नई दिल्ली. वित्त मंत्री अरुण जेटली आम बजट 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2018 का बजट पेश करेंगे. पिछले साल भी आम बजट 1 फरवरी को ही पेश किया गया था, संभावना है कि इस बार भी सेम डेट पर दोपहर को बजट पेश किया जाएगा. इस बार का बजट बहुत खास होने की संभावना है. यह मोदी सरकार का पांचवां और अंतिम बजट होगा. अगले साल 2019 में लोकसभा चुनाव हैं ऐसे में मोदी सरकार को जनता की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं की अनदेखी किए बगैर हर वर्ग का ध्यान रखना होगा.

संसद में बजट सत्र 29 जनवरी से शुरू हो रहा है. बजट सत्र का पहला चरण 29 जनवरी से 9 फरवरी तक चलेगा वहीं दूसरा सत्र 5 मार्च से 6 अप्रैल तक होगा. इन दोनों सत्रों के बीच में अवकाश रहेगा ताकि बजट संबंधी प्रस्तावों को स्थायी समितियों द्वारा भी क्लियर कर दिया जाए. आर्थिक व राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्र की मोदी सरकार के अंतिम बजट और इस साल कई राज्यों में चुनावों को देखते हुए यह आम बजट लोक लुभावन हो सकता है.

पिछले दो साल में मोदी सरकार द्वारा लिए गए दो बड़े फैसलों का नतीजा भी 2018 के आम बजट में देखने को मिल सकता है. नोटबंदी और जीएसटी के प्रदर्शन और क्रियान्वयन की झलक भी आम बजट में देखने को मिलने की संभावना है. अब लोगों की आंखें वित्तमंत्री अरुण जेटली पर ही लगी हुई हैं कि उनके ब्रीफकेस से क्या निकलता है. वित्त मंत्री अरुण जेटली फिलहाल बजट पेश करने की तैयारियों में जुटे हैं.

इस साल चार बड़े राज्यों कर्नाटक, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में सरकार की कोशिश रहेगी कि किसानों और मध्यवर्ग के लिए भी ज्यादा से ज्यादा सहूलियत प्रदान की जाए. वित्त मंत्री अरुण जेटली किसानों की आय बढ़ाने के प्रयासों के बारे में कह चुके हैं. उन्होंने कहा था कि कुछ स्थानों पर ज्यादा उत्पादन के कारण कीमतों में गिरावट देखी गई और किसानों को सही अपनी फसल का सही दाम नहीं मिल पाया. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि किसानों के लिए भी राहत की खबर मिलेगी.

आम बजट 2018 से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुधवार को देश के प्रमुख अर्थशास्त्रियों व विशेषज्ञों ने आर्थिक नीतियों पर अपने सुझाव भी दे चुके हैं. नीति आयोग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में 40 से ज्यादा अर्थशास्त्रियों ने समष्टिपरक अर्थव्यवस्था, कृषि व ग्रामीण विकास, रोजगार, स्वास्थ्य व शिक्षा, विनिर्माण व निर्यात, शहरी विकास, अवसंरचना व संपर्क जैसे विविध विषयों पर प्रधानमंत्री के सामने अपने विचार प्रस्तुत किए.

मुमकिन है कि इस बजट सत्र में सरकार कुछ ऐसे फैसले कर सकती है, जिससे इनकम टैक्स रिटर्न भरने का झंझट खत्म हो सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार का फोकस आयकरदाताओं को ज्यादा से ज्यादा सहूलियत देने पर है. ऐसे कई छोटे-छोटे आयकरदाता हैं, जिन्हें इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने में दिक्कत होती है. लिहाजा कुछ लोग ही रिटर्न फाइल कर पाते हैं और बाकी चाहते हुए भी रिटर्न फाइल नहीं कर पाते हैं.

बजट से पहले PM मोदी ने किया महासचिवों के साथ डिनर, सांसदों को दिए केंद्र की नीतियां लोगों तक पहुंचाने के निर्देश

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