नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा तीन तलाक को आपराधिक कृत्य बनाए जाने को लेकर पारित किए गए अध्यादेश को असदुद्दीन ओवैसी ने मुस्लिम महिलाओं के साथ अन्याय बताया है. AIMIM प्रमुख ओवैसी ने इस आदेश को मुस्लिम विरोधी बताते हुए कहा कि ये आदेश संविधान में दिए गए मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन है.

तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति तीन तलाक कहता है तो शादी रद्द नहीं होगी, ऐसे में आप किस गुनाह के लिए उस व्यक्ति को सजा देना चाहते हैं? उन्होंने कहा कि सरकार के अध्यादेश के मुताबिक आरोपी व्यक्ति ही महिला को गुजारा भत्ता देगा. उन्होंने सवाल उठाया कि जब आरोपी जेल में होगा तो वो कैसे कमाएगा और कैसे गुजारा भत्ता देगा? ओवैसी ने ये भी कहा कि इस्लाम में शादी एक नागरिक कॉन्ट्रैक्ट है जिसे दंडनीय अपराध बनाना पूरी तरह गलत है.

ओवैसी ने कहा कि सरकार को तीन तलाक को अपराध घोषित करने की बजाय उन 24 लाख शादीशुदा महिलाओं के लिए कानून बनाना चाहिए जिनके पति उन्हें बिना तलाक दिए ही छोड़ चुके हैं. तीन तलाक की प्रथा को ‘बर्बर और अमानवीय’ करार देते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा कि करीब 22 देशों ने तीन तलाक पर कानून बनाया है. 

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तीन तलाक अपराध तभी जब पत्नी या मायके वाले पुलिस के पास दर्ज कराएंगे ट्रिपल तलाक का केस- कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद

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