नई दिल्ली. गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि ये दिन ऐतिहासिक है जब हम तीन तलाक बिल को लोकसभा में पारित कराने में समर्थ हुए हैं. गौरतलब है कि तीन तलाक बिल पर लोकसभा ने AIMIM प्रमुख असद्दुदीन ओवैसी के संसोधन प्रस्तावों को खारिज कर दिया. ओवैसी ने कहा था कि तीन तलाक बिल से मुस्लिम महिलाओं के साथ और भी नाइंसाफी होगी. सदन ने ओवैसी के अलावा कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव, आरएसपी सांसद एनके प्रेमचंद्रन और बीजू सीपीएम सांसद ए संपत,जनता दल के सांसद भर्तुहरि महताब के संशोधन प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया.

देश में मुस्लिम समाज में प्रचलित तीन तलाक को रोकने संबंधित मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक (ट्रिपल तलाक) को कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में पेश किया. लेकिन इस बिल के प्रावधानों का राजद, बीजद और ओवैसी ने विरोध किया है. एआइएमआइएम के प्रेसिडेंट और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बिल पर सवाल उठाते हुए इसे मूलभूत अधिकारों का हनन बताया है. वहीं ऑल इंडिया मुस्‍लिम वूमंस पर्सनल लॉ बोर्ड की शाइस्‍ता अंबर ने इसे सालों से इस कुप्रथा को झेल रही पीड़ित महिलाओं के लिए धैर्य का इनाम बताया है. इस बिल पर स्‍पीकर सुमित्रा महाजन ने कहा, ‘विधि मंत्री ने मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक को पारित कराने का अनुरोध किया है जिसे दो बजे बाद की कार्यसूची में शामिल कर लिया गया है. 

लोकसभा की कार्यसूची के मुताबिक, तीन तलाक से जुड़ा मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक 2017 निचले सदन में 28 दिसंबर को पेश किया. क्रिसमस की छुट्टियों के बाद बुधवार 27 दिसंबर से शुरू हुए सत्र में सरकार के कामकाज की सूची में इस विधेयक को पेश किए जाने का जिक्र किया गया है. वहीं कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए ट्रिपल तलाक बिल पारित कराने को भाजपा ने कमर कस ली है. सभी भाजपा सांसदों का संसद में विधेयक को पारित कराने के लिए उपस्थित रहना अनिवार्य है.

दूसरी ओर बुधवार को संसद भवन के बाहर अनंत कुमार ने संवाददाताओं से कहा कि विपक्षी दल ध्वनिमत से संसद में ट्रिपल तलाक बिल को पारित कराने की अपील की है. इससे वहीं केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने पिछले दिनों कहा था कि सरकार तीन तलाक को लेकर कानून बनाने जा रही है. हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि यह कानून किसी को परेशान करने के लिए नहीं होगा. वहीं अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने मंत्रिमंडल द्वारा तीन तलाक पर विधेयक को मंजूरी दिए जाने पर मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया है.

इससे पहले केंद्रीय कैबिनेट ने तीन बार तलाक बोलकर तलान देने पर तीन साल की जेल के प्रावधान वाले बिल को मंजूरी दे दी थी. बिल के मुताबिक तीन तलाक को गैर जमानती अपराध भी बनाने की तैयारी है. बिल के मुताबिक, एक बार में ट्रिपल तलाक देना अवैध माना जाएगा. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त को एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) के चलन को निरस्त कर दिया था.

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