नई दिल्ली: आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट के बाद अब देश को बजट का इंतजार है. मध्यम वर्ग की नजर हर बार बजट पर होती है क्योंकि टैक्स देने वाला एक बड़ा तबका नौकरीपेशा है. इस साल भी बजट से मिडिल क्लास नौकरीपेशा लोगों को बजट से काफी उम्मीदे हैं. उम्मीद की जा रही है कि इस बजट में सरकार टैक्स फ्री इनकम की सीमा ढाई से बढ़ाकर तीन लाख रुपये कर सकती है. आर्थिक विशेषज्ञ ये भी अनुमान लगा रहे हैं कि सरकार वेतन भोगियों को कुछ राहत देने के लिए फिर स्टैंडर्ड डिडक्शन शुरू कर सकती है.

फिलहाल ढाई लाख रुपये तक की सालाना इनकम पर कोई टैक्स नहीं है जबकि ढाई से पांच लाख रुपये की आय पर 5 पर्सेंट टैक्स लगता है. इसके अलावा इस वर्ग में 2500 रुपये की अतिरिक्त छूट भी दी गई है जिससे तीन लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगता है. माना जा रहा है कि वित्त मंत्री इसी स्लैब को तीन से पांच लाख रुपये कर सकते हैं. इसके बाद पांच से दस लाख रुपये की आय पर 20 फीसदी और दस लाख रुपये से ज्यादा की आय पर तीस फीसदी दर से टैक्स लग सकता है.

गौरतलब है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली एक फरवरी को मोदी सरकार के मौजूदा कार्यकाल का यह पांचवां और आखिरी पूर्ण बजट पेश करेंगे. बजट से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संकेत दिया है कि आगामी बजट लोक लुभावन नहीं होगा और सरकार सुधारों के रास्ते पर आगे बढ़ती रहेगी. ऐसे में बजट बनाते हुए सरकार के सामने राजकोषीय अनुशासन यानी फिस्कल डेफिसिट को कम से कम रखने की चुनौती होगी साथ ही 2019 का लोकसभा चुनाव भी सरकार के जहन में होगा.

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