरेंद्र मोदी सरकार में डरने की जरूरत नहीं है.

इस वजह से की प्रतिबंध की मांग

USCIRF ने अपने बयान में कहा कि भारत का यह नया कानून धर्म के आधार पर भेदभाव करता है. इसमें यह भी कहा गया कि भारत सरकार ने बरसों तक धार्मिक आजादी पर हमारी रिपोर्ट को अनदेखा किया है. बता दें कि USCIRF की सलाह मानने के लिए अमेरिका सरकार बाध्य नहीं है. हालांकि अमेरिकी सरकार का स्टेट डिपार्टमेंट जो विदेशी मुल्कों पर प्रतिबंध लगा सकता है, जरूर इसकी सलाहों पर अमल करता है.  बता दें कि भारत में जहां कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, एआईएमआईएम सहित लगभग समूचा विपक्ष इस बिल के विरोध में है वहीं पूर्वोत्तर के राज्यों विशेषकर असम में इस बिल के विरोध में लोग सड़कों पर हैं. 

आंतरिक मामलों पर विदेशियों के सलाह पर क्या रहा है भारत का पक्ष
भारत की यह स्पष्ट नीति रही है कि वह किसी तीसरे देश को अपने आंतरिक मामले में दखल देने की इजाजत नहीं देता न ही उनकी राय को प्रोत्साहित करता है. इसी के तहत USCIRF के अधिकारियों को भारत आकर स्थिति का जायजा लेने के लिए वीजा नहीं मिल पा रहा लगभग एक दशक से.

क्या कहता है नागरिकता संशोधन बिल

नागरिकता संशोधन बिल के जरिए मूल नागरिकता अधिनियम 1955 में बदलाव किया जाएगा. इससे बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदू, जैन, पारसी, बौद्ध और ईसाई धर्म के शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देने के नियम आसान किये जा रहे हैं. इस बिल में इन तीनों देशों के मुस्लिम शरणार्थियों को बाहर रखा गया है. इसी बात पर सदन में सरकार पर मुस्लिम विरोधी होने का आरोप लग रहा है. इसके साथ ही संविधान के आर्टिकल 14 के उल्लंघन की बात भी इस कानून के जरिए कही जा रही है. ऐसे में बड़ा सवाल यह भी है कि क्या यह कानून सुप्रीम कोर्ट में टिक पाएगा. इस पर जानकारों की राय बंटी हुई है.

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