नई दिल्ली : बीते दिनों रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अरनब गोस्वामी और BARC के पूर्व सीईओ पार्थ दासगुप्ता की व्हाट्सएप चैट के कुछ हिस्से वायरल हुए थे. वहीं अब इस कड़ी में BARC के पूर्व सीईओ पार्थ दासगुप्ता ने एक और सनसनीखेज खुलासा किसा है. दरअसल, इंडियन एक्सप्रेस अख़बार के मुताबिक ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) इंडिया के पूर्व सीईओ पार्थ दासगुप्ता ने मुंबई पुलिस को दिए लिखित बयान में दावा किया है कि अरनब गोस्वामी ने उन्हें न्यूज चैनल के पक्ष में रेटिंग देने के लिए तीन साल में कुल 40 लाख रुपये दिए थे. साथ ही दो फैमिली ट्रिप के लिए 12000 यूएस डॉलर (तकरीबन 8,75,910 रुपये) दिए थे. यह बात टीआरपी स्कैम में पेश की गई एक अतिरिक्त चार्जशीट में सामने आई है.

अखबार के मुताबिक़, 3600 पेजों की इस अतिरिक्त चार्जशीट में दासगुप्ता, ब्रॉडकास्ट ऑडिएंस रीसर्च काउंसिल (बार्क) रोमिल रमगढ़िया और रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के सीईओ विकास खनचंदानी के ख़िलाफ़ दायर की गई है. इससे पहले नवंबर 2020 को पुलिस ने जो चार्जशीट फाइल की थी जिसमें 12 लोगों के नाम शामिल थे.

बता दें कि दासगुप्ता ने अपने लिखित बयान में कहा, ‘मैं अरनब गोस्वामी को 2004 से जानता हूं. हम टाइम्स नाउ में साथ में काम करते थे. मैं 2013 में सीईओ के पद पर BARC जॉइन किया. अरनब गोस्वामी ने 2017 में रिपब्लिक लॉन्च किया. रिपब्लिक टीवी की लॉन्चिंग से पहले ही उसने मुझे लॉन्चिंग प्लान के बारे में बताया था और इशारों-इशारों में उसके चैनल के लिए अच्छी रेटिंग देने में मदद मांगी थी. गोस्वामी अच्छी तरह जानते थे कि मुझे पता है कि टीआरपी सिस्टम कैसे काम करता है. उन्होंने भविष्य में मेरी मदद की बात कही.’ उन्होंने आगे लिखा है कि ‘मैंने टीआरपी रेटिंग में हेरफेर सुनिश्चित करने के लिए अपनी टीम के साथ काम किया जिससे रिपब्लिक टीवी को नंबर 1 रेटिंग मिली। यह सिलसिला 2017 से 2019 तक चलता रहा। इसके बदले 2017 में अरनब लोवर परेल स्थित सेंट रेजिस होटल में मुझसे मिले और मेरी फ्रांस व स्विट्जरलैंड की फैमिली ट्रिप के लिए 6000 डॉलर दिए। फिर 2019 में भी अरनब मुझसे सेंट रेजिस में व्यक्तिगत रूप से मिले और मेरी स्वीडन व डेनमार्क की फैमिली ट्रिप के लिए 6000 डॉलर दिए’

वहीं दुसरी ओर दासगुप्ता के इस बयान पर उनके वकील अर्जुन सिंह ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा है कि ‘हम इस बयान को पूरी तरह नकारते हैं क्योंकि यह दबाव में दर्ज किया गया होगा. कोर्ट में इसकी कोई प्रमाणिकता नहीं है’

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